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दिल्ली पुलिस को 'अपनों' ने ही लूटा, कॉन्सटेबल ने मालखाने से करोड़ों के वारे न्यारे कर दिए

आरोपी कॉन्सटेबल कभी उसी मालखाने की देखरेख करता था. उसके पास से चोरी का सोना और 50 लाख कैश बरामद किया गया है. फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है.

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पूछताछ में आरोपी कॉन्सटेबल ने कबूला अपना गुनाह.
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अरविंद ओझा

एक कहावत है ‘चिराग तले अंधेरा.’ दिल्ली पुलिस के साथ कुछ ऐसे ही हुआ है. चोरों को ढूंढ़ने वाली पुलिस खुद ही चोरों का शिकार बन गई है. दिल्ली पुलिस के अपने मालखाने (Delhi Police Malkhana Theft) में ही करोड़ों की चोरी हो गई. चोरी करने वाला कोई और नहीं बल्कि उनका खुद का ही कॉन्सटेबल है. पूछताछ में आरोपी कॉन्सटेबल ने अपना गुनाह कबूल किया है.

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आजतक के इनपुट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की एंटी टेरर यूनिट स्पेशल सेल का दफ्तर नई दिल्ली के लोधी रोड पर है. यहां मौजूद मालखाने से करोड़ों का कैश और सोना चोरी हो गया. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया और जांच शुरू हुई. जांच के दौरान पुलिस को एक हेड कॉन्स्टेबल पर शक हुआ. हेड कॉन्सटेबल का नाम खुर्शीद है. बिल्ली को ही दूध की रखवाली का काम सौंपने वाले कहावत की तरह, कभी आरोपी हेड कॉन्सटेबल भी इस मालखाने की देखरेख करता था.

इनपुट के मुताबिक, लेकिन इस बीच खुर्शीद का ट्रांसफर ईस्ट दिल्ली में कर दिया गया. लेकिन उसने स्पेशल सेल के दफ्तर आना नहीं छोड़ा.  खासतौर पर वो मालखाने का चक्कर लगाता रहता था. जांच के दौरान सेल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से जब पूछताछ की गई तो उन्होंने ने खुर्शीद के अक्सर स्पेशल सेल दफ्तर आने की पुष्टि की. इसी बीच उसने मालखाने से करोड़ों का सोना और कैश गायब कर दिया.

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खुर्शीद से पूछताछ की गई तो उसने कबूला कि मालखाने से सोना और कैश चोरी किया था. उसके पास से चोरी का सोना और 50 लाख कैश बरामद किया गया है. फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है.

क्या होता है मालखाना

मालखाना शब्द अरबी और फ़ारसी भाषा से आता है. इसका मतलब है वह जगह जहां सामान रखा जाता है. इसे स्टोर रूम या भंडार गृह भी कहा जाता है. पुलिस किसी केस में किसी आरोपी के पास से जो कुछ भी बरामद करती है, उसे केस प्रॉपर्टी मानते हुए मालखाना में रखा जाता है. 

अमूमन इस जगह पर किसी केस में पुलिस की ओर से ज़ब्त की गई कीमती चीज़ें जैसे कैश, जूलरी, गाड़ियां, हथियार, मोबाइल फोन या अन्य चीज़ें सुरक्षित रखी जाती हैं. इन चीज़ों का रिकॉर्ड रखा जाता है. दिल्ली जैसी कई जगहों पर हर थाने और स्पेशल यूनिट का अपना मालखाना होता है. 

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