कुछ कहानियां आपने पढ़ी ही पढ़ी होंगी, बचपने में, या सुनी होंगी. लेकिन क्या हमारी पढ़ी-सुनी कहानियां ईमानदार होती हैं? कहानियों में अंत में सब अच्छा हो ही जाता है. अंत अच्छा न हुआ तो शुरुआत बड़ी अजीब सी होती है. लेकिन दोनों मामलों में एक बात तय मानिए कि कुछ असल नहीं रहता था. असल माने वैसा जैसा हमारी आपकी जिंदगियों में होता है. कुछ कहानियों को फिर से पढने का वक़्त है. पुरानी कहानियों को. पढ़िए.