ये है नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही सिद्धार्थ मल्होत्रा की फ़िल्म 'मिशन मजनू' की शुरुआती कुछ लाइंस. ये बात अलग है, अगर जंग हथियारों से नहीं जीती जाती, तो ये फ़िल्म बनाने का कोई तुक नहीं बनता था. ऐसा क्यों? आइए समझाते हैं. वही पुरानी बेसिक-सी स्टोरीलाइन. एक भारतीय एजेंट तारिक पाकिस्तान का नागरिक बनकर वहीं रहता है. उसने पाकिस्तानी लड़की नसरीन से शादी भी कर ली है. उसे एक मिशन अंजाम देना है. मिशन का नाम है 'मिशन मजनू'. इसके तहत उसे पाकिस्तान की न्यूक्लियर फ़ैसिलिटी ढूंढ़नी है, यानी वो जगह जहां पाकिस्तान न्यूक्लियर बम बना रहा है. शुरू में मैं यही कह रहा था; जब हथियार से जंग जीती नहीं जाती, तो पाकिस्तान को हथियार बनाने देते. खैर, जोक्स अपार्ट. फ़िल्म दावा करती है कि ये सच्ची घटनाओं पर आधारित है. हो भी सकता है क्योंकि ये भारत और पाकिस्तान में हो रहे राजनीतिक बदलावों को भी साथ लेकर चलती है. जैसे: इमरजेंसी के बाद कॉंग्रेस की जगह जनसंघ की सरकार का बनना. पाकिस्तान में जनरल जियाउल के द्वारा किया गया तख्तापलट. देखिए वीडियो.
मूवी रिव्यू: मिशन मजनू
एक भारतीय एजेंट तारिक पाकिस्तान का नागरिक बनकर वहीं रहता है.
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