दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि इस समय उनके खिलाफ FIR दर्ज करना 'कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता.'
'कानूनी रूप से नामंजूर,' कपिल मिश्रा पर दिल्ली दंगों के लिए FIR दर्ज नहीं होगी, कोर्ट का आदेश
Delhi Riots: शिकायतकर्ता मोहम्मद इलियास ने अपनी शिकायत में Kapil Mishra, दयालपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन SHO और पांच अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की. इन पांच लोगों में BJP विधायक मोहन सिंह बिष्ट और BJP के पूर्व विधायक जगदीश प्रधान आदि भी शामिल थे.
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मोहम्मद इलियास की याचिका में दिल्ली दंगों के लिए BJP नेता और मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 मार्च को याचिका पर एडिशनल चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने अपने आदेश में कहा,
आवेदक के वकील ने कहा था कि 23 फरवरी 2020 की घटना के लिए कपिल मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए, लेकिन इस चरण पर ऐसा करना कानूनी रूप से संभव नहीं है.
हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक राहत जरूरी दी है. कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को एक शिकायत माना जाएगा. शिकायतकर्ता मोहम्मद इलियास भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 210(1)(a) के तहत अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश कर सकते हैं. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा,
सभी निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए BNSS की धारा 175(3) के तहत दिए गए आवेदन के आधार पर BJP विधायक कपिल मिश्रा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रार्थना को खारिज किया जाता है. इस आवेदन को अब एक शिकायत माना जाएगा, और शिकायतकर्ता को BNSS की धारा 223(1) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 210(1)(a) के तहत अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की पूरी आजादी है.
कोर्ट ने आदेश में जोर दिया कि इस मामले में पहले सत्र अदालत जो फैसला दे चुकी है, वही इस अदालत पर लागू होता है और वह फैसला अब अंतिम माना जाएगा.
पहले क्या हुआ था
इसी कोर्ट में पहले रह चुके ACJM वैभव चौरसिया ने दिल्ली पुलिस को कपिल मिश्रा की भूमिका की जांच करने को कहा था. उनका कहना था कि मिश्रा के एक भाषण को लेकर दिए गए बयानों में विरोधाभास दिखाई देता है. उन्होंने यह भी पाया था कि बचाव पक्ष ने केवल ‘अंदाजों’ और ‘मनगढ़ंत व्याख्याओं’ के जरिए गढ़ा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोधी प्रदर्शनकारियों ने दंगे की साजिश रची थी.
ACJM वैभव चौरसिया के आदेश को चुनौती दी गई. फैसले के खिलाफ एक याचिका राज्य ने दायर की जबकि एक याचिका खुद कपिल मिश्रा ने दायर की थी. पिछले साल 11 नवंबर को ACJM वैभव चौरसिया के निर्देश रद्द कर दिए गए. सेशन कोर्ट ने कहा था कि याचिका में साफ-साफ यह नहीं बताया गया कि कोई संज्ञेय अपराध हुआ है, इसलिए आगे कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आधार नाकाफी है.
सेशन कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि मजिस्ट्रेट कोर्ट आगे की जांच का आदेश नहीं दे सकता था, क्योंकि दिल्ली पुलिस ने दंगों के पीछे की बड़ी साजिश के संबंध में पहले ही एक FIR दर्ज कर ली थी, और कड़कड़डूमा कोर्ट ने उसका संज्ञान ले लिया था. अब इसी फैसले को मानते हुए ACJM अश्विनी पंवार ने FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है.
2020 में 24 से 26 फरवरी के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. इसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. दंगे में करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.
शिकायतकर्ता का आरोप, रोड ब्लॉक करते देखा
शिकायतकर्ता मोहम्मद इलियास ने अपनी शिकायत में कपिल मिश्रा, दयालपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन SHO और पांच अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी. इन पांच लोगों में BJP विधायक मोहन सिंह बिष्ट और BJP के पूर्व विधायक जगदीश प्रधान आदि शामिल थे. इलियास ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 23 फरवरी, 2020 को उन्होंने कपिल मिश्रा और उनके साथियों को सड़क रोकते हुए और सड़क किनारे ठेले लगाने वालों के ठेलों को तोड़ते हुए देखा था.
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