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भीड़ के दबाव में चलाया बुलडोजर, कोई नोटिस नहीं... इंडिया-पाक मैच वाले मामले में अब ये सब पता चला है

Bulldozer Action: बुलडोजर आरोपी लड़के के पिता के भाई की दुकान पर भी चला था. भाई का कहना है उनकी अपनी छोटे भाई से बनती नहीं है. लेकिन उनकी दुकान पर भी बुलडो़जर चल गया.

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आरोपी लड़के के माता-पिता को अरेस्ट किया गया था. (फोटो: सोशल मीडिया)

बीते रविवार को हुए इंडिया-पाकिस्तान मैच के दौरान एक नाबालिग पर भारत विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा. इसके बाद उस लड़के के पिता की एक दुकान पर बुलडोजर (India Pakistan Bulldozer Action) चला दिया गया. दुकान में  कबाड़ का काम होता था. अब  ये पता चला कि एक और दुकान पर बुलडोजर चलाया गया था. ये दुकान लड़के के पिता के भाई की थी. जानकारी ये भी आई है कि इन दुकानों पर बुलडोजर चलाने से पहले नगरपालिका की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया था.

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पूरा मामला महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के मालवण क्षेत्र का है. मालवण नगरपालिका के मुख्य अधिकारी संतोष जिरागे ने इस संबंध में अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात की है. उन्होंने बताया कि बुलडोजर एक्शन इसलिए हुआ क्योंकि जिस जमीन पर दुकानें बनी थीं, उसके मालिक ने शिकायत की थी और घटनास्थल पर 200 से 300 लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी. जिरागे ने कहा,

"शिकायतकर्ता ने कहा कि ये दुकानें उसकी जमीन पर बनी हैं. इसलिए, हमने तुरंत एक्शन लिया. हमें एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना के विधायक नीलेश राणे और पुलिस की तरफ से एक लेटर भी मिला था. वहां पर 200 से 300 लोग इकट्ठा हो गए थे, जिसके बाद हमें कार्रवाई करनी ही पड़ी."

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जिरागे से जब यह पूछा गया कि क्या कार्रवाई से पहले नोटिस दिया गया था, तो उन्होंने कहा कि शिकायत क्योंकि जमीन के मालिक की तरफ से थी इसलिए कोई नोटिस नहीं भेजा गया. जिरागे ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में यह जिक्र नहीं किया था कि आखिर ये दुकानें कब बनाई गई थीं.

इधर, लड़के के पिता के भाई ने भी बुलडोजर एक्शन को लेकर असहमति जताई. एक्सप्रेस को बताया,

"मेरी अपने छोटे भाई से नहीं बनती. सिर्फ इस बात पर कि मैं उसका भाई हूं, मेरी भी दुकान पर बुलडोजर चला दिया गया. जबकि दोनों ही दुकानों के मालिक अलग-अलग हैं. मेरा 4 से 5 लाख रुपये का नुकसान हो गया है. मेरा परिवार परेशान है. यह सब तब हुआ है, जब मेरी बेटी की दसवीं की परीक्षाएं हैं. हमारी क्या गलती थी?"

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उन्होंने आगे बताया,

"मेरी दुकान जिस जमीन पर थी, उसका मालिक राजन अजगांवकर है. वहीं, मेरे छोटे भाई की दुकान जिस जमीन पर है उसका मालिक सुहास अजगांवकर है. मैं इस दुकान के लिए हर महीने 3 हजार रुपये किराया दे रहा था, 10 हजार रुपये सिक्योरिटी के तौर पर जमा किए थे. लेकिन इस संबंध में कोई कागजी समझौता नहीं हुआ था."

भारत-पाकिस्तान का चैंपियंस ट्रॉफी ग्रुप स्टेज मैच 23 फरवरी को हुआ था. इस दौरान सचिन वराडकर नाम के एक स्वघोषित VHP कार्यकर्ता ने दावा किया कि उसने आरोपी लड़के को भारत-विरोधी नारे लगाते सुना. पुलिस ने FIR दर्ज की. लड़के को हिरासत में लिया. उसके माता-पिता कटबुल्ला खान और आयशा खान को गिरफ्तार किया. फिर 24 फरवरी के दिन बुलडोजर कार्रवाई हुई.

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इस पूरे मामले को लेकर नीलेश राणे ने एक X पोस्ट में लिखा,

"हम ये सुनिश्चित करेंगे कि उसे जिले से ही बाहर कर दिया जाए. फिलहाल हमने उसका कारोबार नष्ट कर दिया है."

नीलेश राणे ने बुलडोजर एक्शन की कई तस्वीरें भी पोस्ट की थीं. साथ ही साथ मालवण नगरपालिका को 'तत्काल कार्रवाई' के लिए धन्यवाद भी दिया था.

वीडियो: UP की 180 साल पुरानी नूरी मस्जिद पर चला बुलडोजर चलने के पीछे की कहानी क्या है?

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