जिस आवाज ने मोहब्बत को एहसास दिया, जुदाई को शब्द दिए और टूटे दिलों का दर्द अपने सुरों में समेट लिया, वही आवाज अब फिल्मों से दूर हो रही है. भारत के मशहूर प्लेबैक सिंगर अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कह दिया है. यानी अब वे फिल्मों के लिए नए गाने नहीं गाएंगे.
अरिजीत सिंह ने रिटायरमेंट लिया, लेकिन गाना गाएंगे
2013 में Aashiqui 2 के गाने Tum Hi Ho ने Arijit Singh की ना सिर्फ जिंदगी बदल दी, बल्कि हिंदी सिनेमा की रोमांटिक साउंडस्केप को भी नई पहचान दे दी. आतिफ असलम, मोहित चौहान जैसे दिग्गजों के बीच अरिजीत ने अपनी पहचान बनाई.


यह सिर्फ एक सिंगर का फैसला नहीं, बल्कि हिंदी फिल्म संगीत के एक पूरे दौर का ठहराव है. क्योंकि पिछले एक दशक में अगर किसी एक आवाज ने सबसे ज्यादा दिलों पर राज किया है, तो वो आवाज अरिजीत सिंह की मानी जाती है.
अरिजीत ने नए साल और इसके पहले महीने के आखिर में अपने फैंस के लिए लिखा,
“हैलो, आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं. मैं आप सभी को इतने सालों तक मुझे सुनने के लिए, इतना प्यार देने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब मैं प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर कोई नया असाइनमेंट नहीं लूंगा. मैं इसे खत्म कर रहा हूं. यह एक शानदार सफर था.”

2013 में ‘आशिकी 2’ में यह गाना आया. इस गाने ने ना सिर्फ अरिजीत सिंह की जिंदगी बदल दी, बल्कि हिंदी सिनेमा की रोमांटिक साउंडस्केप को भी नई पहचान दे दी. आतिफ असलम, मोहित चौहान जैसे दिग्गजों के बीच अरिजीत ने अपनी पहचान बनाई.
उन्होंने एक से बढ़कर एक गाने गए- ‘चन्ना मेरेया’, ‘अगर तुम साथ हो’, ‘राब्ता’, ‘हवाएं’, ‘केसरिया’, ‘अपना बना ले पिया’, ‘ऐ दिल है मुश्किल,’ ‘ओ बेदर्दया’ आदि. ये सिर्फ चार्टबस्टर नहीं थे, ये लोगों की जिंदगी के साउंडट्रैक बन गए.
जियागंज से जन-जन तक
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के जियागंज जैसे छोटे से कस्बे में अरिजीत सिंह का जन्म हुआ. पिता पंजाबी और मां बंगाली. मां गाती थीं, मामा तबला बजाते थे. लेकिन हुनर के साथ-साथ उनके पास रियाज और सब्र भी था. उन्होंने शास्त्रीय संगीत की सख्त ट्रेनिंग, हारमोनियम और तबले की समझ ली.
2005 में रियलिटी शो फेम गुरुकुल में हिस्सा लिया. शो नहीं जीता, लेकिन खुद पर भरोसा करना जरूर सीखा. शो के बाद लाइमलाइट नहीं मिली, बल्कि संघर्ष मिला. वह समय, जब अरिजीत ने पर्दे के पीछे रहकर प्रीतम, विशाल-शेखर जैसे म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ काम किया. म्यूजिक और सिंगिंग सीखते रहे. इनकी बारीकियां समझते रहे.
अरिजीत सिंह की खास बात यह है कि वे गाने को महसूस करते हैं. उनकी आवाज सिर्फ सुर नहीं निकालती, वह कहानी कहती है. जब परदे पर रणबीर कपूर टूटते हैं, उदास होते हैं या प्यार में पड़ते हैं, तो पीछे से अरिजीत की आवाज उस भावना को और गहरा कर देती है.
उनकी आवाज में एक सादगी है. ना जरूरत से ज्यादा ऊंचे सुर, ना दिखाने की कोशिश. शायद इसी वजह से उनकी गायकी सीधे दिल में उतर जाती है.
विवाद भी आए, लेकिन आवाज नहीं रुकी
साल 2016 में एक अवॉर्ड शो के बाद अरिजीत सिंह और सलमान खान के बीच विवाद की खबरें आईं. कहा गया कि इसका असर अरिजीत के करियर पर पड़ा और कुछ बड़ी फिल्मों से उनकी दूरी हो गई. हालांकि, उन्होंने पूरी कंट्रोवर्सी के लिए सलमान खान से माफी भी मांगी. यहां तक कि उन्होंने सलमान से 'सुल्तान' फिल्म में अपनी आवाज में गाए 'जग घुमेया थारे जैसा ना कोई' गाने को ना हटाने की भी अपील की थी.
अवॉर्ड्स, शोहरत और फिर भी सादगी
अरिजीत सिंह ने अपने करियर में कई बड़े सम्मान जीते. दो नेशनल अवॉर्ड भी मिले. पहली बादर 'पद्मावत' के 'बिंते दिल' और दूसरी बार 'ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन-शिवा' के 'केसरिया' के लिए. 2025 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया.
वे देश-विदेश में स्टेडियम कॉन्सर्ट करते हैं, लाखों लोग उन्हें सुनने आते हैं. हाल ही में उन्होंने इंटरनेशनल सिंगर एड शीरन के साथ भी कोलैबोरेट किया. इन सबके बावजूद अरिजीत लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं. सादा रहन-सहन, कम इंटरव्यू और ज्यादा काम, यही उनकी पहचान है. वे बंगाल में अपनी स्कूटी पर घूमते हुए मिलते हैं. उसी से जाकर वोट भी डालते हैं.
अरिजीत सिंह का आखिरी रिलीज हुआ फिल्मी गाना सलमान खान की अपकमिंग मूवी 'बैटल ऑफ गलवान' का 'मातृभूमि' है. उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ के ब्लॉकबस्टर गाने 'घर कब आओगे' को भी आवाज दी है. हो सकता है कि अरिजीत सिंह ने कुछ और भी फिल्मी गाने रिकॉर्ड किए हों, जो आगे चलकर रिलीज हो सकते हैं.
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