बार-बार उबकाई आना. इसे लोग अक्सर गैस, एसिडिटी, अपच या पेट के इंफेक्शन से जोड़कर देखते हैं. कई बार स्ट्रेस, माइग्रेन या किसी दवा के साइइ इफेक्ट से भी उबकाई आ सकती है. लेकिन अगर किसी को बहुत ज़्यादा उबकाई आए. सुबह-दोपहर-शाम, हर वक्त जी मिचलाए. तो इसका कनेक्शन किडनी की किसी दिक्कत से हो सकता है. कैसे? ये हमें बताया मणिपाल हॉस्पिटल, जयपुर के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में कंसल्टेंट, डॉक्टर वैभव गुप्ता ने.
बार-बार उबकाई आती है? कहीं किडनी में दिक्कत तो नहीं? इस टेस्ट से पता करें
जब किडनियां ठीक से काम नहीं करतीं. तब बार-बार उबकाई आ सकती है. खासकर किडनी फेल या किडनी में सूजन जैसी कंडीशंस में.



डॉक्टर वैभव कहते हैं कि जब किडनियां ठीक से काम नहीं करतीं. तब बार-बार उबकाई आ सकती है. खासकर किडनी फेल या किडनी में सूजन जैसी कंडीशंस में. दरअसल, किडनियां शरीर की छन्नी होती है. ये बिना रुके लगातार खून की सफाई करती हैं. लेकिन जब किडनियां अपना काम ठीक से नहीं कर पातीं, तो गंदगी खून में ही जमा होने लगती है. इसका असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है. नतीजा? आपको बार-बार उबकाई आती है.
किडनियों के सही से काम न करने पर शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस भी बिगड़ जाता है. इलेक्ट्रोलाइट्स एक तरह के मिनरल्स होते हैं. जो शरीर के कई कामों को कंट्रोल करते हैं. लेकिन इनका बैलेंस बिगड़ने से शरीर के काम भी गड़बड़ा जाते हैं. फिर जैसे-जैसे गंदगी शरीर में जमा होती है. वो पेट की परत और दिमाग के उस हिस्से पर असर डालती है. जो उल्टी को कंट्रोल करता है. इसी वजह से किडनी में कोई दिक्कत होने पर बार-बार जी मिचलाता है, और बेचैनी होती है.
कब डॉक्टर के पास जाएं?
अगर नॉर्मल दवा खाने के बाद भी बार-बार उबकाई आए. साथ में, चेहरे, हाथों या पैरों में सूजन हो. पेशाब कम आए. पेशाब में झाग या खून आए. लगातार थकान रहे. भूख कम लगे. मुंह का स्वाद बदल जाए. कमर के निचले हिस्से या साइड में दर्द हो और बुखार आए. सांस लेने में तकलीफ हो. चक्कर आएं. मानसिक भ्रम हो, तो ये किडनी में किसी गंभीर दिक्कत का इशारा है.

कौन-सा टेस्ट करवाएं?
ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और किडनी से जुड़े टेस्ट कराएं. आप सिंपल ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवा सकते हैं. इससे पता चल जाएगा, किडनी में कोई दिक्कत तो नहीं है या खून में गंदगी तो जमा नहीं हो रही.
किडनी की बीमारियों का रिस्क किन्हें ज़्यादा?
किडनी से जुड़ी बीमारियों का रिस्क उन लोगों को ज़्यादा होता है. जिन्हें डायबिटीज़ है. हाई बीपी की शिकायत है. किडनी स्टोन हो चुके हैं. बार-बार इंफेक्शंस होते हैं. या किडनी की बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री है. वहीं, अगर कोई व्यक्ति ओबीस है. बहुत ज़्यादा पेनकिलर्स खाता है. कम पानी पीता है या फिर स्मोकिंग करता है. तो उसे भी किडनी से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए इन बातों का खास ध्यान रखें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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