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कोरोना वायरसः ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी का चीन पर क्या असर होगा?

जानिए क्या देखकर होती है ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा.

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टेड्रॉस WHO के 8वे डायरेक्टर जनरल हैं. (सोर्स - WHO)
WHO यानी World Health Organization.
31 दिसंबर, 2019 को WHO ने नोवेल कोरोना वायरस का पहला केस दर्ज किया था. ये वायरस तब से हज़ारों लोगों तक पहुंच चुका है और सैकड़ों की जान ले चुका है. चीन के वुहान शहर से निकलकर ये वायरस कई देशों में पहुंच चुका है.
30 जनवरी को भारत में इसका पहला केस सामने आया. जब ये वायरस चीन के अलावा दूसरे देशों में फैलना शुरू हुआ, तभी से सबकी नज़र वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन की तरफ थी. और इंटरनैशनल मीडिया रिपोर्ट्स में सुझावनुमा सवाल था कि WHO इसे वर्ल्ड हेल्थ इमरजेंसी कब डिक्लेयर करेगा?
अब पहला केस आने के महीने भर बाद WHO ने वर्ल्ड हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की है. 31 जनवरी, 2020 को WHO के डायरेक्टर-जनरल टेड्रॉस एड्हेनॉम ने इस इमरजेंसी की घोषणा की. इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि वर्ल्ड हेल्थ इमरजेंसी का क्या कॉन्सेप्ट कैसे आया? क्या देखकर ये हेल्थ इमरजेंसी लगाई जाती है? और इमरजेंसी लगने के बाद क्या होता है?

चीन, कोरोनावायरस और इमरजेंसी का संयोग

थोड़ा हिस्ट्री में जाकर देखते हैं. हमेशा से ऐसी बीमारियां फैलती आई हैं, जिनसे कम टाइम में बहुत सारे लोगों की मौत हो जाती है. ऐसे केस में दो चीज़ों की ज़रूरत होती है -
पहली चीज़ है - उस रोग से निबटने के लिए बढ़िया वाली दवाई. आज की डेट में मेडिकल साइंस बहुत आगे निकल चुका है. जिसे हम मॉडर्न मेडिसिन या आधुनिक चिकित्सा कहते हैं, उसकी शुरुआत करीब 200 साल पहले औद्योगिक क्रांति के साथ हुई. इसके बावजूद ऐसा ज़रूरी नहीं है कि हर बीमारी की दवा समय पर तैयार हो. अब तक हमारे पास नोवेल कोरोनावायरस की वैक्सीन नहीं है. ऐसे मौकों पर दूसरी चीज़ काम आती है.
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वायरस का इलाज एंटीवायरल और बचाव है वैक्सीन. (सोर्स - विकिमीडिया)

दूसरी चीज़ है - आपसी सहयोग. सीधा सा हिसाब है- वायरस से होने वाली मौत कम रखनी है, तो इसे फैलने से रोकना होगा. और फैलने से रोकने के लिए आपस में कोऑर्डिनेशन होना चाहिए.
औद्योगिक क्रांति से थोड़ा फास्ट फॉरवर्ड करके देखा जाए तो क्रांति के साथ राष्ट्र-राज्य का कॉन्सेप्ट मज़बूत हुआ. राष्ट्रों ने आपस में लड़ाई (दो विश्व युद्ध) लड़ी. और लड़ाई के बाद सहयोग का सिलसिला शुरू हुआ.
हेल्थ सेक्टर में सहयोग की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद हुई. 1951 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने पहली बार भयंकर बीमारियों से निबटने के लिए इंटरनेशनल फ्रेमवर्क तैयार किया. इस फ्रेमवर्क में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी को लेकर सरकारों के लिए दिशा-निर्देश स्पष्ट किए गए थे.
2005 में इस अग्रीमेंट को रिवाइज़ किया गया. संयोग से इसका कारण भी कोरोना वायरस ही था. और संयोग का स्क्वेयर (दोहरा संयोग) इसलिए कि ये कोरोना वायरस भी चीन से ही फैला था.
2002 से चीन से निकला SARS कोरोना 26 देशों तक फैला था. (सोर्स - विकिमीडिया)
2002 से चीन से निकला SARS कोरोना 26 देशों तक फैला था. (सोर्स - विकिमीडिया)

2002-03 में चीन से SARS कोरोनावायरस फैला था. इसे देखते हुए WHO ने नए सिरे से काम शुरू किया. और 2005 में IHR यानी इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन्स सामने आया. इसी IHR में PHEIC को डिफाइन किया गया है. PHEIC मतलब Public Health Emergency of International Concern. आम भाषा में ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी.

