राजस्थान के कोटा जिले में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच मांओं की मौत हो गई थी. अब जांच में पता चला कि खून बहने से रोकने के लिए उन्हें जो इंजेक्शन दिए गए थे, उनमें ब्लड क्लॉटिंग कंपोनेंट नहीं था. इंजेक्शन में सिर्फ पानी था, जिस वजह से खून का बहना नहीं रुका. यह सब कोटा के सरकारी अस्पताल 'न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल' में हुआ. राजस्थान की भजनलाल सरकार ने नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के इस्तेमाल से इनकार किया था. लेकिन अब राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का कबूलनामा आ गया है.
कोटा में प्रेग्नेंट महिलाओं की मौत मामले में बड़ा खुलासा, खून रोकने वाले इंजेक्शन में था पानी
Kota Maternal Deaths: कोटा में गर्भवती महिलाओं की मौत मामले की जांच में पता चला कि मौत Oxytocin Injection की वजह से हुई. जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है कि इस इंजेक्शन में दवाई की जगह पर पानी भरा था.


10 जून को हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर ने माना कि इंजेक्शन में पानी भरा था. उन्होंने कहा,
"ऑक्सीटोसिन के अंदर सिर्फ पानी भरा था... ये अनियमितता हमने पाई... हम उनको 20-25% छूट देते हैं कि आपके पास ड्रग्स नहीं है, तो लोकल से ले सकते हो, तो लोकल परचेज किया गया था. उसके अंदर दवाई की कोई भी मात्रा नहीं थी. जब डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया, वो इंजेक्शन पोस्ट डिलिवरी के बाद ब्लीडिंग रोकता है. तो जब इंजेक्शन दिया और उसके अंदर ड्रग ही नहीं थी और खाली पानी गया तो एक्सेसिव ब्लीडिंग तो जरूर होगी."
इस साल मई में न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्टिपल में प्रेग्नेंट महिलाओं की सी-सेक्सन से डिलीवरी हुई थी. कोटा के मामले में सीजेरियन डिलीवरी के 8 से 10 घंटे बाद महिलाओं में किडनी फेलियर के लक्षण दिखे और उनकी मौत हो गई. इंडिया टुडे से जुड़े शरत कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पता चला कि इंजेक्शन में दवा की जगह पानी भरा था.
इंडिया टुडे ग्रुप ने पहले ही दावा किया थाजब यह मामला सामने आया था, तो राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए. इंडिया टुडे ग्रुप ने पड़ताल की, जिससे पता चला कि मौत ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की वजह से हुई हैं. राजस्थान सरकार ने तब एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है. नकली ऑक्सीटॉसिन से मौतें नहीं हो सकती हैं. अब जांच में ये बात साबित हो गई है.
राजस्थान के फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल कमिश्नरेट (ड्रग कंट्रोल विंग) के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने भी माना था कि अस्पताल के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल टेस्ट में फेल हो गए. अब दलील दी जा रही है कि दवाइयों की 25% खरीद लोकल लेवल पर करने की छूट रहती है. आरोप है कि लोकल लेवल पर ही नकली इंजेक्शन खरीदा गया था.
अधिकारियों की मानें तो नकली ऑक्सीटोसिन वाले इंजेक्शन जिस बैच के हैं वो पंजाब में अमृतसर की Jackson Laboratories में बनाए गए हैं. वही इंजेक्शन कोटा के उस अस्पताल में इस्तेमाल हुए जहां 5 महिलाओं की जान चली गई.
कोटा हॉस्पिटल में अब सारा स्टॉक सीज कर लिया गया है. सरकार ने सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज (SMS Medical College) और एम्स के डॉक्टरों को कोटा भेजा था. उन्होंने उन सब दवाओं की जांच के आदेश दिए जो मृतक महिलाओं को दी गई थीं, तब जाकर सब दूध का दूध और पानी का पानी हो पाया.
सवाल है कि असली गुनाहगारों पर कार्रवाई की जाएगी या कुछ स्टाफ को सस्पेंड कर लीपापोती कर दी जाएगी? बात सिर्फ कोटा या एक अस्पताल की नहीं है. न ही सिर्फ उन 5 महिलाओं की है, जिनकी जान इस वजह से गई. नकली दवाएं अगर इसी तरह से इस्तेमाल होती रहीं, तो यह गंभीर समस्या बन सकती है.
आरोप है कि नकली दवाओं का जाल पूरे राजस्थान में है. रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश, आंध प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में उसी कंपनी की बनाई दवाएं भेजी गई हैं, जो कोटा में 5 महिलाओं की मौत की वजह बनीं.
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