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कौन बोल सकता है 'बाबा'? ये पढ़कर सब क्लियर हो जाएगा

उत्तराखंड में कुछ बवालियों ने कहा कि ‘बाबा’ नाम का इस्तेमाल केवल हिंदू समुदाय के लोग कर सकते हैं, मुस्लिम नहीं. इसलिए यह जानने की जरूरत है कि आखिर बाबा शब्द किस भाषा से आया और उस पर कोई दावा कर भी सकता है या नहींं.

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मोहम्मद दीपक

“बाबा हटाओ, बाबा हटवाओ ये…”

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उत्तराखंड के कोटद्वार में हनुमान जी का एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर है. नाम है बाबा सिद्धबली. यहीं पर बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म की एक दुकान है, जिसका नाम ‘बाबा’ है. इस दुकान के मालिक का नाम वकील सलमानी है. 26 तारीख को 6–7 लोग अचानक दुकान में घुस आए और बोले कि दुकान का नाम बदलो. उन्हें दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द से आपत्ति थी.  इन लोगों का दावा था कि ‘बाबा’ नाम का इस्तेमाल केवल हिंदू समुदाय के लोग कर सकते हैं, मुस्लिम नहीं. 

अगर आप हिंदुस्तानी ज़बान बोलते हैं, तो आपसी बोलचाल में ‘बाबा’ दिन भर में शब्द कम से कम एक बार सुनने या बोलना आ ही जाता होगा. सवाल ये कि 'बाबा' शब्द आया कहां से? क्या किसी एक भाषा से दूसरी भाषाओं ने इसे उधार लिया है या कहानी कुछ और है.

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बाबा शब्द का इतिहास

प्रसिद्ध भाषाविद डॉक्टर सुरेश पंत के मुताबिक, बाप शब्द संस्कृत की वप् धातु से बना है. दरअसल हिंदी/संस्कृत व्याकरण में क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं. धातु वो शब्द है जिससे क्रिया के अन्य शब्द बनते हैं, जैसे 'पढ़' से पढ़ना, पढ़ा, पढ़ेगा आदि शब्द बने हैं. वैसे ही वप् शब्द का अर्थ होता है बीज बोना, पौधा लगाना, रोपना आदि. ये सब काम सुरक्षा और देखरेख से जुड़े हैं. 

विद्वान वामन शिवराव आप्टे के संस्कृत कोश के अनुसार इससे बने "वप्रः" शब्द का एक अर्थ है खेत और दूसरा अर्थ है पिता. जबकि हिन्दी शब्दसागर के अनुसार इसी मूल से बने ‘वापक’ का अर्थ है बीज बोने वाला. यानी वापक का एक अर्थ जन्मदाता भी है. भूमि में बीज बोनेवाला कृषक हैं जो खेती का मालिक भी है और फ़सल का पिता भी. 

अब यहां से समझिए कि शब्द कैसे बनते हैं. जन्मदाता के तौर पर बीज बोने वाले का भाव बहुत महत्वपूर्ण है. वप्र, वापक या वप्ता का ‘व’ जब ‘ब’ बना तो वो वप्ता से बप्ता बना, फिर बप्पा बना और अंत में बाप हुआ. बाप से बना बापू और बाबू. अलग-अलग बोलियो में इसके बप्पा, बापू,  बाप, अप्पा, अब्बा, बाबा, बाबू, बाऊ, बाबुल, बब्बा आदि शब्द भी खूब प्रसिद्ध हुए हैं. ये शब्द उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक सभी भाषाओं में पाए जाते हैं. तो बाबा शब्द संस्कृत से हिन्दी में कैसे आया, इसकी यात्रा कुछ इस तरह से समझी जा सकती है.

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जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के अध्यापक शास्त्री कौशलेन्द्रदास के मुताबिक, लखनऊ के उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से प्रकाशित और मुहम्मद मुस्तफ़ा ख़ान 'मद्दाह' की संकलित 'उर्दू-हिन्दी शब्दकोश' में 'बाबा' अरबी भाषा का पुल्लिंग शब्द है, जिसके अर्थ हैं - पिता, बाप, दादा, नाना और सरदार.

