'मैंने पासपोर्ट भी दिया, सारे कागज दिए, लेकिन फिर भी मेरा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया.' ये कहना है कलकत्ता हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज का. जस्टिस शहीदुल्लाह मुंशी ने बताया कि उनका नाम पश्चिम बंगाल की सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिया गया है. चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद हुई जांच प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया.
कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज शहीदुल्लाह मुंशी वोटर लिस्ट से बाहर, वजह तक पता नहीं
Retired Calcutta HC Judge voter list name: कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज शहीदुल्लाह मुंशी का नाम SIR की वोटर लिस्ट से हट गया है. उनकी पत्नी सहाना मुंशी और बड़े बेटे इफ्तेखार मुंशी का नाम अभी जांच के दायरे में है.


जस्टिस मुंशी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में सात साल तक जज के तौर पर सेवा दी है. इस समय वो राज्य के औकाफ बोर्ड के चेयरमैन हैं. वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाए जाने से परिवार हैरान है. उनकी पत्नी सहाना मुंशी और बड़े बेटे इफ्तेखार मुंशी का नाम भी जांच के दायरे में है, जबकि छोटे बेटे इब्तेहाज मुंशी ने नए वोटर के तौर पर आवेदन किया है.
हाई कोर्ट के पूर्व जज ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा,
"मुझे नहीं पता कि उन्होंने किस आधार पर फैसला लिया और मेरा नाम कैसे हटा दिया. हमें इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया. अगर हमें यह बता दिया जाता कि और दस्तावेजों की जरूरत है, तो हम उन्हें भी जमा कर देते. डॉक्यूमेंट्स की एक लिस्ट थी, उनमें से कोई भी एक दस्तावेज काफी होना चाहिए था."
चेयरमेन ने कहा कि वे अपील दायर करने से पहले अपना नाम हटाए जाने की आधिकारिक वजह का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं तब तक अपील नहीं कर सकता, जब तक मुझे वजह का पता नहीं चलता. अपील किस तरह से की जानी है या उसका फॉर्मेट क्या होगा. इस बारे में अभी तक कुछ भी साफ नहीं किया गया है. इसकी जानकारी मिलते ही मैं अपनी अपील दायर कर दूंगा.”
चुनाव आयोग ने SIR के तहत बंगाल के 60 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए थे. इसके खिलाफ अपील करने और सुनवाई के लिए EC ने राज्य में 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए हैं. जस्टिस मुंशी अब इन ट्रिब्यूनल में अपील करने के इंतजार में हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया ने जस्टिस मुंशी के बेटे इफ्तेखार से इस मसले पर बात की. इफ्तेखार खुद कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील हैं. उन्होंने सवाल किया,
"अगर उन्होंने (पिता) कभी जज के तौर पर सेवा दी है, तो क्या यह सुनना भी सही लगता है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है?"
उन्होंने आगे कहा “किसी व्यक्ति के जज बनने के लिए आपको अपने सभी दस्तावेज जमा करने होते हैं. उनकी जांच होती है, कॉलेजियम आपके नाम को मंजूरी देता है. फिर राष्ट्रपति आपको नियुक्त करते हैं. वह भारतीय संविधान की शपथ लेते हैं. यह हैरानी की बात है कि उनका नाम हटा दिया गया.”
रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मुंशी और उनकी पत्नी के नाम 2002 की SIR लिस्ट में भी थे. पूर्व जज 2000 से कोलकाता में वोट डाल रहे हैं.
शहीदुल्लाह मुंशी का जन्म 29 सितंबर 1958 को हुआ था. वे 2 जून 1986 को वकील के तौर पर एनरोल हुए और 27 साल तक प्रैक्टिस की. 30 अक्टूबर 2013 को कलकत्ता HC की बेंच में एडिशनल जज के तौर पर नियुक्त हुए. फिर 14 मार्च 2016 को परमानेंट जज नियुक्त हुए और 28 सितंबर 2020 को रिटायर हुए.
वीडियो: स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर टोल वसूलने की तैयारी, ईरानी संसद में बिल प्रस्ताव होगा?



















