राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है. लेकिन उसे गैंगरेप के आरोप से बरी कर दिया है. साथ ही इस केस में सह आरोपी शिल्पी व शरतचंद को बरी किया गया है. अदालत ने आसाराम को इस सजा के तहत सरेंडर करने का निर्देश दिया है. वह इस समय अंतरिम जमानत पर बाहर है.
आसाराम गैंगरेप के आरोप से मुक्त, हाई कोर्ट ने क्या कहा?
Rajasthan High Court ने आसाराम को नाबालिग के साथ गैंगरेप के आरोप से बरी कर दिया है. साथ ही इस केस में सह आरोपी शिल्पी व शरतचंद को बरी किया गया है. अदालत ने आसाराम को इस सजा के तहत सरेंडर करने का निर्देश दिया है.


आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की एक डिवीजन बेंच ने 27 मई को यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने माना कि सह-आरोपियों के खिलाफ गैंग रेप की साजिश में शामिल होने के सीधे सबूत नहीं हैं. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया.
इस तरह तकनीकी और कानूनी रूप से आसाराम के ऊपर से भी गैंगरेप का आरोप हट गया. हालांकि, अकेले आसाराम द्वारा किए गए मुख्य दुष्कर्म की सजा को बरकरार रखा गया. कोर्ट ने यह भी किया कि नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा. अदालत ने उसे आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धारा 120(B) से भी मुक्त कर दिया.
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2013 में नाबालिग के रेप का मामला
आसाराम पर अगस्त 2013 में एक नाबालिग के रेप का आरोप लगा था. पुलिस ने सितंबर 2013 में आसाराम को पकड़ा था. इस मामले में आसाराम को साल 2018 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. आसाराम के खिलाफ रेप का एक दूसरा केस भी है.
साल 2013 में ही सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं पर रेप का आरोप लगाया गया था. दोनों बहनों का आरोप था कि आसाराम और नारायण साईं ने उनका कई बार रेप किया. इस केस में जनवरी 2023 में गुजरात की एक कोर्ट ने आसाराम को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस मामले में नारायण साईं को साल 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
वीडियो: नाबालिग रेप पीड़िता आसाराम की जमानत के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट




