यानी अगर आपका सवाल है कि बाबा शब्द हिन्दी का है कि संस्कृत का है या फिर आंचलिक है? तो जवाब है ये शब्द बहुभाषी है. डॉक्टर पंत बताते हैं, 

“अरबी, फ़ारसी, तुर्की और पश्चिम एशिया की अनेक भाषाओं में भी यह शब्द है. जिसका अर्थ है  पिता, बाप, दादा, नाना, सरदार. वहीं हिंदवी शब्दकोश के अनुसार पिता, पितामह, दादा, नाना, सरदार, बूढ़ा, बुज़ुर्ग, फ़कीर और बच्चे के सन्दर्भ में भी इस शब्द का इस्तेमाल होता था. ब्रिटिश राज के दौरान हिंदुस्तानी सेवक अपने 'साहब' के बच्चों को बाबा कहा करते थे."

इस मसले पर हमने वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन से भी बात की. उन्होंने बताया 

"बाबा शब्द भारत में किसी एक तारीख को नहीं आया है. यह बहुत धीरे-धीरे विकसित हुआ है, इसकी कई लेयर्स हैं. फिर भी जो भाषा का इतिहास है, उसके आधार पर अगर हम देखें तो जो वैदिक भाषा का काल है, वो 1500 BC से बहुत पहले का है. चारों वेदों में, उपनिषदों में और षड्दर्शन में, इनमें यह शब्द कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ है. इसके बाद जो संस्कृत का काल है, उसमें भी यह शब्द कभी उस तरीके से यूज नहीं हुआ. पिता और बुजुर्ग के लिए जो वहां शब्द मिलते हैं, वो पितृ, तात, जनक आदि मिलते हैं. यानी बाबा शब्द संस्कृत या वैदिक भाषा का नहीं है."

त्रिभुवन बताते हैं कि प्राकृत भाषा आई. फिर जो अपभ्रंश काल आया वो था 500 BC से 1000 BC या कुछ और आगे के साल, बाबा शब्द की जमीन तैयार होती है. वो कहते हैं कि लोक भाषाओं में जो शिशु ध्वनियां थीं, वो ख़ूब फैलने-फूलने लगी थीं. 

शिशु ध्वनियां माने नन्हे बच्चे जो आवाज़ें निकालते हैं. जैसे- बा-बा, पा-पा, मा-मा, भा-भा. इस शब्द का जो शुरूआती काल है, वो ईरानी ग्रंथ में हैं. उनमें हमें कहीं-कहीं इसका इस्तेमाल दिखाई देता है. छठी-सातवीं शताब्दी के जो ईरानी ग्रंथ हैं यानी जो पर्शियन ग्रंथ हैं, उसमें हमें इसका इस्तेमाल मिलता है. फिर ये बाबा के अर्थ में पिता, दादा, आदरणीय आदि के अर्थ में ये शब्द आता है.

हिंदुस्तान की बात करें तो जो सूफी भक्ति काल है, उस दौरान भी यह शब्द निर्णायक दौर में आता है. फारसी और सूफी परंपरा में 'बाबा' पहले से मौजूद था. यहां पिता के रूप में, दरवेश के रूप में, पीर के रूप में, भारत में सूफी दरवेशों और जो संतों के साथ जो बाबा शब्द को एक आध्यात्मिक गरिमा मिलती दिखाई देती है. 12वीं-13वीं शताब्दी के बाबा फरीद का नाम हम सुनते हैं. कबीर के लिए भी एक जगह बाबा शब्द का इस्तेमाल हुआ. ये शब्द घर के बुजुर्गों से निकलता हुआ जो आध्यात्मिक महापुरुष थे, उनके साथ जुड़ गया.

