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38 करोड़ 'ब्लड मनी' देकर भारत लौटे अब्दुल रहीम, सऊदी अरब ने मौत की सजा क्यों दी थी?

हत्या के आरोप में कोझिकोड के रमन्नाट्टुकारा के कोडमपुझा निवासी अब्दुल रहीम को दो दशकों तक जेल में रहना पड़ा. रियाद से रवाना होने के बाद गुरुवार, 28 मई को ईद के दिन वो कोझिकोड के करिपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे और अपने घर के लिए रवाना हुए.

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अब्दुल रहीम 20 साल बाद सऊदी अरब से भारत लौटे. (फोटो- इंडिया टुडे)

केरल के एक शख्स अब्दुल रहीम को सऊदी अरब में मिली मौत की सजा से माफी मिल गई है, जिसके बाद ईद के रोज उसकी वतन वापसी हुई. इस भारतीय नागरिक को एक नाबालिग लकवाग्रस्त युवक की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था. सऊदी अरब की अदालतों ने उसके लिए मौत की सजा का फरमान जारी कर दिया था. लेकिन अब उन्हें जीवनदान दे दिया गया है. इसके बदले उसे ‘ब्लड मनी’ के तौर पर करोड़ों रुपये मृतक के परिवार को देने पड़े.

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सऊदी अरब स्थित इंडियन एंबेसी ने सोशल मीडिया पर अब्दुल रहीम की रिहाई पर खुशी जताई और सऊदी प्रशासन के लिए आभार व्यक्त किया. एंबेसी ने एक्स के जरिए सूचना दी कि अपने घर से दो दशकों तक दूर रहने के बाद अब्दुल रहीम भारत में अपने परिवार के पास लौट रहे हैं. भारत के लिए उनकी फ्लाइट कुछ ही देर पहले निकली है. रहीम को 20 साल जेल में बिताने के बाद माफ कर रिहा कर दिया गया है. उनकी रिहाई में भारतीय समुदाय के लोगों ने क्राउड फंडिंग के जरिए बहुत मदद की थी.

हत्या के आरोप में कोझिकोड के रमन्नाट्टुकारा के कोडमपुझा निवासी अब्दुल रहीम को दो दशकों तक जेल में रहना पड़ा. रियाद से रवाना होने के बाद गुरुवार, 28 मई को ईद के दिन वो कोझिकोड के करिपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे और अपने घर के लिए रवाना हुए.

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इंडियन एंबेसी का बयान.
रहीम को मौत की सजा क्यों मिली?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2006 में रहीम पहली बार बेहतर काम की तलाश में सऊदी अरब गए थे. वो पेशे से ड्राइवर हैं. सऊदी अरब में रहीम को एक 17 साल के नाबालिग पैरालाइज्ड युवक की देखभाल का काम मिला. युवक सांस लेने के लिए एक लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर था.

रिपोर्ट के मुताबिक, 24 दिसंबर, 2006 के दिन रहीम गाड़ी चला रहे थे. इसी दौरान अनजाने में उनका हाथ युवक के उस सपोर्ट सिस्टम पर लग गया, जिससे युवक सांस लेता था. इससे युवक गाड़ी में ही बेहोश हो गया और उसकी मौत हो गई. उसके परिवार की शिकायत के बाद रहीम की गिरफ्तारी हो गई. मामला कोर्ट में पहुंचा, जहां उन्हें मौत की सजा सुना दी गई.

सालों चली कार्रवाई की कड़ी मशक्कत के बाद मृतक का परिवार ‘ब्लड मनी’ के बदले रहीम के मौत की सजा को माफ करने पर राजी हुआ. ‘ब्लड मनी’ के तौर परिवार ने 15 मिलियन सऊदी रियाल (करीब 38 करोड़ रुपये) की मांग की. इतनी बड़ी रकम रहीम अकेले नहीं दे पाते. उनकी जान बचाने के लिए भारत समेत दुनियाभर के भारतीय नागरिकों, विशेष तौर पर केरल लोगों ने क्राउडफंडिंग कर इस रकम को अदा किया और रहीम की जान बचाई.

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अब्दुल रहीम अपने लोगों से मिलते हुए. (फोटो- इंडिया टुडे) 
ब्लड मनी क्या होता है?

सऊदी अरब के इस्लामी कानून में यह एक तरह का मुआवजा होता है, जिसे ‘दियाह’ कहा जाता है. इसे अनजाने में किए गए अपराधों के बदले पीड़ित परिवार को दिया जाता है. आज भी यह कानून सऊदी अरब समेत कई इस्लामिक देशों में लागू है. इन देशों में पाकिस्तान, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का नाम शामिल है. यहां इसे कानूनी कार्रवाई में भी शामिल किया जाता है.

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