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सिचाईं के समय पानी को तरस रहा पाकिस्तान, बांधों में डेड लेवल पर पहुंचा पानी

भारत की तरफ से पाकिस्तान की नदियों मे जाने वाला बहाव कम होने की वजह से वहां पानी की समस्या पैदा हो गई है. पड़ोसी देश को पानी कम मिल रहा है लेकिन डिमांड ज्यादा आ रही है. इसलिए उसे तय क्षमता से ज्यादा पानी छोड़ना पड़ रहा है. इससे वहां के बांधों में पानी का स्तर बेहद निचले स्तर पर पहुंच गया है.

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जैसे-जैसे भारत के बांधों में गंदगी साफ होगी पानी ज्यादा स्टोर होगा

भारत ने जब से सिंधु, झेलम और चेनाब में पानी का बहाव कम (Declining river flow from India) किया है, पाकिस्तान में पानी की समस्या (Pakistan water crisis) गहराती जा रही है. एक तरफ जहां उसे पानी कम मिल रहा है, वहीं उसे जरूरत से ज्यादा पानी छोड़ना पड़ रहा है. दरअसल पीने के पानी की डिमांड तो थी ही, लेकिन अब खरीफ की खेती का समय है, इसलिए अतिरिक्त डिमांड आ रही है. लिहाजा पाकिस्तान को ज्यादा पानी छोड़ना पड़ रहा है. आलम ये हो गया है कि उसके बांधों में पानी का स्तर घटकर ‘डेड लेवल’ यानी बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच चुका है.

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वैसे तो मानसून से पहले बांधों में पानी सूखना सामान्य है. लेकिन आने वाले दिनों में पड़ोसी देश में स्थिति और खराब हो सकती है. दरअसल भारत, जम्मू और कश्मीर में अपने बांधों में पानी स्टोरिंग कैपेसिटी बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहा है. बाधों में जमा गंदगी की सफाई पर लगातार काम हो रहा है. जैसे-जैसे गंदगी साफ होगी, पानी ज्यादा स्टोर होगा और पाकिस्तान की नदियों में भारत की तरफ से जाने वाला पानी और कम होता जाएगा.

पाकिस्तान की इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी हर दिन आंकड़े जारी कर बताती है कि उसे कितना पानी मिला और उसने कितना पानी छोड़ा. 11 जून के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान की सारी नदियों में कुल 2,41,611 क्यूसेक पानी आया. जबकि, 2,52,791 क्यूसेक पानी रिलीज किया गया. यानी 11,180 क्यूसेक ज्यादा पानी छोड़ना पड़ा.

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नदियों में कम पानी आने से खासतौर पर पाकिस्तान के पंजाब और सिंध इलाके में ज्यादा दिक्कत होगी. ये इलाके पानी के लिए इंडस सिस्टम पर ही निर्भर हैं.  11 जून को ही पंजाब प्रांत को 1,14,600 क्यूसेक पानी मिला. जबकि, पिछले साल इसी तारीख में उसे 1,43,600 क्यूसेक पानी मिला था. यानी पूरे 20 फीसदी की गिरावट. ये स्थिति पाकिस्तान के लिए और ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि ये समय खरीफ की खेती का है. अगर पर्याप्त पानी नहीं मिला तो समस्या पानी से बढ़कर खाने पर भी आ सकती है.

आपको बता दें कि भारत सरकार ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में इंडस वाटर ट्रीटी को अस्थायी रूप से रोक दिया था. इस ट्रीटी के तहत इंडस रिवर बेसिन के पास बने हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में पानी के स्टोरेज पर रोक थी. लेकिन अब जब भारत ने इस ट्रीटी पर रोक लगा दी है, तो नए हाइड्रो प्रोजेक्ट्स में ज्यादा पानी स्टोरेज की इजाजत दी जा सकती है.

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी बीते 10 जून को इस संबंध में बयान दिया था. कहा था कि जम्मू और कश्मीर में जो हाइड्रो प्रोजेक्ट्स अभी शुरू नहीं हुए हैं, जिन पर अभी प्लानिंग चल रही है. उनमें हम पानी भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं. हालांकि जिन प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है उनमें स्टोरेज क्षमता नहीं बढ़ाई जाएगी.

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