रात में बढ़िया सोए. फिर जब सुबह सोकर उठे तो गर्दन अकड़ गई. गर्दन न हिलाई जा रही. न घुमाई जा रही. भयंकर दर्द. आप परेशान. समझ नहीं आ रहा, क्या किया जाए. ठंडी सिकाई करें या गर्म. इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि किन वजहों से गर्दन में अकड़न आ जाती है. अगर गर्दन अकड़ी हो तो कौन-सी सिकाई करें, ठंडी या गर्म. गर्दन की अकड़न दूर करने के और क्या तरीके हैं. और गर्दन अकड़े ही न, इसके लिए किन बातों का ध्यान रखें.
गर्दन अकड़े तो 5 मिनट में कैसे पाएं आराम? डॉक्टर से जान लीजिए
किन वजहों से गर्दन में अकड़न आ जाती है. अगर गर्दन अकड़ी हो तो कौन-सी सिकाई करें, ठंडी या गर्म. गर्दन की अकड़न दूर करने के और क्या तरीके हैं. और गर्दन अकड़े ही न, इसके लिए किन बातों का ध्यान रखें.
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गर्दन क्यों अकड़ जाती है?
ये हमें बताया डॉक्टर आनंद जाधव ने.

अगर गर्दन की ट्रेपेज़ियस और स्टर्नोक्लेइडोमास्टॉइड मांसपेशियां अकड़ जाएं, तो दर्द होता है. गर्दन मोड़ने में दिक्कत आती है. इससे रोज़ के काम करना मुश्किल हो जाता है. गर्दन अकड़ने का सबसे आम कारण गलत पोश्चर है. इसके अलावा, टेढ़े बैठकर काम करने. गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने. टेढ़े-मेढ़ा सोने, दो-तीन तकिये लगाकर सोने. दिनभर लैपटॉप पर काम करने. गर्दन झुकाकर लिखने. इन सभी कारणों से गर्दन की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं. ये बहुत ही आम समस्या है. मोबाइल फ़ोन के ज़्यादा इस्तेमाल से गर्दन अकड़ने के मामले बढ़ गए हैं.
वैसे गर्दन अकड़ने की 90% वजह गलत पोश्चर है. लेकिन अगर गर्दन को झटका लगे, जैसे कार में सफर करने के दौरान. तब भी गर्दन अकड़ जाती है. कई बार गिरने से भी गर्दन अकड़ जाती है.
ठंडी या गरम सिकाई, क्या ज़्यादा असरदार?
अगर गर्दन में चोट लगने की वजह से मांसपेशियां अकड़ गई हैं. तब ऐसे में ठंडी सिकाई करनी चाहिए. इसके लिए कोल्ड पैक को तौलिये में लपेटकर दिन में 3-4 बार 20 मिनट के लिए सिकाई करें. इसके बाद मलहम लगाकर मसाज कर सकते हैं. अगर चोट नहीं लगी है और रुटीन कामकाज के दौरान गर्दन अकड़ी है. तब गर्म पानी या गर्म थैले से सेंकने की सलाह दी जाती है. फिर मलहम लगाकर मसाज करना होता है.
गर्दन अकड़ने की एक आम वजह मसल स्पाज़म यानी मांसपेशियों का अचानक सख्त हो जाना है. जब मसल स्पाज़म होता है, तब उस मसल में लैक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है. इस वजह से काफी दर्द होता है. कुछ लोगों को गर्दन अकड़ने के साथ ही हाथों में झुनझुनी हो सकती है. इसलिए सही कारण जानकर ज़रूरी इलाज दिया जाता है.

अकड़न को कैसे दूर करें?
अपना पोश्चर सुधारें. हर कुछ वक्त में अपनी सीट से उठें. सफर के दौरान सीटबेल्ट ज़रूर लगाएं.
जहां तक सिकाई और मसाज की बात है, तो गर्म सेंक करें और मलहम लगाएं. आप गर्म तेल लगाकर मसाज कर सकते हैं. इससे मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दर्द धीरे-धीरे कम होता है. अगर गर्दन की मांसपेशियां बहुत ज़्यादा नहीं अकड़ी हैं. तब गर्दन की एक्सरसाइज़ सिखाई जाती है. दर्द होते हुए भी ये एक्सरसाइज़ करने की सलाह दी जाती है. दिन में 2-3 बार ये एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है. हो सके तो हर घंटे थोड़ा चलें.
गर्दन की मरोड़ से छुटकारा चाहिए, तो बचाव करना ज़रूरी है. अपनी पोज़ीशन बदलते रहें. कम बंद करने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन काम करने का तरीका ज़रूर बदलिए. ज़रूरत पड़े तो आप पेनकिलर्स खा सकते हैं. लेकिन पेनकिलर्स की भूमिका बहुत मामूली है.
जिन लोगों की गर्दन बहुत ज़्यादा अकड़ी होती है. जिनमें फिज़ियोथेरेपी की ज़रूरत लगती है. उन्हें इलेक्ट्रोथेरेपी के लिए भेजा जाता है. जहां मशीन के द्वारा मांसपेशियों को रिलैक्स किया जाता है. फिर कुछ एक्सरसाइज़ भी सिखाई जाती हैं, ताकि मांसपेशियां मज़बूत की जा सकें.
बहुत कम ऐसे मरीज़ मिलते हैं, जिनकी गर्दन में डिस्क बल्ज के कारण अकड़न होती है. अगर ऐसे मरीज़ को 3-4 हफ़्तों में दवा और एक्सरसाइज़ से आराम नहीं मिलता. तब उनका MRI किया जाता है, अगर जांच में मामूली डिस्क बल्ज निकलता है. तब इलाज में कोई बदलाव नहीं किया जाता. ऐसे मरीज़ों को 3-4 हफ़्तों में आराम मिलने लगता है.
जिन मरीज़ों को बिल्कुल आराम नहीं मिलता. हमेशा दर्द रहता है, हाथों में झुनझुनी रहती है. कमज़ोरी रहती है. अगर इनमें ऐसा डिस्क बल्ज है, जो नस को दबा रहा है. तब इनमें स्पाइन सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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