राजधानी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पानी में डूबकर मौत हो गई. मृतक की पहचान युवराज मेहता (27) के तौर पर हुई है. पुलिस ने बताया कि घने कोहरे की वजह से युवराज की कार अनियंत्रित होकर एक खाली प्लॉट में गिर गई, जिसमें गहरा पानी भरा हुआ था. स्थानीय लोगों का आरोप है कि युवराज कई घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड कर्मियों ने ठंडे पानी में उतरने से परहेज किया. करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद युवराज को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
'वो इशारा करता रहा, पानी में नहीं उतरी रेस्क्यू टीम', नोएडा में पिता के सामने डूबकर जवान बेटे की मौत
Noida: स्थानीय लोगों का आरोप है कि युवराज कई घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड कर्मियों ने ठंडे पानी में उतरने से परहेज किया. करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद युवराज को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, युवराज मेहता नोएडा के सेक्टर-150 में रहते थे और गुरुग्राम के सेक्टर-54 में डनहमबी इंडिया कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे. पुलिस ने बताया कि शुक्रवार, 16 जनवरी की देर रात वे ऑफिस से काम निपटाकर अपनी ग्रैंड विटारा कार से घर लौट रहे थे. घर से करीब 500 मीटर पहले ही उनकी कार घने कोहरे की वजह से एक प्लॉट में गिर पड़ी.
पुलिस ने बताया कि पानी का स्तर ज्यादा होने की वजह से कार पलट गई और तैरने लगी. युवराज किसी तरह कार से बाहर निकलने में कामयाब रहे और उन्होंने फोन पर अपने पिता राजकुमार मेहता को हादसे के बारे में बताया. उनके पिता ने तुरंत 112 पर सूचना दी और वे मौके पर पहुंचे. कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें छोटी-बड़ी क्रेनों के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं और युवराज को बचाने की कोशिश की.
रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान युवराज बीच-बीच में कार की छत पर खड़ा होते, अपनी टॉर्च जलाकर यह बताने की कोशिश करते कि वे जिंदा हैं और मदद की गुहार लगाते. आरोप है कि ज्यादा ठंड और प्लॉट में अधबने खंभों से टकराने के खतरे को देखते हुए पुलिस और फायर ब्रिगेड कर्मियों ने पानी में उतरने से परहेज किया.
इस पूरी घटना के दौरान युवराज के पिता ने पुलिस से बार-बार अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाई. रात करीब 1:45 बजे युवराज कार समेत पूरी तरह पानी में डूब गए. SDRF की टीम बाद में मौके पर पहुंची, लेकिन जरूरी उपकरणों की कमी के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका.
इसके बाद गाजियाबाद से NDRF टीम को बुलाया गया. लगभग डेढ़ घंटे बाद टीम मौके पर पहुंची और टीम ने लगभग ढाई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. स्टीमर और टॉर्च की मदद से उन्होंने युवराज को पानी से बाहर निकाला और बेहोशी की हालत में नॉलेज पार्क में बने कैलाश अस्पताल ले गए. लेकिन यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
घटनास्थल पर मौजूद युवराज के पिता और प्रत्यक्षदर्शियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में पिता राजकुमार मेहता ने आरोप लगाया कि नाले के पास कोई बैरिकेडिंग या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए थे. उन्होंने कहा कि सेक्टर-150 में रहने वाले लोगों ने प्लॉट के चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और साइनबोर्ड लगाने की बार-बार मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने कहा,
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के SHO सर्वेश सिंह ने कहा,
शुरुआती जांच से पता चलता है कि हादसा तेज स्पीड और कोहरे की वजह से हुआ. मृतक के पिता ने शिकायत दर्ज कराई है. मामले की जांच की जा रही है.
युवराज के पिता राजकुमार मेहता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के रिटायर्ड डायरेक्टर हैं. उनकी पत्नी का कुछ साल पहले बीमारी के कारण निधन हो गया था, जबकि उनकी बड़ी बेटी ब्रिटेन में रहती हैं.
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