सूखे की समस्या से परेशान गांववालों ने अंधविश्वास का सहारा लिया और दो लड़कियों की शादी करा दी. उनका कहना है कि ऐसे करने से देवता खुश हो जाएंगे और बारिश करा देंगे. लेकिन इस अंधविश्वास की कीमत दो बच्चियों ने चुकाई. एक लड़की को दूल्हे की तरह सजाया गया, और एक को दुल्हन की तरह.
सूखे से परेशान गांववालों ने दो बच्चियों की 'शादी' करा दी, बोले- 'अब बारिश होगी'
बेंगलुरु से लगभग 65 किलोमीटर दूर सिडलाघट्टा तालुक के कोटिपल्ली गांव के लोगों ने यह रस्म निभाई है. उन्होंने इलाके में लंबे समय से चल रहे सूखे को खत्म करने की उम्मीद में दो लड़कियों की प्रतीकात्मक शादी कराई.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी खबर में छापा है कि बेंगलुरु से लगभग 65 किलोमीटर दूर सिडलाघट्टा तालुक के कोटिपल्ली गांव के लोगों ने यह रस्म निभाई है. उन्होंने इलाके में लंबे समय से चल रहे सूखे को खत्म करने की उम्मीद में दो लड़कियों की प्रतीकात्मक शादी कराई.
लड़कियों को दिया आशीर्वाद, मिले गिफ्टइस रस्म के लिए 10 साल की एक लड़की को दूल्हा और छह साल की एक लड़की को दुल्हन के रूप में तैयार किया गया. 'जोड़े' को अरुंधति तारे के पारंपरिक 'दर्शन' कराए गए. शादी का माहौल दिखाने के लिए गांव की महिलाओं ने इससे जुड़े गीत भी गाए. बच्चों का आशीर्वाद दिया. शादी को असल दिखाने के लिए कुछ लोगों ने नकद में उन्हें गिफ्ट भी दिए.
अखबार से बात करते हुए गांव वालों ने दावा किया कि इलाके में पहले भी सूखे से बचने के लिए ऐसी रस्में हुई हैं. और जब-जब बच्चों की शादी कराई गई, तब बारिश हुई है. 60 साल की पिल्लम्मा ने बताया,
"मैंने पहले भी सूखे के समय ऐसी रस्में देखी हैं. बारिश लाने की उम्मीद में गांव वाले अलग-अलग रस्में निभाते थे, जिनमें बच्चों की सांकेतिक शादियां भी शामिल थीं."
गांव की एक निवासी पुष्पा ने बताया कि यह कार्यक्रम पांच दिनों तक चला था. और इस दौरान हर दिन गौरी पूजा की गई. बाद में बारिश के देवता वरुण के प्रतीक 'मलेराया' की मिट्टी की मूर्तियों का जुलूस निकाला गया और उन्हें विसर्जित किया गया.
बारिश बुलाने के लिए ऐसी रस्में इस इलाके में कोई नई बात नहीं हैं. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले कर्नाटक के मांड्या जिले में बारिश के देवताओं को खुश करने के लिए एक सांकेतिक रस्म के तौर पर दो लड़कों की आपस में शादी कराई गई.
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ये रस्में कृष्णराजपेट तालुक के गंगेनहल्ली गांव में निभाई गईं. एक लड़के को दूल्हे की तरह और एक को दुल्हन की तरह सजाया गया. शादी के बाद एक दावत का भी आयोजन किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक सूखे के दौरान गधों और मेंढकों की सांकेतिक शादियों जैसी पारंपरिक रस्में भी निभाई जाती हैं.
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