यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियम और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर विवाद से उत्तर प्रदेश में कोहराम मचा है. दोनों ही घटनाओं से नाराज होकर बरेली के सिटी मैजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी. अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे की वजह ‘UGC के नए नियमों में सवर्ण समाज के छात्रों के कथित अधिकार हनन’ और 'स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की शिखा (चोटी) को खींचना' बताया है. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी निशान साधा और 'बॉयकॉट BJP' का पोस्टर लेकर एक फोटो शेयर किया है.
'UGC Rules, शंकराचार्य के अपमान से दुखी', बरेली के नगर मजिस्ट्रेट ने नाम के आगे लिखा- 'इस्तीफा'
Bareilly City Magistrate अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज के माघ मेले में Swami Avimukteshwaranand के शिष्यों की शिखा (चोटी) खींचे जाने से अपने आप को दुखी बताया है. उन्होंने UGC के नए नियम का भी विरोध किया.


अलंकार अग्निहोत्री ने BJP के ‘ब्राह्मण’ विधायकों और सांसदों को भी निशाने पर लिया. आरोप लगाया कि UGC के नए नियम से सवर्ण समाज के छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा. इंडिया टुडे से जुड़े कृष्ण गोपाल राज की रिपोर्ट के मुताबिक, अलंकार अग्निहोत्री ने 5 पेज लंबा त्यागपत्र लिखा है, जिसमें केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है.
अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि वह प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की शिखा खींचे जाने से दुखी हैं. 26 जनवरी को उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा,
उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से अब सामान्य वर्ग (General Category) अलग हो चुका है. इस समय जो सरकार है वो अल्पमत में है. अगर इस समय चुनाव करा लिए जाएं तो सरकार वापस सत्ता में नहीं आ पाएगी. चाहे वो केंद्र में हो या यूपी में.
UGC के नए नियम का विरोध करते हुए उन्होंने कहा,
इससे सिर्फ एक ही चीज हो सकती है. सामान्य वर्ग के बेटे-बेटियों का या तो शोषण होगा. या बेटियों पर जिनकी बुरी नजर होगी, वो समता समिति के जरिए फर्जी शिकायतें करेंगे. इससे बेटियों को या तो आत्महत्या के लिए मजबूर करेंगे या उन्हें शारीरिक शोषण के लिए मजबूर करेंगे.
उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा,
अगर सरकार आंख बंद करके बैठी है तो इनके चाटुकार राज्य सरकार या केंद्र सरकार को बता नहीं रहे हैं कि देश में इस समय बहुत ही विषम परिस्थिति है. सामान्य वर्ग पहली बार इतना मुखर हुआ है. आप किसी भी सोशल मीडिया, किसी भी ग्रुप, किसी भी वॉट्सऐप या इंस्टाग्राम पर देखेंगे तो सामान्य वर्ग अलग हो चुका है. जो BJP पहले 'भारतीय जनता पार्टी' हुआ करती थी वो इस समय 'विदेशी जनता पार्टी' बन गई है.

अग्निहोत्री ने दूसरे पेज में आरोप लगाया कि सरकार ब्राह्मणों के खिलाफ काम कर रही है. उन्होंने लिखा,
इस वर्ष 2026 के प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी और उनके सिद्ध बटुक ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की. वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर और उनकी शिखा पकड़कर घसीटते हुए पीटा गया. उनकी मर्यादा का हनन किया गया. चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण साधु-संतों का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है और अधोहस्ताक्षरी (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण जाति से है. घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन ने ब्राह्मणों का देशव्यापी अपमान किया है.
उन्होंने आगे लिखा,
इससे यह लगता है कि स्थानीय प्रशासन और वर्तमान राज्य सरकार एक ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है. साधु-संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है.
इस्तीफे के आखिर में उन्होंने लिखा कि अब केंद्र और राज्य सरकार में भ्रम की स्थिति है. उन्होंने आरोप लगाया कि अब न तो सही मायने में लोकतंत्र है और न ही गणतंत्र है.

बता दें कि ब्राह्मण समाज से आने वाले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री 2019 में उत्तर प्रदेश के PCS (Provincial Civil Service) अधिकारी बने थे. इससे पहले इन्होंने 10 साल IT सेक्टर में काम किया. उन्होंने IIT BHU (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) से B.Tech किया है. इस्तीफे के बाद उनकी एक तस्वीर भी सामने आई, जिसमें वह सरकारी बोर्ड पर लिखे उनके नाम के आगे ‘इस्तीफा’ लिखते दिख रहे हैं.
भाजपा में भी बगावतअग्निहोत्री के अलावा नोएडा में BJP युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी दोनों बातों को लेकर इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने UGC के नए नियम को ‘काला कानून’ और ‘सवर्ण छात्रों का विरोधी’ बताते हुए अपना पद छोड़ा है.

इससे पहले एक अन्य BJP नेता मृगेंद्र उपाध्याय के पार्टी से इस्तीफा देने की खबर आई थी. उन्होंने भी UGC और शंकराचार्य विवाद के चलते पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया था.
वीडियो: प्रयागराज के लोगों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के विवाद पर क्या कहा?











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