कनाडा में मार्क कार्नी प्रशासन की नई इमिग्रेशन नीतियों के कारण भारतीय प्रवासियों पर बड़ा संकट मंडरा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 के अंत तक लगभग 10 लाख 53 हजार वर्क परमिट एक्सपायर हो चुके हैं. जबकि 2026 में 9 लाख 27 हजार परमिट की वैलिडिटी खत्म होने वाले हैं. इनमें से बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है, जिनकी अनुमानित संख्या 10 लाख से अधिक है.
कनाडा में भारतीयों के रहने पर संकट, लाखों लोगों पर निर्वासन का खतरा मंडराया!
कनाडा सरकार का कहना है कि ये कदम हाउसिंग, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सर्विसेज पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है.


इमिग्रेशन एक्सपर्ट कंवर सैराह के मुताबिक जून 2026 तक कनाडा में कम से कम 20 लाख अनडॉक्यूमेंटेड (अवैध) प्रवासी हो सकते हैं. जिनमें आधे से ज्यादा भारतीय होंगे. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मार्क कार्नी सरकार ने 2028 तक इमिग्रेशन पर सख्त कैप लगाया है. परमानेंट रेजिडेंसी के लक्ष्य को 2026 में घटाकर 3.80 लाख कर दिया गया है. टेम्परेरी फॉरेन वर्कर प्रोग्राम में भी बड़े बदलाव किए गए हैं. जिससे टेम्परेरी वर्कर्स और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए कानूनी रहने के रास्ते बहुत सीमित हो गए हैं.
कनाडा सरकार का कहना है कि ये कदम हाउसिंग, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सर्विसेज पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है. कार्नी ने कहा कि देश को फोकस्ड अप्रोच की जरूरत है, ताकि लेबर की सही जरूरतों को पूरा किया जा सके.
परमिट खत्म होने पर लोगों के पास रिस्टोरेशन अप्लाई करने के लिए 90 दिन का समय होता है. लेकिन ये प्रोसेस महंगा है, काम करने की इजाजत नहीं मिलती और महीनों लग सकते हैं. अगर लोग कानूनी स्टेटस खो देते हैं, तो वो बिना लीगल डॉक्यूमेंट्स के रहने को मजबूर हो जाते हैं. ग्रेटर टोरंटो एरिया के ब्रैम्पटन और कैलेडन जैसे इलाकों में पहले से ही टेंट कैंप और अनौपचारिक काम की खबरें आ रही हैं. कुछ लोग कैश में काम कर रहे हैं और शादियों के जरिए स्टेटस बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
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कनाडा लंबे समय से इमिग्रेशन के प्रति अपने स्वागत पूर्ण रवैये के लिए जाना जाता रहा है. 2022 से 2023 के बीच लगभग 12 लाख नए लोग देश आए थे. इसमें स्थायी निवासी और अस्थायी परमिट वाले लोग शामिल हैं. इस उछाल ने 1950 के दशक के बाद देश में सबसे तेज जनसंख्या वृद्धि दर्ज की, लेकिन साथ ही आवास और स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत भारी दबाव भी डाल दिया. सार्वजनिक चिंता भी लगातार बढ़ रही है. एंगस रीड इंस्टीट्यूट के एक सर्वे के अनुसार, 28% कनाडा के लोग महंगे घरों की वजह से अपने राज्य छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं.
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