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रेप केस में तहलका के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे HC ने सुनाई 10 साल की सज़ा

Tarun Tejpal case: तहलका मैगज़ीन के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेप केस में दोषी करार दिया. कोर्ट ने सत्र अदालत के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें उन्हें बरी कर दिया गया था. एक जूनियर महिला पत्रकार ने साल 2013 में रेप केस दर्ज किया था.

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2013 के रेप केस में तरुण तेजपाल दोषी. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त 2020 को पत्रकार तरुण तेजपाल को IPC की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354 A और 354 B के तहत रेप और यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिया है।
  • तरुण तेजपाल पर आरोप 2013 में THiNK Fest के दौरान हुई एक जूनियर महिला पत्रकार के साथ जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश से जुड़े थे, जिसे निचली कोर्ट ने पहले बरी किया था।
  • गोवा सरकार ने सत्र अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिससे अब तक के मुकदमेबाजी के बाद तेजपाल को दस साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार, 6 अगस्त को पत्रकार तरुण तेजपाल को रेप केस में दोषी करार दिया है. कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है. गोवा की लोअर कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया था. तरुण तेजपाल तहलका मैगज़ीन के पूर्व एडिटर इन चीफ थे. जूनियर महिला पत्रकार ने साल 2013 में रेप केस दर्ज किया था. कोर्ट ने उन्हें दस साल कैद की सज़ा सुनाई है.

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लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस केस की सुनवाई जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की पीठ कर रही थी. मापुसा की सत्र अदालत ने साल 2021 में तरुण को सभी आरोपों से बरी कर दिया था. जिसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चैलेंज किया था. अब कोर्ट ने तरुण को IPC की धारा 376(2)(f) और 376(2)(k) के तहत रेप और सेक्शुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) का दोषी माना है. साथ ही धारा 354 A और 354 B के तहत भी दोषी ठहराया है. 

तेजपाल ने क्या कहा?

कोर्ट में सुनवाई के दौरान तरुण तेजपाल ने नरमी बरतने की मांग की थी.  

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‘मैं 62 साल का हूं और मुझे लगता है कि मैं पीड़ित हूं. मेरी पत्नी है और मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि नरमी बरतें.’

तरुण तेजपाल की ओर से पेश हुए वकील आबाद पोंडा ने भी कोर्ट से नरमी बरतने के लिए कहा. तर्क दिया कि केस करीब 13 साल पुराना है और अपील की कि आदेश को दो महीने के लिए टाल दिया जाए ताकि सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालने का समय मिल सके. ये भी बताया कि तरुण के खिलाफ और कोई FIR दर्ज नहीं है.

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सरकार ने क्या तर्क दिया?

रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया तुषार मेहता स्टेट की तरफ से पेश हुए. उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी ने अपनी बेटी की उम्र की लड़की के साथ अपराध को अंजाम दिया है. वो मना करती रही, लेकिन वो दो दिन तक उससे परेशान करता रहा. उन्होंने कहा कि ये बात साफ हो जानी चाहिए कि ‘ना का मतलब ना होता है’.

इस पूरे मामले की शुरुआत 7 नवंबर 2013 को गोवा में आयोजित THiNK Fest के दौरान हुई थी. आरोप के मुताबिक, कार्यक्रम में शामिल तहलका की एक जूनियर महिला पत्रकार के साथ होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश की थी.   

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