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'किरिस का गाना'; अबकी बार इंडियन आर्मी के जवानों ने गाया है, देख कर आपका दिन बन जाएगा

Republic Day Parade की रिहर्सल के दौरान उस्ताद जी ने जवानों से मूड रिलैक्स करने के लिए गाना गाने को कहा. और हमारे जवानों ने इंटरनेट पर वायरल ऋतिक रोशन की मूवी का गाना गाया. ये वही 'दिल ना लिया' गाना है जो 'किरिस का गाना' नाम से इंटरनेट पर वायरल है.

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कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल करते सेना के जवान (PHOTO- India Today/PTI)

बीते दिनों इंटरनेट के एल्गोरिदम में एक वीडियो ने जगह बनाई. सबकी फीड पर ये वीडियो छा गया. ये वीडियो झारखंड के जमशेदपुर का था. वीडियो में दिखने वाले पिंटू प्रसाद ऋतिक रोशन की मूवी कृष (Kirrish ka Gaana) का गाना 'दिल ना दिया' गा रहे हैं. अब एल्गोरिदम है तो हमारी इंडियन आर्मी (Indian Army) के उस्ताद जी और जवान भी इससे अछूते नहीं है. लिहाजा कर्तव्य पथ (Kartavya Path) पर गणतंत्र दिवस परेड (Republic Day Parade Rehearsal) की रिहर्सल के दौरान जवानों ने 'दिल ना लिया, दिल ना दिया' (Dil Na Diya Song) गाना गाया. और अब इसका वीडियो हमारे-आपके इंस्टाग्राम से लेकर फेसबुक, हर फीड पर जगह बना चुका है. इसके अलावा असम रेजिमेंट के जवानों द्वारा गाया हुआ गाना ‘बदलूराम का बदन’ (Badluram Ka Badan) भी वायरल है. 

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ये वीडियो 20 जनवरी 2026 का है. सुबह के वक्त सेना के जवान परेड की रिहर्सल कर रहे थे. अब जवान रिहर्सल कर रहे थे तो उस्ताद जी ने सोचा कि सबको कुछ देर रिलैक्स करा दें. उस्ताद जी का सेना में एक अलग दर्जा होता है. चाहे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) हो या इंफेंट्री स्कूल. हर जगह अफसरों से लेकर जवानों को सिखाने का काम उस्ताद जी ही करते हैं. इनके बाजू पर Instructor लिखा होता है. उस्ताद जी कहा किसी पत्थर की लकीर से कम नहीं होता. लिहाजा परेड रिहर्सल के दौरान उस्ताद जी ने जवानों से मूड रिलैक्स करने के लिए गाना गाने को कहा. और हमारे जवानों ने इंटरनेट पर वायरल ऋतिक रोशन की मूवी का गाना गाया. 

इसके अलावा हमारे जवानों के एक और वीडियो ने इंटरनेट पर धूम मचा रखी है. इस गाने में थोड़ा इमोशन, थोड़ा ह्यूमर है. द्वितीय विश्वयुद्ध से आज तक इंडियन आर्मी की असम रेजिमेंट की शौर्य गाथा है. ये वीडियो असम रेजिमेंट के जवानों का है जो अपना रेजिमेंटल गीत ‘बदलूराम का बदन’ गा रहे हैं. यह गाना एक सच्ची घटना पर आधारित है और इसे ब्रिटिश इंडियन आर्मी की 1st बटालियन, असम रेजिमेंट के सिपाही राइफलमैन बदलूराम की याद में बनाया गया है. राइफलमैन बदलूराम दूसरे विश्व युद्ध में जापानी सेना से लड़ते हुए शहीद हो गए थे.

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बाद में जापानी सैनिकों ने कोहिमा को अपनी मिलिट्री घेराबंदी में ले लिया और ब्रिटिश इंडियन आर्मी की सप्लाई काट दी. जल्द ही ब्रिटिश सैनिकों को खाने की कमी का सामना करना पड़ा. टफ टेरेन की वजह से और जापानी एंटी-एयरक्राफ्ट गन की तैनाती के कारण एयरड्रॉप सप्लाई भी मुश्किल थी.

लेकिन बदलूराम की कंपनी के क्वार्टरमास्टर ने राशन लिस्ट से बदलूराम का नाम नहीं हटाया और महीनों तक बदलूराम के नाम पर जो एक्स्ट्रा राशन जमा हुआ, वह किसी वरदान से कम नहीं था. जिसने बाद में सैनिकों को घेराबंदी में जिंदा रहने में मदद की. और उनकी याद में, मेजर पी.टी. पोर्टर ने 1946 में एक गाना बनाया जो बाद में असम रेजिमेंट का रेजिमेंटल गाना बन गया और इसे शिलॉंग में पासिंग आउट परेड में रंगरूट गाते हैं. गणतंत्र जिवस परेड की रिहर्सल के दौरान भी असम रेजिमेंट के जवान कर्तव्य पथ पर ये गाना गा रहे थे. उनके इस गाने और जोश ने सबका मन मोह लिया.

वीडियो: आसान भाषा में: गणतंत्र दिवस पर परेड की परंपरा कहां से आई, झांकियों पर हंगामा क्यों?

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