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YouTube देखकर डाइटिंग कर रही लड़की की मौत, वजह जान कलेजा कांप जाएगा

Kerala Girl Extreme Dieting Death: मृतका एम श्रीनंदा के रिश्तेदारों का कहना है कि उसने वजन बढ़ने के डर से खाना छोड़ रखा था. वह बहुत अधिक वर्कआउट करती थी और केवल लिक्विड डाइट पर थी. जिससे वह लगातार भूखी रहती थी.

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मृतका एम श्रीनंदा(दाएं), पुलिस की प्रतीकात्मक तस्वीर(बाएं) (फ़ोटो - आजतक)

केरल के कन्नूर ज़िले में 18 साल की एम श्रीनंदा की मौत चर्चा में है. बताया गया कि वो अपने ज़्यादा वजन से परेशान थी. ऐसे में उसने सीरियस डाइट प्लान बना रखा था. इसके बारे में उसने यू-ट्यूब से जानकारी हासिल की थी (Kerala YouTube diet girl death). कथित तौर पर वो कई महीनों से पूरी तरह लिक्विड डाइट पर ही जी रही थी. उसके ‘एनोरेक्सिया नर्वोसा’ नाम की बीमारी से जूझने की बात भी कही गई है.

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मामला क्या है?

एम श्रीनंदा कन्नूर के कुथुपरम्बा की रहने वाली थी. वो मट्टनूर के पजहस्सी राजा NSS कॉलेज की फ़र्स्ट ईयर की स्टूडेंट थी. लगभग एक हफ़्ते पहले उसे बहुत ज़्यादा थकान और उल्टी होने लगी. ऐसे में थालास्सेरी को-ऑपरेटिव अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वो वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी. 8 मार्च की रात को उसकी मौत हो गई.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इससे पहले भी उसके परिवार ने कोझीकोड मेडिकल कॉलेज में उसका इलाज करवाया था. उसके रिश्तेदारों का कहना है कि श्रीनंदा ने वजन बढ़ने के डर से खाना छोड़ रखा था. वो बहुत ज़्यादा व्यायाम करती थी. साथ ही, पर लिक्विड डाइट पर थी. जिसकी वजह से उसे लगातार भूख लगती रहती थी.

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डॉक्टर ने क्या बताया?

श्रीनंदा का इलाज करने वाले डॉ. नागेश प्रभु ने पुष्टि की कि वो एनोरेक्सिया नर्वोसा से पीड़ित थीं. इस बीमारी के बारे में बताएंगे. पहले डॉक्टर की कही बातें जान लेते हैं. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, नागेश प्रभु ने बताया,

वो क़रीब छह महीने से भूखी रह रही थी. मेरे एक कलिग ने पहले उसके परिवार को मनोचिकित्सक (Psychiatrist) की मदद लेने की सलाह दी थी. लेकिन उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझा नहीं.

Anorexia nervosa है क्या?

एनोरेक्सिया नर्वोसा एक Eating Disorder है. यानी खाने-पीने से जुड़ा विकार. इसकी गहरी मनोवैज्ञानिक जड़े हैं. इससे पीड़ित व्यक्ति पर हमेशा वजन बढ़ने का डर हावी रहता है. इसके चलते वो खाना तक छोड़ देता है. अगर वो खाना खा भी ले, तो उसे गिल्ट होने लगता है.

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वो या तो खाने को जबरन उल्टी कर बाहर निकाल देता है. या बहुत ज़्यादा व्यायाम करने लगता है. डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को अंततः भूख का अहसास नहीं होता. श्रीनंदा के मामले में उसके सोडियम और शुगर का स्तर इतना गिर गया कि उसे ठीक नहीं किया जा सका.

एक्सपर्ट्स की राय

ऐसे मामले पश्चिमी देशों में ज़्यादा देखने को मिलते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के सालों में भारत में भी इसके मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है. इसका सबसे बड़ा कारण है सोशल मीडिया. सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर साइज़-जीरो फिगर का महिमामंडन किया जाता है. ऐसे में बच्चों और युवाओं में वजन घटाने का व्यवहार पैदा होता है. इसी को चलते उन्हें ऐनोरेक्सिया नर्वोसा जैसी बीमारी घेर लेती है.

एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने चेतावनी देते हुए न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

युवा दिमाग़ बहुत जल्दी प्रभावित होते हैं. वो अनरियलिस्टिक ब्यूरी स्टैंटर्ड तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. ऐसे में वो वजन घटाने को लेकर ज़्यादा चिंतित हो जाते हैं. कई बार इसके घातक परिणाम भी हो सकते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक डाइटिंग के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है. शरीर को फिट दिखाने सेे ज़्यादा फिट रहने पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

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