लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के मुखिया और सांसद चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के लिए ताल ठोक दी है. चिराग ने खुद आगे आकर कहा है कि वे दिल्ली की राजनीति के बजाय बिहार की राजनीति में लौटना चाहते हैं. उनके बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि चिराग इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, उन्होंने अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी पार्टी पर डाल दी है.
सांसदी छोड़ेंगे चिराग पासवान? बिहार चुनाव और CM पद की दावेदारी पर बड़ी बात बोल गए
Bihar Assembly Election 2025 के लिए Chirag Paswan की पार्टी मजबूती के साथ ताल ठोक रही है. आगामी विधानसभा चुनाव में क्या चिराग पासवान चुनाव लड़ेंगे? उन्होंने खुद इस सवाल का जवाब दे दिया है.


केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जोर देकर कहा है कि वे अपना भविष्य राष्ट्रीय राजनीति में नहीं देखते हैं. उनके लिए बिहार महत्वपूर्ण है और वे बिहार के लिए ही राजनीति करना चाहते हैं. छत्तीसगढ़ के रायपुर में मीडिया से बात करते हुए चिराग पासवान ने कहा,
"ये बात मैंने कही है कि मैं बहुत लंबे समय तक अपने आपको केंद्र की राजनीति में नहीं देखता हूं. मेरा राजनीति में आने का कारण ही बिहार और बिहारी रहे हैं. ऐसे में मेरी इच्छा है कि मैं जिस सोच के साथ राजनीति में आया हूं, मेरा एक अपना विजन भी है ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट'. ऐसे में मैं चाहता हूं कि मेरा राज्य बिहार विकसित राज्यों की श्रेणी में बराबरी पर आकर खड़ा हो. तीसरी बार का सांसद बनने के बाद मुझे एहसास हो रहा है कि दिल्ली में रहकर शायद नहीं संभव होगा."
चिराग पासवान ने कहा है कि उनकी पार्टी देखेगी कि क्या उनके चुनाव लड़ने से पार्टी को कितना फायदा मिलेगा. उनका तर्क है कि जब कोई राष्ट्रीय स्तर का नेता राज्य का चुनाव लड़ता है तो पार्टी को उसका फायदा मिलता है. इसके लिए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का उदाहरण देते हुए कहा,
"भारतीय जनता पार्टी ने कई बार इसका प्रयोग किया है, जब उन्होंने अपने सांसदों को चुनाव में उतारा जिसका उनको स्थानीय स्तर पर विधानसभा के चुनाव में फायदा हुआ, और ये होता है. अगर मेरे चुनाव लड़ने से मेरी पार्टी को मजबूती मिलती है, मेरा स्ट्राइक रेट बेहतर होता है. लोकसभा में हम लोगों का 100 फीसदी स्ट्राइक रेट है. मैं चाहूंगा कि विधानसभा में भी मैं जितनी सीटों पर भी लड़ूं, पर मेरा स्ट्राइक रेट बेहतर हो. अगर मेरा स्ट्राइक रेट, मेरे लड़ने से, और मेरे गठबंधन का प्रदर्शन बेहतर होता है, जो कि चर्चा में लग रहा है, तो मैं जरूर लड़ूंगा."
कुल मिलाकर चिराग पासवान का पूरा जोर बिहार में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाना है. चिराग चाहते हैं कि जिस तरह 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी पांच सीटों पर लड़ी और पांचों पर जीत दर्ज की, उसी तर्ज पर बिहार विधानसभा चुनाव में भी सफलता मिले. उनका पूरा जोर पार्टी के चुनावी स्ट्राइक रेट को बेहतर करने पर रहेगा.
बिहार में ऐसे भी कयास लग रहे हैं कि चिराग पासवान मुख्यमंत्री पद का चेहरा हो सकते हैं. हालांकि, उन्होंने इस तरह की सभी कायसबाजी पर फिलहाल विराम लगा दिया. उन्होंने कहा,
"मुख्यमंत्री पद की बिहार में, बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद की कोई वैकेंसी नहीं है. मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ही चुनाव परिणामों के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे."
अगर चिराग पासवान विधासनभा चुनाव लड़ते हैं तो लोजपा (राम विलास) की पूरी कोशिश रहेगी कि उन्हें रिजर्व सीट के बजाय जनरल सीट से मैदान में उतारा जाए. पार्टी के बड़े नेता और जमुई से सांसद अरुण भारती ने तर्क दिया कि जब नेता पूरे बिहार का है, तो सीट का दायरा सीमित क्यों रहना चाहिए. भारती ने पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं के आधार पर कहा कि चिराग पासवान को जनरल सीट से चुनाव लड़ना चाहिए.
वीडियो: पिटाई होने के बाद पटना के PMCH से मनीष कश्यप ने बिहार सरकार से क्या कहा?











.webp?width=275)


.webp?width=275)
.webp?width=120)
.webp?width=120)
.webp?width=120)




