छुटपन में हमारे दो ही शौक थे. लड़कों को पीटना. और अपनी छोटी बहन को रुलाना. उसको रुलाकर हमको 'असीम आनंद' की प्राप्ति होती थी. एक से एक क्रिएटिव आइडिया आते थे उसको परेशान करने के. एक बार हमने उससे कहा,
तुम बहुत सांस लेती हो. सारा दिन सांस ही लेती रहती हो. तुमको पता नहीं है हर इंसान को भगवान ने गिनकर सांसें दी हैं. जैसे गिनकर पैसे मिलते हैं ना. वैसे ही. सारी सांसें ख़त्म हो जाएंगी. तब क्या करोगी?
बच्ची हमारी डर गई. हमने एकदम शरीफ सी शक्ल बना कर कहा. कोई बात नहीं. बस बचा-बचा कर सांस लिया करो. फिर उसकी नाक बंद कर दी. 5 सेकंड के लिए. थोड़ी-थोड़ी देर में हम फिर यही करते.
बहिनिया को हमारी बात पर पूरा भरोसा था. हम आते-जाते उसकी नाक बंद कर देते. वो भी बिलकुल आज्ञाकारी बच्चे की तरह नाक बंद करवा लेती थी. कुछ दिन हमारी ये हरक़त चली. फिर थोड़े दिनों बाद हम भूल गए. दूसरी किसी खुराफात में बिजी हो गए शायद. एक दिन हमने देखा, हमारी बहन खुद अपनी नाक बंद करे बैठी है. क्योंकि उसको
बुढ़ापे के लिए अपनी सांसे बचा कर रखनी थीं. कहीं ख़त्म हो गईं तो? भाईसाब, उसको देखकर जो हंसी आई हमको. इतना गर्व महसूस हुआ खुद पर. लगा कि दुनिया में सबसे स्मार्ट तो हम ही हैं. खैर ये तो हुई हमारी बात. पर्सनल वाला एक्सपीरियंस. लेकिन कुछ चीज़ें ऐसी हैं. जो लगभग हर बड़े भाई-बहन ने अपने छोटे वालों के साथ किया होगा. या बड़े भाई-बहनों की वजह से छोटों को सहनी पड़ी होंगी. और आज भी छोटे भाई बहन उनको समय-समय पर उस टॉर्चर की याद दिलवाते होंगे.
1. नया यूनिफार्म लेने की क्या ज़रूरत है, इसको तो पिंटू का पुराना शर्ट ही आ जाएगा

स्कूल टाइम में जून का आखिरी हफ्ता. बड़े बच्चे के लिए नया यूनिफार्म. नया बैग. नए जूते, मोज़े. नई किताबें. नए कवर. सब कुछ एकदम टिपटॉप. और छोटे वाले के लिए. बड़े का यूनिफार्म, बड़े का पुराना बैग. बड़े के पुराने जूते. पुरानी किताबें. पुरानी वॉटर बोटल. मतलब जो भी है सब बड़े भाई-बहन की 'उतरन'.
2. मैं तेरा दुश्मन, दुश्मन तू मेरा, मैं सगा तू सौतेला
तुम मम्मी-पापा के सगे बच्चे नहीं हो. अडॉप्टेड हो. अरे नहीं. तुमको तो गंदी नाली से उठाकर लाए थे.
छोटे भाई या बहन को कहां से लाया गया था, ये बदल सकता है. सबके अपने अपने वर्जन होते थे. लेकिन एक बात तो तय थी.
वो सगे नहीं हैं. डस्टबीन, हॉस्पिटल, मंदिर की सीढ़ियां, शॉपिंग मॉल, नदी, नाले के किनारे से. जगह कुछ भी हो. छुटके वाले भाई या बहन को यकीन भी हो जाता था कि उसको कहीं से उठा कर लाया गया है. और बस इसी समय बड़े भैया या दीदी का कहना, 'इसीलिए पापा-मम्मी हमको तुमसे ज्यादा प्यार करते हैं'
*बधाई हो आपने उसी वक़्त अपने छोटे भाई या बहन को हमेशा के लिए इन्फीरियोरिटी काम्प्लेक्स में डाल दिया *
3. अरे ओ रामू काका, जूठे बर्तन किचन में रख कर आओ

घर का सारा काम. कूकर की 3 सीटी के बाद गैस बंद करनी हो. 4 मंजिल नीचे जाकर टुल्लू पंप बंद करना हो. फ्रिज में रखने के बोतलें भरनी हो. टीवी बंद करना हो. टीवी फिर से ऑन करना हो. बड़े भाई बहनों के पास पर्सनल
सेवक राम है ना. इसलिए वो तो अपनी जगह से एक इंच नहीं उठेंगे. पूरा टाइम छोटे भाई-बहनों को घर-भर में दौड़ाते रहेंगे. लेकिन इस चक्कर में बेचारे छोटे भाई-बहन की हवा निकल जाती है.
4. छी ये? ये तो कित्ता घिनौना है. तुमको ये पसंद है?

