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राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन बता केंद्र ने ममता सरकार से रिपोर्ट मांगी

President Draupadi Murmu सिलीगुड़ी में एक कॉन्फ्रेंस में आई थीं. इसे लेकर उन्हें Mamata Banerjee से कुछ शिकायतें थीं. उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी जगह जाती हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए.

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राष्ट्रपति विवाद के बाद केंद्र सरकार ने ममता बनर्जी से रिपोर्ट मांगी है. (PHOTO-X)
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जितेंद्र बहादुर सिंह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. लेकिन चुनाव से पहले वहां की राजनीति में उठा-पटक शुरू हो गई है. इस बार राजनीति के केंद्र में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हैं. सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना एजेंडा चलाने के लिए भेजा है. वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 8 मार्च की शाम 5 बजे तक राष्ट्रपति के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है.

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ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रेसिडेंट सेक्रेटेरिएट से मंजूर हुए लाइनअप के हिसाब से उन्हें और उनके मंत्रियों को कभी भी मौजूद नहीं होना था. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति का इवेंट एक प्राइवेट संस्थान ने आयोजित किया था. सीएम ममता के मुताबिक डॉक्यूमेंट्स में यह भी नहीं बताया गया है कि बिधाननगर शुरुआती जगह थी.

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद 7 मार्च को शुरू हुआ. राष्ट्रपति मुर्मू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक कॉन्फ्रेंस में आई थीं. इसे लेकर उन्हें ममता बनर्जी से कुछ शिकायतें थीं. उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी जगह जाती हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि ममता दीदी उनसे नाराज हैं, इसलिए उन्होंने ऐसा किया. राष्ट्रपति के इस बयान पर ममता बनर्जी ने भी पलटवार किया है. उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू को ‘BJP का एजेंट’ बता डाला. इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ममता बनर्जी को घेरा और इसे आदिवासी समुदाय की अस्मिता से जोड़ दिया.

इस कॉन्फ्रेंस की जगह को लेकर राष्ट्रपति संतुष्ट नहीं थीं. दरअसल, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में नौवीं अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसमें शामिल होने आई थीं. कॉन्फ्रेंस का वेन्यू राष्ट्रपति को पसंद नहीं आया. इसे लेकर उन्होंने उन्होंने शिकायत की कि वेन्यू बहुत छोटा था और वहां 5 हजार लोग भी शामिल नहीं हो सकते थे. इस वजह से बहुत सारे संथाल लोग कॉन्फ्रेंस में नहीं आ पाए. इस कॉन्फ्रेंस के बाद राष्ट्रपति विधाननगर में एक दूसरे प्रोग्राम में पहुंचीं. वहां उन्हें जगह ज्यादा बड़ी लगी. इसके बाद उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था,

जब मैं यहां आई तो मुझे एहसास हुआ कि अगर यह सम्मेलन यहीं आयोजित होता तो बेहतर होता. क्योंकि यह इलाका बहुत विशाल है. मुझे नहीं पता प्रशासन के मन में क्या चल रहा था. यहां आसानी से 5 लाख लोग इकट्ठा हो सकते थे लेकिन मुझे नहीं पता कि वे हमें वहां क्यों ले गए? सम्मेलन के लिए ऐसी जगह चुनी जहां संथाल लोग नहीं जा सकते. मुझे बहुत दुख है कि यहां के लोग सम्मेलन में नहीं पहुंच पाए क्योंकि यह इतनी दूर आयोजित किया गया था.

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राष्ट्रपति की नाराजगी इस बात पर भी थी कि प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया गया. उनका स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के किसी मंत्री को होना चाहिए था. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस पर ऐतराज नहीं है लेकिन देश के राष्ट्रपति पद के लिए जो प्रोटोकॉल है, उसका पालन किया जाना चाहिए.

इंडिया टुडे से जुड़े जितेंद्र बहादुर सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल की घटना को प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताकर केंद्र सरकार ने सीएम ममता की सरकार से 8 मार्च की शाम 5 बजे तक बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आरोप पर सीएम ममता बनर्जी ने भी पलटवार किया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा,

इंटरनेशनल संथाल काउंसिल, जो एक प्राइवेट ऑर्गनाइजेशन है, उसने माननीया राष्ट्रपति को सिलीगुड़ी में 9वें इंटरनेशनल आदिवासी संथाल कॉन्फ्रेंस में इनवाइट किया. एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन के बाद जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति सचिवालय को लिखकर बताया कि ऑर्गेनाइजर की तैयारी ठीक नहीं लग रही थी. यह बात टेलीफोन पर भी बताई गई. राष्ट्रपति सचिवालय की एडवांस टीम 5 मार्च को आई थी, और उन्हें इंतजामों की कमी के बारे में बताया गया था, फिर भी प्रोग्राम तय समय पर जारी रहा.

राष्ट्रपति को रिसीव न करने के मुद्दे पर भी सीएम ममता ने प्रतिक्रिया दी. सीएम ममता ने कहा,

अगर आप साल में एक बार आती हैं, तो मैं आपका स्वागत कर सकती हूं लेकिन, अगर आप चुनाव के समय बार-बार आती हैं, तो मेरे लिए हर चीज में शामिल होना कैसे मुमकिन होगा? क्या हमें हर समय आपके पीछे-पीछे चलते रहना चाहिए? क्या हमें पतंग उड़ाने वाले की तरह पतंग लेकर घूमना चाहिए? पतंगें साल में एक बार विश्वकर्मा पूजा के दौरान उड़ाई जाती हैं.

बनर्जी ने आरोप लगाया कि BJP की सलाह पर प्रेसिडेंट का इस्तेमाल करके पॉलिटिक्स खेली जा रही है. उन्होंने कहा कि मुझे यह कहते हुए भी शर्म आ रही है. उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं. लेकिन, उन्हें भी पॉलिटिक्स बेचने के लिए भेजा गया है. सीएम ने राष्ट्रपति से माफी मांगते हुए कहा कि मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूं, लेकिन आप BJP की पॉलिसी और BJP के निर्देशों से गाइड हो रही हैं. फिलहाल, बंगाल सरकार को अपनी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को देनी है.

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