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LGBTQIA+ समुदाय की ऐप पर विवाद, पुलिस ने कहा- बैन कीजिए, ड्रग्स बिक रहा है

Police Seeks Ban on Grindr App: चेन्नई पुलिस का दावा है कि कई मामलों में इस ऐप का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी के लिए किया जाता है. इस मामले के सामने आने के बाद LGBTQIA+ समुदाय ने भी चिंता जाहिर की है. क्या है ये पूरा मामला?

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पुलिस ने ग्राइंडर ऐप पर बैन लगाने की मांग की है. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

ग्रेटर चेन्नई पुलिस (GCP) ने ‘ग्राइंडर’ ऐप (Ban on Grindr App) को बैन करने की मांग की है. LGBTQIA+ कम्युनिटी के लिए ये एक सोशल नेटवर्किंग ऐप है. पुलिस का दावा है कि कई मामलों में इसका इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग ‘मेथामफेटामाइन’ की तस्करी के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा है कि तस्करी के लिए बातचीत का काम इस ऐप पर किया जाता है.

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GCP के मुताबिक, पिछले साल अगस्त महीने से लेकर अब तक ऐसे 20 मामले दर्ज किए गए हैं. इन सब में इसी ऐप को कम्युनिकेशन का जरिया बनाया गया था. पुलिस ने तमिलनाडु डीजीपी कार्यालय के माध्यम से 'कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम' (CERT) को पत्र लिखकर इसको प्रतिबंधित करने की मांग की है. CERT, केंद्र सरकार की 'मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी' (MeITY) के तहत काम करती है. पत्र में इस ऐप पर ‘उपद्रव पैदा करने’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित’ करने के आरोप लगे हैं.

इसी ऐप पर कार्रवाई क्यों?

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस से LGBTQIA+ समुदाय की चिंताओं के बारे में भी पूछा गया. समुदाय को चिंता है कि इस तरह के फैसलों से आम लोगों में ये धारणा बनेगी कि वो नशीली दवाइयों के दुरुपयोग और तस्करी में शामिल हैं. पुलिस से ये भी पूछा गया कि इस तरह की चीजें किसी भी ऐप के माध्यम से की जा सकती हैं. ऐसे में सिर्फ इसी ऐप पर कार्रवाई की मांग क्यों की गई?

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एक पुलिस अधिकारी ने तर्क दिया है कि उन्हें जिन मामलों के बारे में पता चला है, उनमें से किसी में भी दूसरे किसी ऐप के बारे में प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिले हैं. LGBTQIA+ समुदाय से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि फोन कॉल पर भी फ्रॉड हो रहे हैं. इसका मतलब ये तो नहीं कि फोन को ही बैन कर दिया जाएगा.

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इस पर पुलिस ने जोर देकर कहा कि उन्हें इस बात के ठोस सबूत मिले हैं कि इसी ऐप के जरिए ‘मेथामफेटामाइन’ ड्रग बेचे गए हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का ये भी कहना है कि कम से कम दो पुलिस कांस्टेबल भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ड्रग बेचने वाले लोग ऐप पर अपने प्रोफाइल में एक खास सिंबल लगाकर रखते हैं. ये एक सीक्रेट कोड की तरह काम करता है.

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