ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है. उम्मीद है कि दोनों देशों के बड़े अधिकारी इस हफ्ते के आखिर में तुर्की के इस्तांबुल में मिल सकते हैं. अराग़ची का ये बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है.
ईरान-अमेरिका के तनाव के बीच न्यूक्लियर बातचीत, विदेश मंत्री ने दिया संकेत
Iran-America talks: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच Nuclear मुद्दे पर बात हो सकती है. विदेश मंत्रालय ने संकेत किया कि इस हफ्ते 6 फरवरी को बैठक हो सकती है.


ईरान के संस्थापक आयतुल्लाह रूहोल्लाह ख़ुमैनी की दरगाह पर बोलते हुए अराग़ची ने कहा,
आज ईरान के दुश्मन कूटनीति की बात कर रहे हैं, जबकि ईरान पहले से ही इसके लिए तैयार रहा है. बस ज़रूरी है कि आपसी सम्मान हो और दोनों पक्षों के हितों का ख्याल रखा जाए.
इसके अलावा राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिका के साथ परमाणु बातचीत की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं. विदेश मंत्रालय ने बताया कि न्यूक्लियर बातचीत के ब्योरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है और आने वाले कुछ दिनों में ये प्रक्रिया पूरी हो सकती है. हालांकि अभी तक किसी तारीख़ का ऐलान नहीं हुआ है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि 6 फरवरी को इस्तांबुल में मुलाक़ात हो सकती है.
इस बैठक में क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं. अगर ये बैठक होती है, तो ये अप्रैल पिछले साल के बाद अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच पहली सीधी बातचीत होगी.
The Times of Israel की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 फरवरी को पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि मामला बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है. वो ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की उस चेतावनी पर जवाब दे रहे थे, जिसमें ख़ामेनेई ने कहा था कि, अगर अमेरिका ने हमला किया तो पूरे इलाके में जंग फैल सकती है.
ट्रंप ने अपने बयान में कहा,
अमेरिका से बहुत से जहाज ईरान की ओर बढ़ रहे हैं. सबसे बड़े और सबसे ताकतवर जहाज बेहद करीब हैं. अस दो दिन की दूरी पर तैनात हैं. ईरान के साथ बातचीत भी जारी है. देखते हैं कि क्या होता है. उम्मीद है कि हम कोई समझौता कर लेंगे. अगर समझौता नहीं हुआ तो चीज़ें ख़राब भी हो सकती हैं.
अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन भी शामिल है. ट्रंप कह चुके हैं कि वो चाहते हैं कि ईरान अत्यधिक यूरेनियम बनाना बंद करे और अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी रोक लगाए.
इससे पहले जून 2025 में एक छोटे युद्ध के दौरान इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए थे. हाल की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा है कि जून में हुए हमलों के बाद ईरान के इस्फ़हान और नतांज़ परमाणु ठिकानों पर मरम्मत का काम चल रहा है.
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो वो जवाब देगा और इसमें इज़राइल पर हमले भी शामिल हो सकते हैं. इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि इज़राइल ‘हर हालात के लिए तैयार है’.
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