दिल्ली स्थित जवाहर नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की गई. अब इस पर JNU छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा का बयान सामने आया है. उनका कहना है कि यह प्रदर्शन ‘5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा’ के विरोध में हुआ. जबकि बीजेपी ने दावा किया है कि यह विरोध प्रदर्शन उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में हुआ.
'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी', JNU में लगे विवादित नारों पर छात्रसंघ अध्यक्ष की सफाई आई है
JNU Protest: घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें कुछ छात्र ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी’ जैसे नारे लगाते दिख रहे हैं. BJP ने दावा किया है कि यह विरोध प्रदर्शन Umar Khalid और Sharjeel Imam के समर्थन में हुआ.
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घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें कुछ छात्र ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी’ जैसे नारे लगाते दिख रहे हैं. इंडिया टुडे से बात करते हुए JNUSU प्रेसिडेंट ने कहा कि छात्र 5 जनवरी की हिंसक रात को याद करने के लिए इकट्ठा हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इस दिन ABVP ने कैंपस में घुसकर छात्रों पर हमला किया था. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ नारों के सवाल पर उन्होंने कहा,
ये नारे जब भी लगाए जाते हैं, तो उस शख्स के खिलाफ होते हैं जो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री हैं. जो 2002 में हुई इतनी हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें कौन छू सकता है? लेकिन हमें दृढ़ विश्वास है कि इस देश में उस फासीवादी विचारधारा का अंत होना चाहिए जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं.
जब इंडिया टुडे के पत्रकार ने उनसे दोबारा पूछा कि क्या उन्हें नारे आपत्तिजनक नहीं लगते, तो उन्होंने फोन काट दिया. अदिति मिश्रा ने JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी दुख जताया.
न्यूज एजेंसी PTI से बात करते हुए अदिति ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे और वे किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं थे. वे किसी को लक्ष्य करके नहीं लगाए गए थे.
2020 में क्या हुआ था?JNU कैंपस में 5 जनवरी 2020 को हिंसा भड़क गई थी. नकाबपोश लोगों की एक भीड़ ने कैंपस में घुसकर तीन हॉस्टलों के छात्रों के साथ मारपीट की. इस दौरान तत्कालीन जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत कम से कम 28 लोग घायल हो गए थे. हमलावरों पर कार्रवाई न करने को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना हुई. साथ ही FIR में घोष समेत छात्र संघ नेताओं का नाम होने पर पक्षपात का भी आरोप लगा था.
JNU में हुई विवादित नारेबाजी पर दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा,
JNU में नक्सलियों, आतंकियों, दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारे लगाने वाले हताश हैं क्योंकि नक्सली खत्म किए जा रहे हैं, आतंकी निपटाए जा रहे हैं और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुका है.
वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कुछ लोगों ने JNU को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का अड्डा बना दिया है. उन्होंने कहा,
राहुल गांधी, टीएमसी, कम्युनिस्ट जैसे लोग इस गिरोह का हिस्सा हैं... ये लोग सुप्रीम कोर्ट में विश्वास नहीं करते. खालिद अंसारी और शरजील इमाम के समर्थन में और प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह के विरोध में नारे लगाए जा रहे हैं. ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए.
गिरिराज सिंह ने कहा, “पाकिस्तान जैसी मानसिकता रखने वाले, 'चिकन नेक' की बात करने वाले लोगों को भारत की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी.”
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‘गुस्सा जाहिर करने का तरीका’JNU में पीएम मोदी के खिलाफ लगाए गए नारों पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा,
छात्र गुस्से में आकर ये बातें कह रहे हैं. इन्हें (नारों को) अक्षरशः नहीं लेना चाहिए. वे (BJP का जिक्र करते हुए) जाहिर तौर पर इसे लेकर हंगामा खड़ा करेंगे.
एक अधिकारी ने बताया कि JNU प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर इस मामले में FIR दर्ज करने की मांग की है. खबर लिखे जाने तक पुलिस और प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
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