जो हीरो या हीरोइन छोटे भाई-बहन को पसंद होता था. बड़े वाले जानबूझ कर उसकी खूब बुराई करते थे.
'छी. तुमको ये हीरोइन पसंद है? कितनी गन्दी है ये. ये हीरो? यक्क. इससे अच्छा तो महेश पानवाला लगता है.' भले ही वो हीरो या हीरोइन खुद को भी खूब पसंद हो. लेकिन जब छोटे भाई-बहन अपने फेवरेट्स की बुराई सुनकर चिढ़ जाते थी. कसम खुदा की उससे ज्यादा अंदरूनी ख़ुशी और कहीं नहीं मिलती थी.
5. 'चीटिंग करना तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है'

चाहे कैरम खेल रहे हों, ताश या सुपर मारियो. चीटिंग करना तो बड़े भाई-बहन की फितरत में होता है.
मतलब उनसे ये बर्दाश्त ही नहीं हो पाता कि ये बित्ते भर का इंसान उनको हरा सकता है. ईगो पर आ जाती थी. जिसको खेलना सिखाया वही उनको हराएगा. बस इसी वाले ऐटिट्यूड की वजह से चीटिंग करते थे. कैरम बोर्ड पलट देते हैं. ताश के पत्ते उठा कर फेंक देते हैं. राजा, मंत्री, चोर, सिपाही वाली चिट्स फाड़ देते थे. वीडियो गेम हो तो कंप्यूटर रीस्टार्ट कर देते थे. चाहे जो हो जाए. इस छुटकू से तो नहीं ही हारेंगे.
6. अरे ये सूंघ के तो देखो, कित्ती अच्छी खुशबू आ रही है. 'पड़ाsssक'

वो वाला सफ़ेद चूहा देखा है. जो बायोलॉजी की लैब में रहता है. गोल चक्के पर घूमता रहता है. फिल्मों में दिखाते हैं ना. जिसपर साइंटिस्ट लोग भगवान् जाने क्या-क्या एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं. छोटे वाले भाई-बहन वही वाला चूहा होते हैं. जिनके ऊपर बड़े भाई-बहन हर तरह के प्रयोग करते हैं.
कुछ भी सड़ी सी चीज़ सुंघानी हो. कई दिनों पुराना खाना टेस्ट करवाना हो. बाल काटने हों. बड़े भाई-बहन स्कूल में जो भी नई खुराफात सीखकर आते थे. सबसे पहले वो छोटे भाई-बहन पर ही अजमाया जाता थे. और बैकग्राउंड में पागल साइंटिस्ट के हंसने की आवाजें आती थी.
*बुहहहहाहा*
7. तुम्हारे पलंग के नीचे चुड़ैल रहती है

जब भाई छोटा था. डर के मारे बिस्तर में सूसू कर देता था. बहन छोटी थी. अंधेरे में जाने से डरती थी. और उस वक़्त उन लोगों को और डरा कर हम खुद को तुर्रम खां समझ लेते थे. हॉरर फ़िल्में देखते समय पीछे से आवाजें निकालते थे. चद्दर उनके मुंह से हटाकर फिल्म दिखाते थे. और कहते थे,
अंधेरे में, पलंग के नीचे, अलमारी में, खिड़की के बाहर, बाथरूम में, छत पर या पीछे आंगन में. कोई भूतनी, कोई राक्षस, कोई चुड़ैल. तुम्हारा इंतजार कर रही है.
8. पर मम्मी, मेरे दोस्तों के बीच में ये क्या करेगी/करेगा

किसी दोस्त की पार्टी में जाना हो. या कोई दोस्त घर आ रहे हों. और मम्मी कह दे, अरे, इसको भी ले जाओ. छोटू भी घूम आए. बस. ये चीज़ बड़े भइया बड़ी दीदी को बहुत ज्यादा बुरी लगती है.
मेरे दोस्त कितने कूल हैं. उनके बीच में ये एक बित्ता सा जीव. मेरी इज्ज़त ही खराब हो जाएगी. मेरे दोस्त क्या बोलेंगे.
9. तुम लोगों को पता है ये अभी तक बिस्तर में सूसू करता/करती है

ये बड़े वाले भाई-बहन ना जाने कौन सा वीटो लेकर पैदा होते हैं. अपने दोस्तों में छोटे भाई-बहन को लेकर जाना बेइज्ज़ती लगता था. लेकिन छोटे के दोस्तों के बीच उनकी इंसल्ट करने में बड़ी मौज आती थी. पता है, ये अभी भी अंगूठा चूसता है. थोड़ी देर भी मम्मी दूर हो जाए तो रोने लगता है. इसको 'conscious' की स्पेलिंग नहीं आती. 8 का टेबल नहीं आता.
*सो मीन*
10. चोकस्लैम:

ऐसा कोई छोटा भाई नहीं जो बड़के से पिटा ना हो.
चोकस्लैम. बैकब्रेकर. सुपरमैन पंच. हलके फुल्के छोटे भाई को उठा कर जब पटका जाता था ना. ऐसा लगता ही नहीं था कि घर का आंगन या छत है. एकदम WWE वाले रिंग की फीलिंग आती थी. चारों तरफ से शोर सुनाई देता था. किल हिम. किल हिम. लगता था, पूरी दुनिया हमको ही देख रही है.
*एंड आय एम द किंग ऑफ द वर्ल्ड* बड़ी बहनें अक्सर उठाकर पटकती नहीं थीं. लेकिन उनके पास अलग हथियार थे. उनके नाखून. ऐसा नकोट लेती थीं कि चमड़ा निकल आता था. और इन सब मार-पीट, नकोट-खसोट का कारण अगर कभी छोटे वाले पूछ लेते थे. जवाब मिलता था. इससे तुम स्ट्रॉंन्ग बनोगे. बाहर के लोग तुमको ना मार पाएं. इसलिए हम ही तुमको मारकर मज़बूत बना रहे हैं.
*ये हुआ ना लॉजिक* 