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डिग्री पर 'इंडिया' की जगह देश का नाम 'भारत' लिख रहीं यूनिवर्सिटीज, वजह ये कैंपेन है

विश्वविद्यालयों की डिग्री, मार्कशीट्स, कॉरेस्पॉन्डेंस, माइग्रेशन और यहां तक की साइनबोर्ड्स पर भी इंडिया शब्द हट गया है. इसकी जगह अब भारत शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी ने डिग्रियों में 'इंडिया' की जगह 'भारत' शब्द इस्तेमाल करने का फैसला किया है (PHOTO-X)

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  • रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी ने अपने सभी डिग्रियों और मार्कशीट पर 'इंडिया' की जगह 'भारत' शब्द का इस्तेमाल शुरू करने की घोषणा की है, जिसे 21 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दीक्षांत समारोह में लागू किया जाएगा।
  • यह निर्णय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अभियान और कई विश्वविद्यालयों के प्रस्तावों के आधार पर लिया गया, जो देश के वास्तविक नाम 'भारत' को आधिकारिक दस्तावेजों में स्थापित करने के लिए सक्रिय हैं।
  • इस बदलाव से यूनिवर्सिटी की पहचान में परिवर्तन होगा और अन्य शैक्षणिक संस्थान भी इस मॉडल को अपनाकर देश के नाम के आधिकारिक प्रयोग पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 21 जून को मध्य प्रदेश के जबलपुर में रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह (Convocation) में शामिल होना है. दिलचस्प बात ये है कि इस समारोह में दी जाने वाली सभी डिग्रियों पर देश का नाम 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा होगा. इस मौके पर रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राजेश कुमार वर्मा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यूनिवर्सिटी अब अपनी सभी डिग्रियों और मार्कशीट पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में 'भारत' शब्द का ही इस्तेमाल करेगी. उन्होंने कहा, 

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G-20 समिट में ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था. हम भारत के लोग हैं और देश का असली नाम भारत है. इंडिया नाम बाद में आया. इसलिए, हमारी एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने अपने सभी डॉक्यूमेंट्स में ‘भारत’ शब्द का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव पास किया है.

वाइस चांसलर राजेश कुमार वर्मा ने यह भी बताया कि इस प्रस्ताव के लिए यूनिवर्सिटी को 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान आयोजित 'ज्ञान महाकुंभ' में सम्मानित भी किया गया था. 

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ये सिर्फ इसी विश्वविद्यालय की बात नहीं है. मध्य प्रदेश के इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का दावा है कि अपने डॉक्युमेंट्स में ‘इंडिया’ को ‘भारत’ से रिप्लेस करना सबसे पहले उसने शुरू किया था. वह पहला विश्वविद्यालय था, जिसने ये किया. विश्वविद्यालय के कुलपति राकेश सिंघाई ने कहा कि सबसे पहले उन्होंने ही ऐसा प्रस्ताव पारित किया था कि हर जगह 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा जाएगा. बाकी विश्वविद्यालय भी अब इसको फॉलो कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश के अलावा, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के केंद्रीय विश्वविद्यालय गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी में भी ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ शब्द का प्रयोग किया जा रहा है. इसके वीसी आलोक कुमार चक्रवाल का कहना है कि देश का असली नाम भारत है. इसे विदेशियों ने ‘इंडिया’ नाम दिया था. हमें अपने देश को भारत ही कहना चाहिए.

इसके पीछे कौन है?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नाम का संगठन इसके पीछे है. इसे लेकर यह संगठन एक खास अभियान भी चला रहा है. न्यास को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से करीबी संबंध रखने वाला संगठन माना जाता है. न्यास की यूनिट भारतीय भाषा मंच की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एमएल गुप्ता हैं. उन्होंने बताया कि वो लंबे समय से 'इंडिया' की जगह 'भारत' शब्द को अपनाने के लिए अभियान चला रहे हैं.

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गुप्ता का दावा है कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र के 17 विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों ने प्रस्ताव पारित करके आधिकारिक कामकाज में केवल 'भारत' शब्द का इस्तेमाल करने का फैसला किया है.

यह भी पढ़ें: इंडिया, भारत, हिंदुस्तान, कहां से आए ये नाम?

पहली बार नहीं

हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब ‘इंडिया’ की जगह देश का नाम ‘भारत’ रखने की बहस चली हो. साल 2023 में जी20 समिट के दौरान भी पीएम मोदी के सामने लगी प्लेट पर ‘भारत’ लिखा था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसपर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह इंडिया-भारत का पूरा विवाद विपक्षी गठबंधन इंडिया के डर की वजह से खड़ा किया गया है. उन्होंने यूरोप की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,

ये जो फ्रेज है - 'इंडिया, दैट इज भारत' - मैं इसके साथ पूरी तरह से सहमत हूं. ये हमारी पहचान है. लेकिन सरकार में थोड़ा डर है. एक तरह से, ये एक घबराहट की प्रतिक्रिया है. और, ध्यान भटकाने वाली रणनीति है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना पर लेते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि जब-जब उन्होंने या उनकी पार्टी ने अडानी या किसी और मुद्दे पर सवाल खड़े किए हैं, तब-तब मोदी सरकार ध्यान भटकाने वाली कोई नया नाटकीय विवाद लेकर आ जाती है.

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