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वेब सीरीज़ रिव्यू- डांसिंग ऑन द ग्रेव

बेहद सेंसेशनल मसले पर बात करने वाली ये डॉक्यूमेंट्री, इस मामले की सनसनी को कैश करने की कोशिश करती है. और काफी हद तक सफल भी हो जाती है.

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'डांसिंग ऑन द ग्रेव' के सीन में मुरली मनोहर उर्फ स्वामी श्रद्धानंद.

Dancing On The Grave नाम की नई डॉक्यू-सीरीज़ अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई है. इंडिया टुडे (ओरिजिनल्स) की ये डॉक्यूमेंट्री 1991 में हुए Shakereh मर्डर केस पर बेस्ड है. आरोपी था मुरली मनोहर शर्मा उर्फ स्वामी श्रद्धानंद. हुआ ये था कि 28 मई, 1991 को इस आदमी ने अपनी पत्नी शाकिरे निज़ामी को उनके ही घर में ज़िंदा गाड़ दिया. अगले तीन सालों तक पुलिस शाकिरे की गुमशुदगी का कोई सुराग नहीं ढूंढ पाई. फाइनली श्रद्धानंद ही पुलिस को उस जगह पर ले गया, जहां उसने शाकिरे को गाड़ा था.

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'डांसिंग ऑन द ग्रेव' जिस मामले पर बेस्ड है, वो अपने आप में बहुत भयावह है. कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस माना और 2005 में इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा-

''The deceased trusted, loved and married the accused, He misused her confidence. He buried her alive.”

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यानी जिस महिला की हत्या हुई, उसने आरोपी पर भरोसा किया. उसे प्यार किया. उससे शादी की. मगर आरोपी ने भरोसे का दुरुपयोग किया. उसने उस महिला को ज़िंदा दफना दिया.

शाकिरे खलीली मर्डर केस दो तरीके से इंडिया के लिए लैंडमार्क केस है. ये वो पहला मौका था, तब किसी पुलिस प्रोसीडिंग को कैमरे पर रिकॉर्ड किया गया. जब शाकिरे की बॉडी ज़मीन से खोदकर निकाली जाती है, वो पूरा प्रोसेस कैमरे पर रिकॉर्ड किया गया था. मगर जब बॉडी बाहर निकली, तो उसमें कंकाल और बालों के अलावा ज़्यादा कुछ बचा नहीं था. उस बॉडी की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट किया गया. 

'डांसिंग ऑन द ग्रेव' में कहीं भी श्रद्धानंद ये स्वीकार नहीं करता कि उसने शाकिरे की हत्या की है. उसका कहना है कि शाकिरे की डेथ पहले ही हो चुकी थी. उसने आगे जो भी किया, वो डर और घबराहट के मारे किया. क्योंकि उसका दिमाग नहीं चल रहा था. आप इस डॉक्यूमेंट्री में जब उसका इंटरव्यू देखेंगे, तो आपको लगेगा नहीं कि इस आदमी ने ऐसा कुछ किया होगा. और वो दर्शकों को भी यही यकीन दिलाने की कोशिश करता है. क्योंकि एक पल को भी आपको नहीं लगता कि उसने जो कुछ भी किया, उसका उसे गिल्ट है. बल्कि वो उन घटनाओं पर बात करता है.  

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शाकिरे खलीली की फोटो.

डॉक्यूमेंट्री में एक सीन है, जिसमें श्रद्धानंद कहता है वो तीस साल से जेल में है. रोज मर रहा है. इससे अच्छा तो उसे भी डब्बे में बंद करके गाड़ दिया जाता. ऐसा कहने के दौरान उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं दिखता. एक मौके पर तो वो शाकिरा का मज़ाक उड़ाता है. इंटरव्यू खत्म होने के बाद वो जेल कंपाउंड में टहल रहा है. वहां एक बिल्ली आती है, वो उससे पूछता है-

'कितने शिकार किए?'

उसके साथ खेलने के बाद वो हंसते हुए कहता है,

'कहीं ये शाकिरे की आत्मा तो नहीं है!'        

जो कि उस वक्त सुनने में बहुत डरावना और गुस्सा दिलाने वाला लगता है. अगर आप साइकोलॉजिकल लेवल पर देखें, तो ये सीन आपको उस आदमी के बारे में बताता है. ये एक क्रूर आदमी की छवि बनाता है. आप शाकिरे की हत्या की पूरी कहानी यहां देख सकते हैं-

किसी डॉक्यूमेंट्री में एस्थेटिक्स बड़ी ज़रूरी चीज़ होती है. लाइटिंग, कैमरा एंगल या साउंड किसी भी घटना के व्यापक माहौल में एक किस्म का प्रभाव पैदा करता है. उससे दर्शक को ये समझ आता है कि डायरेक्टर इस कहानी/घटना को किस तरह से दिखाना चाहता है. जब श्रद्धानंद शाकिरे के घर में घुसता है, तब एडिटिंग के लेवल पर एक अलग फील पैदा किया जाता है. उसमें दो चीज़ें एक साथ होती हैं. एक तो रेगुलैरिटी यानी नियमितता स्थापित होती है. दूसरी, किसी हॉरर शो देखने जैसी फीलिंग आती है. इस डॉक्यू-सीरीज़ को पैट्रिक ग्राहम ने डायरेक्ट किया है. इससे पहले वो नेटफ्लिक्स के लिए 'घोउल', 'बेताल' जैसी सीरीज़ डायरेक्ट कर चुके हैं. 'लीला' से वो राइटर के तौर पर जुड़े रह चुके हैं.  

‘डांसिंग ऑन द ग्रेव’ के एक सीन में मुरली मनोहर मिश्रा उर्फ स्वामी श्रद्धानंद.

'डांसिंग ऑन द ग्रेव' बेहद सेंसेशनल मसले पर बात करने वाली डॉक्यूमेंट्री है. जो इस मामले की सनसनी को कैश करने की कोशिश करती है. और काफी हद तक सफल भी हो जाती है. अगर आप इस रोंगटे खड़े करने वाली घटना को डिटेल में समझना चाहते हैं, तो इस सीरीज़ को देख सकते हैं. 

'डांसिंग ऑन द ग्रेव' में कुल चार एपिसोड्स हैं, जिन्हें अमेज़न प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जा सकता है. 

वीडियो: कैसी है नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'इंडियन प्रेडेटर : द डायरी ऑफ अ सीरियल किलर'?

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