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विमान बचे, हादसा टला... लेकिन कब तक? भारत में बढ़ते 'नियर-मिस' मामलों का खौफनाक सच

Russian Roulette On Runway: अहमदाबाद एयरपोर्ट पर एयर इंडिया और इंडिगो के विमान आमने-सामने आने से बड़ा हादसा होते-होते बच गया. आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे व्यस्त एयरपोर्ट्स पर रनवे इनकर्शन और नियर-मिस के मामले पिछले 3 सालों में 35 फीसदी तक बढ़ गए हैं.

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आखिर क्यों बढ़ रहे हैं विमान टकराव के करीब पहुंचने वाले मामले? (फोटो- ANI)

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  • अहमदाबाद एयरपोर्ट पर 24 जून 2026 को एयर इंडिया की फ्लाइट टैक्सीवे पर गलत मुड़ी, जिससे इंडिगो विमान के करीब पहुंचने का नजदीकी हादसा टल गया।
  • पिछले तीन वर्षों में दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे व्यस्त हवाई अड्डों पर नियर-मिस और रनवे इनकर्शन की घटनाओं में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • डीजीसीए को पायलटों की थकान कम करने और एटीसी स्टाफ की कमी दूर करने के लिए नियम सख्ती से लागू कर एयरपोर्ट सुरक्षा तकनीकें बेहतर करनी होंगी।

बुधवार, 24 जून 2026 की शाम… अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जो हुआ, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था. मुंबई से आई एयर इंडिया की फ्लाइट लैंड होने के बाद टैक्सीवे पर गलत मुड़ गई. सामने से इंडिगो का विमान टेक-ऑफ के लिए बिल्कुल तैयार खड़ा था. दोनों में से किसी भी एयरक्राफ्ट की रफ्तार तेज होती या पायलटों की नजर एक सेकंड के लिए भी चूकती, तो 200 मीटर का फासला मिटने में देर नहीं लगती. एक भयानक हादसा होते-होते बच गया.

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मगर अहमदाबाद की ये घटना इकलौती नहीं है, जब भारत के एयरपोर्ट और रनवे पर इस तरह के ‘नियर मिस’ हादसों की रिपोर्ट आई हो. भारत के आसमान और रनवे पर इन दिनों 'रशियन रूले' जैसा खतरनाक खेल चल रहा है. रशियन रूले यानी एक ऐसी बंदूक जिसमें सिर्फ एक गोली होती है और हर बार ट्रिगर दबाते वक्त जान दांव पर होती है. 

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की सेफ्टी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 3 सालों में दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे व्यस्त एयरपोर्ट्स पर 'नियर-मिस' (Near-Miss) और रनवे इनकर्शन (Runway Incursion) के मामले तेजी से बढ़े हैं. सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

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क्या होता है रनवे इनकर्शन और नियर-मिस

इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) के मुताबिक जब कोई विमान, गाड़ी या इंसान बिना इजाजत के किसी एक्टिव रनवे या टैक्सीवे पर आ जाए, तो उसे ‘रनवे इनकर्शन’ कहते हैं. इसी तरह ‘नियर-मिस’ का मतलब होता है कि दो विमान टकराने के बेहद करीब आ गए हों. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे सड़क पर दो गाड़ियां आमने-सामने आ जाएं और ऐन वक्त पर ब्रेक लग जाए.

जब एक विमान लैंड कर रहा होता है और दूसरा टेक-ऑफ के लिए लाइन में होता है, तब एटीसी (Air Traffic Control) और कॉकपिट के बीच की को-ऑर्डिनेशन में जरा सी चूक भी तबाही ला सकती है. अहमदाबाद वाले केस में एयर इंडिया का विमान रनवे खाली करने के बाद जिस टैक्सीवे पर गया, वो इंडिगो की फ्लाइट के रूट से ओवरलैप हो रहा था.

2023 से 2025 तक, आंकड़े डरावने हैं!

अगर आपको लगता है कि अहमदाबाद की घटना महज एक अपवाद है, तो आपको दिल्ली और मुंबई के आंकड़े देखने चाहिए. पिछले 3 सालों में भारत के टॉप 3 सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स पर रनवे इनकर्शन की घटनाओं में करीब 35 फीसदी का उछाल आया है.

