देश भर से हर साल बसों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आती है. इन हादसों में सैकड़ों निर्दोष लोग अपनी जान गवां देते हैं. लेकिन जब जिम्मेदारी लेने की बारी आती है, तो प्रशासन और प्रबंधन दोनों अपने हाथ खड़े कर लेते हैं. राजधानी दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल, जयपुर और चंडीगढ़ तक कई स्लीपर कोच बसें धड़ल्ले से नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए चल रही हैं. इंडिया टुडे ने ग्राउंड पर जाकर कुछ ऐसी ही बसों की पड़ताल की है, जिनमें कई बड़े खुलासे हुए हैं.
इमरजेंसी गेट नहीं और खिड़कियां सीलबंद... जानिए किस तरह स्लीपर बसें उड़ा रहीं नियम-कानूनों की धज्जियां
राजधानी दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल, जयपुर और चंडीगढ़ तक कई स्लीपर बसें धड़ल्ले से नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए चल रही हैं. इंडिया टुडे ने ग्राउंड पर जाकर कुछ ऐसी ही बसों की पड़ताल की है, जिनमें कई बड़े खुलासे हुए हैं.


केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बसों के लिए हाल ही में कुछ नियम लागू किए हैं. इन नियमों के मुताबिक, स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, हथौड़े के साथ इमरजेंसी गेट और इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था होनी जरूरी है. गडकरी ने कहा कि स्लीपर बसों के लिए मौजूदा नियमों का पालन करना अनिवार्य है.
इंडिया टुडे से जुड़े समर्थ श्रीवास्तव, शरत कुमार, रविश पाल सिंह और हिमांशु मिश्रा ने पांच खास शहरों में स्लीपर बसों की स्थिति का जायजा लिया ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये बसें सुरक्षा के इन पैमानों पर कितना खरी उतरती हैं.
दिल्ली से बलिया जाने वाली करीब 1,000 किलोमीटर की यात्रा करने वाली स्लीपर बस में भारी मात्रा में सामान लदा मिला. बस की छत पर भी अवैध रूप से माल रखा गया था. आपातकालीन निकास दरवाजे पूरी तरह ढके हुए थे और एक निकास के सामने सीट लगा दी गई थी.

छह फुट ऊंचे दरवाजे से उतरने के लिए सीढ़ी नहीं थी. यात्रियों के लिए न हथौड़ा था, न फायर सेफ्टी की पर्याप्त व्यवस्था. वायरिंग भी खराब हालत में मिली. वहीं दिल्ली-जोधपुर रूट की एक बस नियमों के मुताबिक पाई गई, जिससे यह साफ हो गया कि लापरवाही जानबूझकर की जा रही है.
मोहाली और चंडीगढ़यहां जांच में बसों में आपातकालीन निकास तो मिले, लेकिन वे नए नियमों के अनुसार नहीं थे. कई बसों में एग्जिट गेट बाद में जोड़े गए थे. कुछ बसों में निकास के सामने सीटें लगा दी गई थीं. यात्रियों ने बताया कि उन्हें केवल यह बताया गया कि इमरजेंसी गेट कहां है, लेकिन किसी तरह के सुरक्षा निर्देश नहीं दिए गए.

रात की एसी स्लीपर बस में गलियारा इतना संकरा था कि एक बार में सिर्फ एक व्यक्ति ही निकल सकता था. आग लगने की स्थिति में तुरंत बाहर निकलना लगभग नामुमकिन था. बस में लकड़ी, फोम, कपड़ा और प्लास्टिक जैसी ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किया गया था. पूरी बस में सिर्फ एक अग्निशामक यंत्र था. पीछे का इमरजेंसी गेट भी जंग लगा मिला.

राजस्थान में हाल ही में हुई बस अग्निकांड की घटनाओं के बाद जयपुर में स्थिति कुछ बेहतर हुई है. ज्यादातर बसों में अब इमरजेंसी गेट और अग्निशामक यंत्र लगाए गए हैं. हालांकि उत्तर प्रदेश से आने वाली कुछ बसों में अभी भी आपातकालीन दरवाजों के सामने स्लीपर सीटें लगी मिलीं.

कुछ बसों में सभी सुरक्षा सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन यात्रियों को उनकी जानकारी नहीं दी गई. वहीं दूसरी बसों में टूटे शीशे, बंद इमरजेंसी गेट, हथौड़े और अग्निशामक यंत्रों की पूरी तरह कमी पाई गई. यात्री डर के माहौल में यात्रा करने को मजबूर दिखे.
वीडियो: बस कंडक्टर की पिटाई से Karnataka-Maharashtra में क्यों मचा बवाल? दोनों राज्यों के बीच बसें बंद












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