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ममता बनर्जी के हाथ में ग्रीन फाइल ने बवाल मचा दिया, ED या I-PAC किसका पलड़ा भारी?

पश्चिम बंगाल में ED ने I-PAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर रेड मारी. इसके बाद से ही ममता बनर्जी एक्शन में हैं. उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट में ED के खिलाफ याचिका दायर की है और रेड को अवैध बताया है.

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ममता बनर्जी ने ED के अधिकारियों पर केस कर दिया. (फोटो-इंडिया टुडे)
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संजय शर्मा

8 तारीख की सुबह ED की रेड के बाद I-PAC और ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में कोलकाता और बिधान नगर में छापेमारी की थी. रेड I-PAC के कुछ दफ्तरों और I-PAC के चीफ प्रतीक जैन के आवास पर मारी गई. I-PAC एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो TMC का काम भी देखती है. रेड चल ही रही थी कि खुद ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं. पहले वो प्रतीक जैन के घर गईं, जब बाहर निकलीं तो उनके हाथों में हरे रंग की फाइल थी. इसी हरे रंग की फ़ाइल पर बवाल मचा हुआ है. ममता बनर्जी ने बीजेपी पर चोरी के आरोप लगाए. गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा.  

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इसके बाद ममता I-PAC के दफ्तर पहुंची. ममता के पहुंचने के बाद CMO के कुछ अधिकारी भी आ गए. उन्होंने दफ्तर से कुछ फाइलें उठाईं और अपने साथ ले गए. उन फाइलों में क्या था, ये किसी को नहीं मालूम. ये सब होता रहा और, छापेमारी चलती रही.

ममता बनर्जी फंस सकती हैं?

इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया. I-PAC और ममता बनर्जी ने कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. ED की छापेमारी को अवैध बताया. ममता बनर्जी ने अफसरों के खिलाफ केस भी दर्ज करा दिया. लेकिन इंडिया टुडे  की रिपोर्ट के मुताबिक, ED के पास एक ऐसा दांव है जो मुख्यमंत्री को फंसा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, ED का पलड़ा अभी भी भारी है. क्योंकि ED के पास PMLA की धारा 67 है. 

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The Prevention of Money Laundering Act, 2002. इस अधिनियम के तहत की गई किसी भी कार्यवाही या दिए गए किसी भी आदेश को रद्द करने या बदलने के लिए किसी भी सिविल कोर्ट में मुकदमा नहीं किया जा सकता है. अगर सरकार या उसके अधिकारी इस कानून के अनुसार ईमानदारी से काम करते हैं, तो उनके खिलाफ अदालत में कोई केस नहीं चलेगा. यानी ममता बनर्जी को कोर्ट में ये साबित करना होगा अधिकारियों ने ये रेड अपने निजी फायदे के लिए की थी. तब तक इसे आपराध की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा. 

ED क्या कर सकता है?

रिपोर्ट के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रणव सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री को  संसद के बाहर कोई स्पेशल संवैधानिक इम्युनिटी नहीं मिली है. संविधान सरकार के मुखिया या मंत्रियों को सदन में ज़रूर विशेषाधिकार देता है लेकिन बाहर नहीं. अगर ED ने ये साबित कर दिया कि जो फाइल ममता बनर्जी छापेमारी के बीच लेकर गई हैं, वो जांच में कितनी अहम थी तो ED चुटकियों में CM ममता को गिरफ्तार कर सकती है.  

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: बंगाल चुनाव के पहले ईडी बनाम ममता बनर्जी!

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