क्या देखकर लगती है इमरजेंसी?

IHR (2005) में ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी को डिफाइन करते हुए लिखा गया है -
एक असाधारण घटना, जिसकी पहचान ऐसे होगी-
1. जिससे दूसरे देशों में जनता को स्वास्थ्य का खतरा हो यानी बीमारी की पहुंच अंतरराष्ट्रीय हो.
2. जिसे रोकने के लिए इंटरनेशनल कोऑर्डिनेशन ( अंतरराष्ट्रीय समन्वय) की ज़रूरत हो.
दरअलस जब कोई बीमारी एक देश से दूसरे देशों में फैलनी शुरू होती है, तभी से इसे मॉनीटरिंग शुरू हो जाती है. WHO के डायरेक्टर-जनरल एक इमरजेंसी कमिटी की बैठक बुलाते हैं. इस कमिटी में एक्सपर्ट्स होते हैं. जैसे कि पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और वायरस की पढ़ाई करने वाले एक्सपर्ट्स. इस कमिटी में उस देश का एक सदस्य ज़रूर होता है, जिस देश से ये बीमारी फैलती है.
चीन में बहुत फुर्ती में अस्पतालों का निर्माण किया जा रहा है. (सोर्स - रॉयटर्स)
चीन में बहुत फुर्ती में अस्पतालों का निर्माण किया जा रहा है. (सोर्स - रॉयटर्स)

इमरजेंसी कमिटी डायरेक्टर-जनरल को सुझाव देती है कि इस इवेंट को इमरजेंसी घोषित किया जाना चाहिए या नहीं. घटना की गंभीरता को देखते हुए PHEIC की घोषणा करने की ज़िम्मेदारी WHO के डायरेक्टर-जनरल की ही होती है.
लेकिन इमरजेंसी लगने का मतलब क्या होता है?

इमरजेंसी के मायने

इमरजेंसी लगने का मतलब होता है कि बीमारी को रोकने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने होंगे. उन देशों के लिए दिशा-निर्देश तय किये जाते हैं जहां ये बीमारी फैल रही होती है. खासकर उस देश के लिए जहां से वो फैलनी शुरू हुई हो (इस केस में चीन).
ये दिशा-निर्देश किस टाइप के होते हैं? ये दिशा-निर्देश उन देशों स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त करने के संबंध में होते हैं, जहां उस बीमारी का असर है. इसमें इंटरनेशनल ट्रैवल को भी सीमित किया जाता है. इस इमरजेंसी को खत्म भी कमिटी के सुझाव पर ही किया जाता है.
ये नक्शा नोवेल कोरोनावायरस का विस्तार और खतरे का लेवल दिखा रहा है. (सोर्स - विकिमीडिया)
ये नक्शा नोवेल कोरोनावायरस का विस्तार और खतरे का लेवल दिखा रहा है. (सोर्स - विकिमीडिया)

हेल्थ इमरजेंसी के दिशा-निर्देश अस्थायी ही सही, लेकिन बीमारी वाले देश के लिए पाबंदियां लेकर आते हैं. जो देश बीमारी की चपेट में होता है, वहां का अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित होता है. लेकिन WHO की कोशिश होती है कि ये सारी चीज़ें बिना वजह के प्रभावित न हों. इसलिए WHO के डायरेक्टर-जनरल टेड्रेस एड्हेनॉम ने इसकी घोषणा करते हुए कहा -
इस घोषणा के पीछे मुख्य कारण चीन की घटनाएं नहीं बल्की चीन के बाहर की घटनाएं हैं.
टेड्रेस ने आगे कहा -
मैं ये स्पष्ट कह देता हूं कि ये घोषणा चीन के खिलाफ कोई नो कॉन्फिडेंस वोट नहीं है.
दरअलस होता क्या है कि ऐसी बीमारियों से चीन जैसे समृद्ध और शक्तिशाली देश तो लड़ सकते हैं, लेकिन कम आय वाले देशों के लिए ये बहुत मुश्किल काम है. इसलिए इस तरह के बैन लगाए जाते हैं ताकि छोटे और गरीब देशों को ऐसी बीमारियों की महामारी से बचाया जा सके.


वीडियो - जानिए कोरोनावायरस के बारे में सबकुछ, जो चीन के बाद भारत में भी आ सकता है

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