दिल्ली में आयोजित ‘दुनिया के सबसे बड़े’ AI समिट में कथित तौर पर चीनी रोबोडॉग को अपना बताकर पेश करने को लेकर फजीहत का सामना कर रही गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने माफी मांग ली है. यूनिवर्सिटी ने पिछले दो दिन में तीसरी बार सफाई देते हुए कहा कि प्रोफेसर ने कैमरे पर आने के जोश में बड़ी गलती कर दी. ग्रेटर नोएडा स्थित यूनवर्सिटी की तरफ से बताया गया कि यूनिवर्सिटी के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की प्रमुख नेहा सिंह के पास गलत जानकारी थी और उनको प्रेस से बात करने का अधिकार नहीं था. उन्होंने कैमरे पर आने के उत्साह में तथ्यामक रूप से गलत जानकारी दे दी.
'कैमरे पर आने के जोश में गलती', फजीहत के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी की सफाई
Galgotias university ने AI समिट में चीनी रोबोडॉग को अपना बताने के मामले में एक बार फिर से सफाई दी है. यूनिवर्सिटी ने अपने प्रोफेसर द्वारा दी गई गलत जानकारी के लिए माफी मांगी है और विवाद के बाद कार्यक्रम स्थल को खाली कर दिया है.


गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 18 फरवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया,
हम गलगोटिया यूनिवर्सिटी हाल ही में आयोजित AI समिट में हुई कंफ्यूजन के लिए तहे दिल से माफी मांगते हैं. पवेलियन में मौजूद हमारी एक प्रतिनिधि को प्रोडक्ट की तकनीकी जानकारी नहीं थी और कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने गलत जानकारी दे दी. जबकि उन्हें प्रेस से बात करने का अधिकार नहीं था.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को तुरंत AI समिट से बाहर निकलने के लिए कहा गया था. हालांकि संस्थान ने इस बात से इनकार किया कि उन्हें सरकार से ऐसा कोई आदेश मिला था. अपने ताजा प्रेस विज्ञप्ति में गलगोटिया ने बताया,
आयोजकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने परिसर खाली कर दिया है.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन की प्रोफेसर नेहा सिंह ने एक टीवी चैनल पर ओरियन नाम के 'रोबोटिक डॉग' को दिखाते हुए दावा किया कि इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस द्वारा विकसित किया गया है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद कई यूजर्स ने ने बताया कि 'यूनिट्री गो2' नाम का यह रोबोट चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा विकसित किया गया है.
इसको लेकर यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक निष्ठा और ट्रांसपैरेंसी को लेकर भी सवाल उठाए गए. ऑनलाइन आलोचना के जवाब में गलगोटिया की ओर से सफाई आई कि उन्होंने इस रोबोडॉग को यूनिट्री से खरीदा था और इसे एक टीचिंग टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे. यूनिवर्सिटी ने बताया कि उन्होंने कभी भी ये दावा नहीं किया कि ये रोबडॉग उनके द्वारा बनाया गया है.
वीडियो: गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने रोबोटिक डॉग पर क्या सफाई दी?















.webp?width=120)





