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जब एनडी तिवारी ने कहा, 'मेरा हनीमून तो आप ही के साथ मन रहा है'

दिग्गज कांग्रेसी नेता की ज़िंदगी से कुछ किस्से.

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फोटो - thelallantop
नारायण दत्त तिवारी. प्यार से लोग इन्हें एनडी तिवारी बुलाते हैं. चार बार उत्तर प्रदेश के और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे. तब उत्तराखंड को उत्तरांचल कहा जाता था. उस नए नवेले प्रदेश के पहले सीएम. कांग्रेस में इनका एक ज़माने में वो कद था कि नरसिम्हा राव यूपी की किसी सभा में इन्हें लिए बिना नहीं जाते थे. हर नेता अपने इलाके में इनकी एक सभा ज़रूर चाहता था. केंद्र में भी मंत्री रहे. पर वो ऐसा दौर था जो बीत गया. तिवारी ने 18 जनवरी को ऐलान किया कि उनका समर्थन अब से भाजपा को रहेगा. इनका बेटा रोहित शेखर भाजपा में शामिल हो गया. साफ है कि 90 बरस की सयानी उम्र में भाजपा की राह चले एनडी तिवारी अपने बेटे रोहित के करियर की खातिर ही ऐसा कर रहे हैं. यहां वो अपने बेटे के लिए पिच तैयार कर रहे हैं. जिससे सारी गेंदें सीधे बल्ले पर ही आयें. ये रोहित वही रोहित हैं जो कुछ वक्त पहले तक इनके 'एस्ट्रेंज्ड सन' थे. तिवारी की लाइफ का ये चैप्टर अनोखा है और आसानी से भुलाया नहीं जा सकेगा. भारत देश की आज़ादी के साथ साथ एक घटना और घटी थी. एनडी तिवारी का राजनितिक करियर शुरू हुआ था. सन 47 में ही तिवारी जी इलाहबाद यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष बन गए थे. वही इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जहां कन्नलगंज से दौड़ते-दौड़ते रणविजय सिंह घुस पड़ा था और जिसकी सीढ़ियों पर उसने अपना बम बनाकर नाटे के कान पर दे मारा था. पढ़ते हैं, एनडी तिवारी के जीवन से जुड़े कुछ किस्से:

1. 'आप मेरे नाजायज़ बाप हैं'

nd-tiwari_660_073112024956 जीवन भर तिवारी जी ने तमाम अड़चनें पार कीं. बहुत उतार चढ़ाव देखे. लेकिन वो नहीं देखा न झेला जो उन्हें 2008 में झेलने को मिला. उन्हें इल्म भी नहीं था कि सामने क्या होने वाला है. रोहित नाम के एक शख्स ने मीडिया के सामने ऐलान कर दिया कि एनडी तिवारी उनके 'नाजायज़ बाप' हैं. साथ में तिवारी पर दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा ठोक दिया. उसकी चाहत थी कि उसे कानूनन बेटे का दर्जा मिले. मीडिया में हल्ला मच गया. तिवारी नहीं माने तो रोहित ने कहा कि DNA टेस्ट करवा लें, सब साफ हो जाएगा. तिवारी ने सैम्पल देने से मना कर दिया. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक गए. लेकिन सैम्पल देना पड़ा. छह साल तक कोर्ट-कचहरी के बाद जाकर 2014 तिवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कबूल कर लिया कि रोहित उन्हीं के बेटे हैं. साथ में रोहित की मां उज्जवला शर्मा से भी अपने संबंध कबूले. कोर्ट का फैसला तब तक नहीं आया था. ND Tiwari

2. 'मेरा हनीमून तो आप ही के साथ मन रहा है'

15 मई 2014 को जब भाजपाइयों के यहां लड्डू बन रहे थे और सारे कांग्रेस के नेता किसी अनहोनी की आशंका में मारे-मारे फिर रहे थे, तब एक सीनियर कांग्रेसी बहुत खुश था - एनडी तिवारी. इस दिन तिवारी ने रोहित की मां से शादी की थी. उमर थी 88 साल. इनसे जब मीडिया ने पूछा कि हनीमून कहां मनाएंगे तो तपाक से कह दिया कि 'मेरा हनीमून तो आप ही के साथ मन रहा है.' https://www.youtube.com/watch?v=GQhH53qtZow   इस से पहले तिवारी ने 1954 में डॉ. सुशीला सानवाल से शादी की थी. 2001 में उनका  देहांत हो गया था. इनके नाम पर नैनीताल के हल्द्वानी में डॉक्टर सुशीला तिवारी मेमोरियल अस्पताल खुला है.

3. 'गाड़ी ऐसे कैसे चलेगी?'

ये गजब प्रकार का इग्ज़ाम्पल था. एकदम जीवंत. 1993 में उत्तर प्रदेश के गोंडा में एक सभा करते हुए तिवारी ने अचानक पब्लिक से पूछ लिया कि यहां कोई मिस्त्री (मैकेनिक) है? एक आदमी मंच से पर आया. तिवारी ने उस से पूछा कि भाई बताओ क्या ऐसी कोई गाड़ी बन सकती है, जिसमें एक पहिया ट्रैक्टर का हो, एक साइकिल का, एक बैलगाड़ी का और एक स्कूटर का मिस्त्री कोई जवाब नहीं दे पाया. तब तिवारी ने कहा कि जैसे इन पहियों से कोई गाड़ी नहीं बन सकती, वैसे ही अलग-अलग पार्टियों से बनी कोई सरकार नहीं टिक सकती. तिवारी का ज़ोर इस बात पर था कि उनकी पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें मिलें.  

