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मणिपुर में कुकी-जो समुदाय का ऐलान, सरकार में शामिल हुए अपने ही विधायकों का किया बहिष्कार

लोगों का गुस्सा मुख्य रूप से नेमचा किपगेन पर है. नेमचा ने 4 फरवरी, 2026 को डिप्टी चीफ मिनिस्टर के तौर पर शपथ ली थी. KZC ने कुकी-जो लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सामाजिक, पारंपरिक या सार्वजनिक मामले में विधायकों के साथ सहयोग न करें.

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मणिपुर में प्रदर्शन जारी है (PHOTO-India Today)

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद वहां के कुकी-जो आदिवासी ग्रुप ने अपने ही साथियों, खासकर विधायकों का बहिष्कार करने का ऐलान किया है. ये अपने ही समुदाय के उन विधायकों का विरोध कर रहे हैं जो युमनाम खेमचंद सिंह की सरकार में शामिल हुए हैं. इन विधायकों द्वारा ‘धोखाधड़ी’ के विरोध में कुकी-जो लोगों द्वारा पहाड़ी इलाकों में बहिष्कार और सुबह से शाम तक ‘बंद’ लागू किया गया. यह सब मणिपुर विधानसभा के सत्र की शुरुआत से कुछ घंटे पहले ही हुआ. सत्र की शुरुआत राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के भाषण से हुई थी.

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बंद की वजह से चंदेल, चुराचांदपुर, कांगपोकपी और फेरजावल जिलों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ है. प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर लेकर रैलियां निकालीं और कुछ कुकी-जो विधायकों को गद्दार कह कर संबोधित किया. इसके अलावा कुछ जिलों में आगजनी की खबरें भी आई हैं. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मणिपुर को केंद्र शासित प्रदेश जैसा बनाया जाए. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ सरकार बनाने को प्राथमिकता दी जा रही है न कि प्रशासन संभालने पर.

लोगों का गुस्सा मुख्य रूप से नेमचा किपगेन पर है. नेमचा ने 4 फरवरी, 2026 को डिप्टी चीफ मिनिस्टर के तौर पर शपथ ली थी. कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने कहा कि कुछ कुकी-जो विधायकों का सरकार में शामिल होने का फैसला उस सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव का उल्लंघन है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अलग प्रशासन के समर्थन में लिखित राजनीतिक प्रतिबद्धता दिए जाने तक सरकार गठन से दूर रहने का फैसला किया गया था. KZC ने कहा कि ये विधायक कुकी-जो सामाजिक संगठनों के नेताओं और कुछ विद्रोही समूहों के साथ उस प्रस्ताव का हिस्सा थे, जिन्होंने अगस्त 2008 में केंद्र के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. KZC ने कहा, 

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मेतेई प्रभुत्व वाली सरकार में शामिल होकर, इन विधायकों ने प्रभावी रूप से खुद को हमारे दुश्मन के साथ मिला लिया है, और कुकी-जो समुदाय द्वारा सहे गए दर्द और बलिदानों की अनदेखी की है. KZC ने उनके इस काम को एक गंभीर विश्वासघात और कुकी-जो लोगों की एकता, भावनाओं और सामूहिक राजनीतिक रुख को कमजोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश बताया.

KZC ने कुकी-जो लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सामाजिक, पारंपरिक या सार्वजनिक मामले में विधायकों के साथ सहयोग न करें. अपील में कहा गया है कि यह बहिष्कार तब तक लागू रहेगा जब तक वे मणिपुर सरकार में हिस्सा लेना बंद नहीं कर देते और खुद को कुकी-जो लोगों की सामूहिक स्थिति के साथ फिर से नहीं जोड़ लेते.

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