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एयरपोर्ट2023 में मामले2024 में मामले2025/2026 (अब तक)
दिल्ली (IGI)121618
मुंबई (CSMIA)81114
अहमदाबाद (SVPIA)357


मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि जैसे-जैसे उड़ानों की संख्या बढ़ रही है, ग्राउंड पर रिस्क का लेवल भी उसी तेजी से बढ़ रहा है. दिल्ली जैसे एयरपोर्ट पर जहां 3 से ज्यादा रनवे एक्टिव रहते हैं, वहां हर 2 मिनट में एक फ्लाइट लैंड या टेक-ऑफ कर रही होती है. ऐसे में मार्जिन ऑफ एरर यानी गलती की गुंजाइश भी बनी रहती है.

क्यों आ रही है ये नौबत

इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए हमें पैसेंजर केबिन से निकलकर कॉकपिट और एटीसी के केबिन में झांकना होगा. एविएशन से जुड़ी रितिका चोपड़ा के मुताबिक, इन घटनाओं के पीछे तीन सबसे बड़े विलेन हैं.

1. पायलटों की थकान (Pilot Fatigue)

एयरलाइंस कंपनियों के बीच सस्ते टिकट बेचने और ज्यादा से ज्यादा रूट कवर करने की होड़ मची है. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) के मुताबिक इसका सीधा असर पायलटों के वर्किंग ऑवर्स पर पड़ रहा है. बैक-टू-बैक फ्लाइट्स, रात की ड्यूटी और खराब रोस्टर के कारण पायलट क्रॉनिक फटीग (थकान) का शिकार हो रहे हैं. थका हुआ दिमाग कई बार एटीसी के कमांड्स को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता और गलत टैक्सीवे चुन लेता है.

2. एटीसी स्टाफ की भारी कमी (ATC Staff Shortage)

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स यानी एटीसी के ऊपर पूरे आसमान और रनवे को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी होती है. भारत में इस समय स्वीकृत पदों के मुकाबले एटीसी स्टाफ की भारी कमी चल रही है. एक-एक कंट्रोलर को बिना ब्रेक के लंबे समय तक स्क्रीन पर नजर गड़ानी पड़ती है. दबाव इतना ज्यादा होता है कि पीक ऑवर्स में वॉइस कमांड देने में मामूली सी चूक भी दो विमानों को एक ही ट्रैक पर ला खड़ा करती है.

3. एयरलाइंस के आक्रामक शेड्यूल

कंपनियां अपनी फ्लीट का शत-प्रतिशत इस्तेमाल करना चाहती हैं. एक विमान लैंड होते ही आधे घंटे के भीतर उसे अगले रूट के लिए तैयार करना होता है. एविएशन एक्सपर्ट रितिका चोपड़ा की मानें तो,

इस आपाधापी में ग्राउंड क्रू, पायलट और एटीसी सभी के ऊपर टाइम पर फ्लाइट उड़ाने का भारी प्रेशर होता है. जब आप स्पीड को सेफ्टी से ऊपर रखेंगे, तो रिजल्ट कुछ बुरा भी हो सकता है.

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क्या है इसका समाधान

इन नियर-मिस मामलों को रोकने के लिए सिर्फ जांच के आदेश देना काफी नहीं है. डीजीसीए को पायलटों के आराम से जुड़े नियमों (FDTL) को सख्ती से लागू करना होगा. एविएशन सेफ्टी नेटवर्क इंटरनेशनल के गाइड लाइन्स के मुताबिक एयरपोर्ट्स पर 'रनवे स्टेटस लाइट्स' (RWSL) और 'एडवांस्ड सरफेस मूवमेंट गाइडेंस एंड कंट्रोल सिस्टम' (A-SMGCS) को अपग्रेड भी करना होगा. ताकि अगर कोई विमान गलत रास्ते पर जाए, तो ऑटोमैटिक अलार्म बज जाए.

जरूरत है इन कमियों को समय रहते दूर करने की, वरना ये नियर-मिस किसी भी दिन बड़े हादसे में बदल सकते हैं.

वीडियो: दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग हुई

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