4. पीएम नहीं बन पाए तो गुस्सा हो गए

ND Tiwari जिस पार्टी में रहते हुए एनडी तिवारी 3 बार सीएम रहे, उसी कांग्रेस को उन्होंने 1994 में छोड़ दिया था. ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) नाम से नई पार्टी बना ली. कहते हैं कि पीएम नहीं बनाए जाने से नाराज़ थे. लेकिन दो साल बाद वापस हो लिए. आना-जाना काम नहीं आया. पीएम नहीं ही बन पाए.

5. 'आजकल तो ट्रक भी लाल-बत्ती लगा लेते हैं...'

उत्तराखंड (तब का उत्तरांचल) जब नया राज्य बना तो एनडी तिवारी उसके पहले मुख्यमंत्री बने. कहते हैं उनके राज में जिसका जी चाहता था, गाड़ी पर लाल बत्ती लगा के घूमता था. कई को तिवारी से करीबी के चलते लाल-बत्ती मिली थी. इल्ज़ाम था कि उन्होंने लाल-बत्ती बांटों अभियान चला रखा है. इस बारे में पूछा गया तो बात शुरु ही यहां से की कि 'आजकल तो ट्रक भी लाल-बत्ती लगा लेते हैं... पर हमने परमीशन नहीं दी है.'

6. कांग्रेस में रहते हुए सपा प्रेम

2012 में तिवारी ने कांग्रेस को फिर से शॉक दे दिया था जब आउट ऑफ द ब्लू उनका बयान आया कि मैं पुराना समाजवादी हूं. मज़े की बात ये है कि इसके 5 साल बाद सिद्धू ने भाजपा को लात मारते हुए कहा कि वो पैदाइशी कांग्रेसी हैं. खैर, तिवारी जी ने ये कहने के साथ मुलायम सिंह को सलाह दे दी कि अखिलेश को प्रदेश की बागडोर सौंप दें और केंद्र की राजनीति में ध्यान लगाएं. राहुल गांधी के पीएम बनने के बारे बोल गए कि भविष्य की बात है. फिर दिग्विजय सिंह ने आकर बात संभाली. दिग्विजय ने कहा कि तिवारी वरिष्ठ नेता हैं, सीख किसी को भी दे सकते हैं. 8 जनवरी 2017 को उन्होंने मुलायम सिंह को बाकायदा अपने लेटरहेड पर चिठ्ठी लिखी कि परिवार मे कलह ठीक नहीं. अखिलेश को पूरे हृदय से आशीर्वाद दे दें. यही सबके हित में है. पिक्चर: NewsNationTV

7.  85 साल की उमर में सेक्स स्कैंडल

nd-tiwari_660_070113083023 2009 के दिसंबर में एनडी तिवारी आंध्रप्रदेश के राज्यपाल थे. इसी दौरान एक तेलुगु न्यूज़ चैनल ने एक घंटे लंबा विडियो चला दिया. मेन रोल तिवारी जी का ही था. ये तथाकथित 'फैक्ट' है. इसमें तथाकथित 'वो' 3 महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नज़र आ रहे थे. तब तिवारी 85 साल के थे. और ये तथाकथित उमर नहीं है. असल थी. चैनल पर उत्तराखंड से राधिका नाम की एक महिला ने ये दावा भी किया था कि तिवारी उसे आंध्रप्रदेश में लोहे की एक खदान का लाइसेंस दिलवाने वाले थे. उन्होंने वादा पूरा नहीं किया इसलिए उसने सेक्स स्कैंडल वाली बात का खुलासा किया है. इसके बाद हैदराबाद में गवर्नर हाउस के बाहर महिला संगठनों ने प्रदर्शन कर के मांग की कि तिवारी गवर्नर पद से इस्तीफा दें. तिवारी कुछ समय गवर्नर बने रहने की ज़िद पर अड़े रहे लेकिन फिर कांग्रेस आलाकमान के दबाव में इस्तीफा दे दिया. एनडी तिवारी के बारे में कह सकते हैं कि वे बाबा आदम के ज़माने से राजनीति में हैं. हर रंग देखा है. आज़ादी के पहले अंग्रज़ों के खिलाफ पर्चे लिखे तो जेल भेजे गए. 1944 में इलाहाबाद युनिवर्सिटी की स्टूडेंट यूनियन के प्रेज़िडेंट बन गए. 1952 से चुनाव जीत रहे हैं. उस वक्त प्रजा समाजवादी पार्टी में थे. इसे मुलायम सिंह यादव की उस समाजवादी पार्टी से कंफ्यूज़ न करें जिसकी साइकिल की चेन रह-रह कर उतर जाती है. तिवारी 1963 से कांग्रेस में थे. अब भाजपा की ओर हो गए है. भाजपा लाज़मी तौर पर खुश है. और आखिर में जिनको ये शुबहा है, कि 90 साल के तिवारी 'पार्टी विद अ डिफ्रेंस' को क्या देंगे, उनके लिए तिवारी की असीम एनर्जी का नमूना पेश ए नज़र है:   https://www.youtube.com/watch?v=KLPX_bnoleU
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