जब बच्चे छोटे होते हैं तो मां-बाप का सारा वक्त, सारी दुनिया बच्चों के ही इर्द-गिर्द घूमती रहती है. उन्हीं को जब बुढ़ापे में बच्चो की जरूरत हो और वो मुंह मोड़ लें तो ये किसी धोखे से कम नहीं लगता. ये लाइन फिल्मी लग रही होगी पर आगरा से एक वीडियो आया है, जिसे देखकर ऐसे ही विचार आपके भी मन में आएंगे. ये वीडियो आगरा के रामलाल वृद्धाश्रम का है.
वृद्धाश्रम में IPS अधिकारी के गले लगकर रोई बुजुर्ग मां, फिर बताया बच्चों का सच
आगरा पुलिस के अधिकारियों ने बुजुर्ग महिलाओं से मुलाकात की, उनका हाल जाना और शॉल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किया. ये सब देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए.

मौका मिशन शक्ति अभियान का था. जिसके तहत एसीपी हरिपर्वत, आईपीएस बजरंग कुमार और अन्य पुलिस अधिकारी रामलाल वृद्धाश्रम पहुंचे थे. आगरा पुलिस के अधिकारियों ने बुजुर्ग महिलाओं से मुलाकात की, उनका हाल जाना और शॉल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किया. ये सब देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए. किसी की आंखें भर आईं, तो कोई उनसे लिपटकर रो पड़ा. किसी ने गले लगाकर प्रेम जताया, तो किसी ने अपने दिल में बरसों से दबा दर्द बयान कर दिया.
जिन महिलाओं को शायद अपनों के साथ की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वे पुलिस अधिकारियों में ही अपनापन तलाशती नजर आईं. इसी बीच एक बुजुर्ग महिला ने अपना दर्द बयान करते हुए कहा,
'मेरे बच्चों के पास मेरे लिए दो वक्त की रोटी तक नहीं है... 13 साल से यही सब लोग मेरे बच्चे हैं.'
ये शब्द कहना किसी भी अभिभावक के लिए कितना दुख देनेवाला होगा, इसका अंदाजा लगा सकते हैं. और दर्द सिर्फ इतना नहीं है कि बच्चे साथ नहीं हैं. दर्द शायद इस बात का भी है कि जिन बच्चों को कभी अपनी उंगली पकड़कर चलना सिखाया था, आज बुढ़ापे में उन्हें सहारे के लिए दूसरों की ओर देखना पड़ रहा है. उम्र के इस पड़ाव में बाहर के लोगों में अपनापन तलाश करना पड़ रहा है. वर्दी में पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने इन महिलाओं के चेहरों पर कुछ पल की खुशी जरूर ला दी. लेकिन उनकी आंखों में छलके आंसू उनका दर्द नहीं छिपा पाए.
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