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'धुरंधर 2' के जिस सीन में सबसे ज्यादा गालियां पड़ीं, आदित्य धर की ट्रिक ने उसे सेंसर बोर्ड से बचाया

फिल्म में ब्रिगेडियर जहांगीर का कैरेक्टर मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) को भर-भरके गालियां देता है.

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'धुरंधर 2' में वॉयलेंस वाले कई सीन्स को भी CBFC ने ट्रिम कर दिया था.

सेंसर बोर्ड ने पहले Dhurandhar 2 को देखा. फिर बगल में रखी कैंची को. और बस, खचाखच इस फिल्म में 21 कट्स और कई अन्य चेंज करवा दिए. पहले पार्ट की तरह इस बार भी मूवी को A सर्टिफिकेट तो मिला, लेकिन इस दौरान कई गालियां म्यूट करवा दी गईं. पर गौर करने वाली बात ये है कि फिल्म के जिस सीन में सबसे अधिक गालियां हैं, उसका तो बाल-बांका तक नहीं हुआ है. हां-हां, हम उसी सीन की बात कर रहे हैं जहां मेजर इकबाल यानी Arjun Rampal पर उनके पिता ब्रिगेडियर जहांगीर जुबानी 'पुष्प वर्षा' करते हैं. Aditya Dhar की एक ट्रिक ने इस सीन को कट लगने से बचा लिया है.

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मूवी में ब्रिगेडियर जहांगीर का रोल सुविन्दर पाल विकी ने प्ले किया है. इससे पहले वो 'कोहरा' और 'केसरी' जैसी फिल्मों में नज़र आ चुके हैं. 'धुरंधर 2' में वो आर्मी से रिटायरमेंट ले चुके एक ऐसे ब्रिगेडियर बने हैं, जो खुद को मेजर इकबाल का बदकिस्मत बाप बताता है. यकीन मानिए, आदित्य ने उन्हें केवल एक ही नैरेशन दिया था. वो ये कि व्हीलचेयर पर बैठिए और अर्जुन रामपाल को भर-भरके गालियां दीजिए. हुआ भी ठीक ऐसा ही. बाहरी दुनिया में अल्फ़ा बना घूम रहा इकबाल जब घर आता तो जहांगीर उनका कोर्ट मार्शल कर देते. मतलब इतनी गालियां दी हैं उन्होंने, इतनी गालियां कि एक बार को आप भी गिनती भूल जाएं. हमें तो ये भी लगता है कि ब्रिगेडियर जहांगीर ने वॉर में जितनी गोलियां चलाई होंगी, उससे दोगुनी गालियां तो वो इकबाल को एक सांस में दे देते हैं. मगर सोचने वाली बात ये है कि सेंसर बोर्ड ने उनमें से किसी भी गाली को न तो म्यूट किया, न ही बीप.

मिर्ची प्लस से हुई बातचीत में सुविन्दर ने इसकी वजह बताई है. वो कहते हैं कि शुरुआत में उन्हें गालियों पर बहुत झिझक हो रही थी. उन्हें ये भी डर था कि वो एक बार को गालियां दे भी दें, पर यदि सेंसर बोर्ड ने उन्हें म्यूट या बीप कर दिया तो दिक्कत हो जाएगी. पूरा का पूरा सीन बर्बाद हो सकता था. इसलिए उन्होंने आदित्य को अपनी प्रॉब्लम बताई.

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आदित्य ने उनकी दिक्कत तो समझी मगर गालियां कम करने को तैयार नहीं हुए. सुविन्दर बताते हैं,

"आदित्य ने कहा-'पाजी, गालियां ही वो रखी हैं, जिसमें बीप न आए.' आप नोट करना ये चीज कि कहीं किसी भी गाली पर बीप नहीं है. मैंने उन्हें बताया कि उनकी रिसर्च ज़बरदस्त है. इस पर वो बोले-'सर, इतना करियर हो गया है. सेंसर से निकलते हैं सब तो पता लग जाता है कि कहां बीप आना चाहिए, कहां नहीं'."

लेकिन सोचने वाली बात ये है कि आदित्य ने ये ट्रिक उन जगहों पर अप्लाई क्यों नहीं की, जहां गालियां म्यूट कर दी गई हैं. वहां भी ऐसा करके सेंसर बोर्ड से बचा जा सकता था. पर सच बताएं तो 'धुरंधर 2' के केस में सेंसर बोर्ड का काम भी कुछ कम ऊट-पटांग नहीं है. उन्होंने फिल्म को एक तरफ़ A सर्टिफिकेट दिया, दूसरी तरफ़ गालियां उड़ाने लगे. लेकिन उन्होंने गालियां भी छलनी से छानकर उड़ाईं. ऊपरी नज़र से बताएं तो उन्होंने मां-बहन वाली गालियों को म्यूट करके समाज को बचा लिया. लेकिन कई हद से ज्यादा भद्दी गालियों को जस-का-तस रहने दिया. पर ‘धुरंधर 2’ में गालियां हैं ही इतनी कि सेंसर वाले भी शायद इस काट-छांट से ऊंघने लगे. तभी क्लाइमैक्स से पहले की लड़ाई में एकाध जगहों पर मां-बहन वाली गालियां भी ट्रिम नहीं हो पाईं.

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