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सीपीसीबी ने पहले कहा था कुंभ का पानी नहाने लायक नहीं, अब 'बढ़िया' बताया, पता है क्यों?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 17 फरवरी को NGT में रिपोर्ट दी थी कि Maha Kumbh के दौरान पानी नहाने लायक नहीं था. अब एक नई रिपोर्ट NGT में दाखिल की गई है. जानिए इस नई रिपोर्ट में गंगा-यमुना के पानी की क्वालिटी को लेकर क्या नई जानकारी सामने आई है.

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केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने नई रिपोर्ट में कहा कि महाकुंभ में पानी की क्वालिटी नहाने लायक थी. (PTI)

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को एक नई रिपोर्ट सौंपी है. इसमें कहा गया है कि हाल ही में आयोजित महाकुंभ के दौरान प्रयागराज की गंगा और यमुना नदियों का पानी नहाने के लिए ठीक था. यह रिपोर्ट 28 फरवरी को जारी की गई थी और 7 मार्च को NGT की वेबसाइट पर अपलोड की गई है. CPCB की नई रिपोर्ट 3 फरवरी को दाखिल की गई रिपोर्ट से बिल्कुल उलट है. उस रिपोर्ट में CPCB ने दावा किया था कि सीवेज की मात्रा बढ़ने की वजह से महाकुंभ के दौरान पानी की क्वालिटी नहाने लायक नहीं थी.

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 PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, महाकुंभ के दौरान पानी की क्वालिटी की जांच के लिए स्टैटिस्टिकल एनालिसिस की जरूरत थी. ये इसलिए जरूरी था क्योंकि एक ही जगह से अलग-अलग तारीख और एक ही दिन में अलग-अलग जगह से इकट्ठा किए गए नमूनों के आंकड़ों के बीच अंतर था. इसलिए यह डेटा नदी क्षेत्र में पूरी नदी के पानी की क्वालिटी को नहीं दिखाता है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 12 जनवरी से हफ्ते में दो बार पानी की निगरानी की. खास तौर पर शाही स्नान के दिनों पर गंगा और यमुना नदियों के पानी की क्वालिटी की जांच गई. गंगा पर पांच जगह, जबकि यमुना पर दो जगह जांच की गई. इस दौरान पानी के अहम पैरामीटर जैसे pH, डिजॉल्व ऑक्सीजन (DO), बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और फेकल कोलीफॉर्म (FC) का एनालिसिस किया गया.

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रिपोर्ट में माना गया कि डेटा में अंतर था, यानी एक ही जगह से एक ही दिन में लिए गए अलग-अलग नमूनों के नतीजे अलग-अलग आए थे. लेकिन फिर भी इन नतीजों का स्टैटिस्टिकल एनालिसिस करने के बाद बोर्ड इस नतीजे पर पहुंचा कि पानी की क्वालिटी नहाने लायक थी.

स्टैटिस्टिकल एनालिसिस में पाया गया कि गंगा और यमुना के पानी के लिए pH, DO, BOD और FC के औसत मान तय लिमिट के अंदर थे. उदाहरण के तौर पर फेकल कोलीफॉर्म (FC) का लेवल 1,400 था, जबकि स्टैंडर्ड लिमिट 2,500 प्रति 100 मिलीलीटर है. डिजॉल्व ऑक्सीजन (DO) का लेवल 8.7 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो कि 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा होना चाहिए. बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) 2.56 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जिसे 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए.

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इस रिपोर्ट के अनुसार, पानी की क्वालिटी को मापने वाले इन मापदंडों के औसत मान सभी जगह पर तय लिमिट के भीतर थे. इससे यह साबित हुआ कि प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान नदियों का पानी नहाने के लिए सुरक्षित था. मेन पैरामीटर के लिए अलग-अलग जगह के वाटर क्वालिटी डेटा का स्टैटिस्टिकल एनालिसिस 12 जनवरी से 22 फरवरी तक 'सामूहिक स्नान' की 10 जगह पर किया गया और 20 दौर की निगरानी की गई.

हालांकि, इससे पहले 17 फरवरी को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक अलग रिपोर्ट में यह बताया था कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के पानी में फेकल कोलीफॉर्म का लेवल ज्यादा था. रिपोर्ट में दावा किया गया था की पानी में सीवेज की मात्रा बढ़ गई, जिसकी वजह से पानी नहाने के लिए ठीक नहीं था.

नई रिपोर्ट में बताया गया कि समय और जगह के हिसाब से पैरामीटर बदल सकते हैं. इसलिए इन आंकड़ों का सही आकलन करने के लिए स्टैटिस्टिकल एनालिसिस जरूरी था. रिपोर्ट में कहा गया कि पानी की क्वालिटी पर कई फैक्टर असर डालते हैं, जैसे- मानव गतिविधियां, पानी का बहना और नदी की गहराई आदि. इनकी वजह से आंकड़ों में अंतर देखा गया.

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