फिर मुगल काल और अंग्रेजों औपनिवेशिक दौर आता है. यहां हमें बाबा शब्द का इस्तेमाल तीन जगह मिलता है. पिता, दादा, संत, फकीर या आदरणीय साधारण बुजुर्ग आदि के रूप में. हमारे साहित्य में, हमारी लोक कथाओं में, कवित्त में इसके इस्तेमाल की पुनरावृत्ति दिखाई दे रही हैं. 

संस्कृत में जो है लोक प्रभाव के रूप में बंगाली में भी पिता और दादा के लिए बाबा शब्द का प्रचलन मिलता है. मराठी में पिता और घर के बुजुर्ग के लिए भी. गुजराती में भी यह शब्द चलन में है. वहां आदरणीय या पिता के लिए बाबा शब्द का प्रयोग मिलता है. वहीं सिंधी में बाबा पिता के लिए है और पीर के लिए भी इस्तेमाल होता है. कश्मीर में ये बुजुर्ग और पिता के लिए है. तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में भी बाबा शब्द पिता या पितातुल्य के भी प्रयोग में है. तो भारत की लगभग सभी भाषाओं में यह शब्द प्रयुक्त होता है. 

अब अगर हम दूसरी भाषाओं में देखें, तो सिर्फ अरेबिक या पर्शियन नहीं, तुर्की में भी यह शब्द इसी अर्थ में, सूफी संत के अर्थ में, पिता के अर्थ में प्रयोग होता है. ऊर्दू शायरी का संकलन करने वाली वेबसाइट Rekhta से जुड़े सुमन मिश्रा कहते हैं

बाबा शब्द फारसी का है. और बाबा शब्द का यूज हमें निदामुद्दीन औलिया की खानकाह में मिलता है. वे अपने मुरीदों को बाबा या लाला कहते थे. अमीर ख़ुसरो का भी एक गीत है,

“अम्मा मेरे बाबा को भेजो री कि सावन आया”

उज्बेकिस्तान में भी यह अर्थ इसी रूप में यूज हुआ है. रूसी भाषा में भी शब्द ‘बाबा’ मिलता है. हालांकि, वहां नाना के अर्थ में इस्तेमाल होता है. यानी बुजुर्ग के अर्थ में. सर्बियन में भी बुजुर्ग को कहते हैं. क्रोएशियन भाषा में भी बुजुर्ग को बाबा कहते हैं. बुल्गेरियन में भी बुजुर्ग को कहते हैं. हंगेरियन में जो ग्रामीण अंचल में बुजुर्ग को बाबा कहा जाता है.

ग्रीक भाषा में बूढ़े आदमी को बाबा कहते हैं. अल्बेनियन जो भाषा है उसमें पिता और बुजुर्ग को कहते हैं. अफ्रीका की भाषा है स्वाहिली. स्वाहिली भाषा के बहुत सारे शब्द हिंदी जैसे हैं. तो स्वाहिली में पिता को बाबा कहते हैं.

इंडोनेशियन में तो पिता के लिए ये बाबा इस्तेमाल होता है. मलय भाषा में पिता के लिए. यहूदी डायस्पोरा में भी पिता और बुजुर्ग के लिए, यिद्दिश में, हिब्रू में पिता को कहते हैं. रोमान में, जॉर्जिया, आर्मेनिया में, लातविया में, एस्तोनिया में… यानी दुनिया के बहुतेरे देशों की अलग-अलग भाषाओं में बाबा शब्द प्रयोग में मिलता है.

इतनी भाषा में चलन और दावों पर त्रिभुवन ने कहते हैं

“न कोई संस्कृत वाला इस पर दावा कर सकता, न हिंदी वाला कर सकता. न उर्दू वाला कर सकता, न अरबी वाला कर सकता. न पर्शियन कर सकता, न कोई और भाषा कर सकता. इसमें प्राकृत भी है, इसमें संस्कृत भी है, इसमें उर्दू भी है, इसमें अरेबिक भी है, पर्शियन भी है... तो मतलब सारी भाषाओं का में ये एक चलता हुआ शब्द है और बहुत ही जीवंत शब्द है.”

 

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