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कमाने में सक्षम होने के बाद भी काम नहीं करे तो पत्नी को नहीं मिलेगा मेंटनेंस: हाई कोर्ट

Allahabad High Court News: मेंटनेंस से जुड़ी एक महिला डॉक्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि अगर सक्षम है और कमा सकती है तो मेंटनेंस देने से इनकार किया जा सकता है.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट का मेंटनेंस पर फैसला

तलाक और मेंटनेंस से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई सक्षम और पेशेवर महिला जानबूझकर काम नहीं करती है, तो उसे मेंटनेंस देने से इनकार किया जा सकता है. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि इसे पति पर आर्थिक बोझ डालने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए. दो जजों की बेंच जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन ने यह फैसला सुनाया.

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दो जजों की बेंच ने तलाक के एक मामले की सुनवाई में पत्नी को अंतरिम भरन-पोषण देने से इनकार करते हुए यह अहम फैसला सुनाया. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि याचिकाकर्ता महिला पेशे से गायनोकॉलोजिस्ट हैं और वह अपना खर्च उठाने में सक्षम है. इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि बच्चों की परवरिश की वजह से वह फिलहाल काम नहीं कर रही हैं. हालांकि, हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.

तलाक से जुड़े मामले में कोर्ट ने दिया फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट के पास पेशे से गायनोकॉलोजिस्ट महिला की याचिका आई थी. महिला का पति न्यूरोसर्जन है और उन्होंने कोर्ट से अंतरिम मेंटनेंस की मांग की थी. फैमिली कोर्ट ने इस मामले में महिला की मांग खारिज करते हुए सिर्फ बच्चों के लिए हर महीने 60,000 की राशि देने का आदेश दिया था. कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ महिला ने हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी. हालांकि, यहां भी राहत नहीं मिली और हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा.

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दो जजों की बेंच ने फैसला देते हुए कहा,

'अगर कोई भी महिला अपनी विशेषज्ञता के आधार पर अच्छी कमाई कर सकने में सक्षम है लेकिन इसके बावजूद सिर्फ पति पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनाने के उद्देश्य से काम नहीं करे, तो ऐसी स्थिति में न्यायालय हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 24 के तहत मेंटनेंस देने से इनकार कर सकता है.' हाई कोर्ट ने यह फैसला 21 अप्रैल को सुनाया.

पति की दलील से कोर्ट ने जताई सहमति

पति की ओर से दलील दी गई थी कि पत्नी पेशे से गायनोकॉलोजिस्ट है और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में वह अच्छी कमाई कर सकती हैं. पति की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी थी कि न्यूरोसर्जन की तुलना में अक्सर गायनोकॉलोजिस्ट की कमाई ज्यादा होती है. हाई कोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी. हालांकि, बच्चों को हर महीने मिलने वाले मेंटनेंस राशि को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा.   

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