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ट्रेनिंग में विकलांग हुए अफसरों को लेकर हुआ बड़ा फैसला, अब फ्री में मिलेगी ये मेडिकल सुविधा

सरकार का कहना है कि ये कदम परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक और भावनात्मक तनाव को कम करने के लिए ‘मानवीय आधार’ पर उठाया गया है. हालांकि, रक्षा मंत्री की मंजूरी के बावजूद प्रस्ताव को 17 महीने तक लागू होने का इंतजार करना पड़ेगा.

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रक्षा मंत्रालय ने मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान विकलांग हुए अफसरों को फ्री मेडिकल सुविधा देने की मंजूरी दे दी है. (प्रतीकात्मक फोटो- इंडिया टुडे)

मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान विकलांग हुए अफसरों को ट्रेनिंग छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है. अब तक ऐसे अफसरों को ‘एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम’ (ECHS) के तहत मुफ्त मेडिकल सुविधाएं नहीं मिलती थीं. लेकिन अब रक्षा मंत्रालय ने ऐसे अफसरों को भी ECHS के अंतर्गत लाने का फैसला किया है.

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देश सेवा का सपना लेकर लोग राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) और अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (OTA) जैसी अकादमियों में जाते हैं. लेकिन ऐसे कैडेट्स कभी-कभी ट्रेनिंग के दौरान विकलांगता का शिकार हो जाते हैं. अब तक वो ECHS से जुड़े फायदों के हकदार नहीं थे, क्योंकि उन्हें पूर्व सैनिक (ESM) का दर्जा नहीं दिया जाता था.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, अब तक इन कैडेट्स को सिर्फ एक एक्स क्रेशिया अमाउंट मिलता था. ये अमाउंट 40 हजार रुपये/महीने तक था. एक्सक्रेशिया पेमेंट का मतलब गुडविल में दी गई रकम होती है, जिसके बदले कुछ काम ना लिया गया हो. मगर मेडिकल बिल्स हर महीने कभी 50 हजार, तो कभी 1 लाख तक पहुंच जाते थे. अब ECHS के तहत, ऐसे सभी कैडेट सैन्य सुविधाओं, ECHS पॉलीक्लिनिक्स और लिस्टेड अस्पतालों में मुफ्त इलाज का लाभ उठा सकेंगे.

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नए फैसले में उन कैडेट्स को शामिल किया जाएगा. जिन्हें ट्रेनिंग पूरा करने से पहले ही मेडिकल बोर्ड से बाहर कर दिया गया है. साथ ही, उन कैडेटों को भी, जिन्हें भविष्य में ऐसी ही परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार का कहना है कि ये कदम परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक और भावनात्मक तनाव को कम करने के लिए ‘मानवीय आधार’ पर उठाया गया है.

अभी इंतजार करना होगा

हालांकि, रक्षा मंत्री की मंजूरी के बावजूद प्रस्ताव को 17 महीने बाद भी लागू होने का इंतजार करना पड़ेगा. रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहा है, क्योंकि इसके लिए वित्त मंत्रालय से हर साल लगभग 11.13 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा चाहिए होगा.

इससे पहले, 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और सशस्त्र बलों से जवाब मांगा था. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ीं अमृता नायक दत्ता की खबर के मुताबिक, 1985 से अब तक लगभग 500 कैडेट्स को ट्रेनिंग के दौरान हुई विकलांगता के कारण मेडिकल कारणों से छुट्टी दे दी गई. अकेले NDA में बीते 5 सालों में (2021 से जुलाई 2025 के बीच) लगभग 20 ऐसे कैडेट्स को छुट्टी दी गई.

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बताते चलें ECHS स्कीम 2003 में शुरू की गई थी. इसके तहत 30 क्षेत्रीय केंद्र, 448 पॉलीक्लिनिक्स और 3,000 से ज्यादा लिस्टेड अस्पताल खोले गए. इसके जरिए देश भर में 63 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवा मिलती है.

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