महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन बारामती के जिस हवाई पट्टी पर लैंड कर रहा था, वहां फ्लाइट मूवमेंट्स के लिए पर्याप्त सुविधा ही नहीं हैं. बताया जा रहा है कि हवाई पट्टी में केवल एक बेसिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम है, जो कि फ्लाइंग स्कूल ऑपरेट करता है. लेकिन प्लेन की कॉकपिट पर मौसम से जुड़ी जानकारी देने के लिए कोई विशेष कर्मचारी या फिर मौसम वैज्ञानिक नहीं है. न ही एयरस्ट्रिप में कोई नेविगेशनल असिस्टेंस है. यानी पायलट को दिशा और रास्ता बताने वाला वहां कोई नहीं है.
कैसे क्रैश हुआ अजित पवार का प्लेन, लैंडिंग से पहले क्या-क्या हुआ था? एक-एक मिनट की जानकारी
Ajit Pawar Plane crash: बारामती हवाई अड्डे के पास अजित पवार का प्लेन क्रैश होने से पहले क्या-क्या हुआ था, क्यों लैंड नहीं कर पाया विमान? जानिए सब कुछ.


यह हालात तब हैं, जब बारामती हवाई पट्टी में अक्सर VIP और बड़े नेता आते-जाते रहते हैं. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार हवाई पट्टी महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की है. इसे रेड बर्ड फ्लाइंग स्कूल और कार्वर एविएशन को फ्लाइट ट्रेनिंग के लिए लीज पर दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक हवाई पट्टी में ATC, इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी नेविगेशन सुविधा या फिर सिक्योरिटी और फायर ब्रिगेड जैसे बेसिक एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. इसलिए इस हवाई पट्टी को "Uncontrolled Aerodrome" कैटेगिरी में रखा गया है.
खुद की आंखों पर निर्भर रहना पड़ता हैइन हवाई पट्टियों में पायलटों को लैंडिंग या टेक ऑफ के लिए विजुअल अप्रोच यानी खुद जैसा दिख रहा है, उस हिसाब से ऑपरेट करना पड़ता है. बाहर से ऐसी कोई नेविगेशनल मदद नहीं मिलती, जिसमें निश्चित अलाइनमेंट या दिशा बनाए रखने के लिए कॉकपिट के अंदर संकेत दिया जाए. हवाई पट्टी एयरपोर्ट एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) कवरेज क्षेत्र से बाहर है. इसलिए यहां पर ATC सपोर्ट फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूलों के कर्मचारियों द्वारा दिया जाता है. एक ट्रेनी पायलट ने द हिंदू को बताया कि फ्लाइंग स्कूलों के पास केवल बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर है.
यानी बारामती एयरस्ट्रिप में पर्याप्त सुविधाएं और असिस्टेंस न होना एक बड़ी वजह हो सकती है, जिस कारण से अजित पवार का प्लेन क्रैश हो गया. बताया गया है कि हादसा तब हुआ है, जब प्लेन लैंड करने की कोशिश कर रहा था. हादसे के समय विजिबिलिटी काफी कम थी, यानी रनवे ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था. बिना नेविगेशनल मदद के पायलट ने खुद के विजुअल्स के आधार लैंड कराने की कोशिश की. माना जा रहा है कि इसी दौरान कुछ गड़बड़ हुई होगी और विमान क्रैश कर गया. पूरी टाइमलाइन जानते हैं कि 28 जनवरी की सुबह हुआ क्या-क्या, जिस वजह से यह बड़ा हादसा हुआ.
द हिंदू ने बारामती एयरस्ट्रिप का ATC संभालने वाले एक व्यक्ति के हवाले से पूरा घटनाक्रम बताया है, जिसके मुताबिक,
- 28 जनवरी 2026 को सुबह 8 बज के 18 मिनट पर विमान VT-SSK ने पहली बार बारामती ATC से संपर्क किया.
- फिर जब विमान बारामती से 30 nautical miles की दूरी पर था, तब उसे पुणे ATC ने अनुमति दी कि वह अब बारामती ATC से कनेक्ट कर लें. इस दौरान पायलट को अपने विवेक पर जैसा मौसम दिख रहा है, उस आधार पर लैंड करने की सलाह दी गई.
- विमान के क्रू ने हवाओं और विजिबिलिटी के बारे में पूछा, तो उन्हें बताया गया कि हवाएं शांत थीं और विजिबिलिटी लगभग 3000 मीटर थी.
- इसके बाद विमान ने रिपोर्ट किया कि वह बारामती एयरस्ट्रिप रनवे 11 पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रनवे दिखाई नहीं दे रहा था. इसके बाद विमान ने हवाई पट्टी का एक चक्कर लगाया.
- चक्कर लगाने के बाद बारामती ATC से विमान से स्थिति के बारे में पूछा गया, तो क्रू ने बताया कि वह रनवे 11 पर फाइनल अप्रोच कर रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या रनवे दिखाई दे रहा है, तो उन्होंने कहा, नहीं. क्रू ने जवाब दिया कि जैसे ही रनवे दिखाई देगा, कॉल करेंगे. फिर कुछ ही सेकंड बाद विमान के क्रू ने बताया कि उन्हें रनवे दिखाई दे रहा है.
- इसके बाद 8 बज के 43 मिनट पर विमान को रनवे 11 पर लैंड करने की अनुमति दी गई. हालांकि, विमान से लैंडिंग क्लीयरेंस का रीडबैक नहीं दिया गया.
- इसके ठीक एक मिनट बाद 8 बज के 44 मिनट पर रनवे 11 के थ्रेशहोल्ड के आसपास आग की लपटें दिखीं. तुरंत इमरजेंसी सर्विसेज वहां पर पहुंचीं. देखा गया कि विमान क्रैश हो चुका है और उसका मलबा रनवे 11 के थ्रेशहोल्ड के सामने बाईं ओर पड़ा है.
- दुर्घटना के तुरंत बाद एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की एक टीम बारामती के लिए रवाना हो गई. फिलहाल इस हादसे और उसके कारणों की जांच की जा रही है.
- सूत्रों ने चश्मदीदों के बयानों का हवाला देते हुए द हिंदू को बताया कि लैंडिंग के समय विमान कथित तौर पर रनवे के साथ लाइन में आने की कोशिश में बाईं चला गया. इससे यह रनवे के ढलान वाले हिस्से की ओर मुड़ गया, जहां यह मौके पर ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया. बताया।
- दुर्घटना के बाद के विजुअल्स में केवल विमान के टेल का एक हिस्सा और एक पंख दिखाई दे रहा है. बाकी विमान मलबे में बदल गया था.
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विमान में पांच लोग सवार थे और सभी की इस हादसे में जान चली गई. मृतकों में महाराष्ट्र कि डिप्टी सीएम अजित पवार के साथ उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर, दो पायलट और क्रू की एक सदस्य शामिल थीं. दो पायलटों में से पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमित कपूर के पास 15,000 घंटे से ज़्यादा उड़ान का अनुभव था. वहीं फर्स्ट ऑफिसर शाम्भवी पाठक के पास 1,500 घंटे के उड़ान का अनुभव था.
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