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'संदेसे आते हैं' लिखने वाले जावेद अख्तर ने 'बॉर्डर 2' के गाने लिखने से मना क्यों कर दिया?

ओरिजिनल 'बॉर्डर' के 'संदेसे आते हैं' और 'जाते हुए लम्हों' गानों को जावेद अख्तर ने ही लिखा था. मगर इसके सीक्वल से उन्होंने कन्नी काट ली है.

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'बॉर्डर 2' 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो जाएगी.

Border के Sandese Aate Hain गाने के लिरिक्स Javed Akhtar ने लिखे थे. Border 2 में इस गाने को Ghar Kab Aaoge नाम से रीक्रिएट किया गया है. इसमें कुछ नई लाइनें भी जोड़ी गई हैं, जो Manoj Muntashir ने लिखा है. हालांकि गाने के ओरिजिनल लिरिक्स का क्रेडिट जावेद अख्तर को ही दिया गया. हालिया इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने बताया कि उन्हें ‘बॉर्डर 2’ के गाने लिखने के लिए अप्रोच किया गया था. मगर उन्होंने ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया.

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इंडिया टुडे से हुई बातचीत में जावेद अख्तर ने बताया कि टी-सीरीज़ ने उन्हें 'बॉर्डर 2' के गानों के लिए अप्रोच किया था. इनमें 'घर कब आओगे' और 'जाते हुए लम्हों' जैसे गाने शामिल थे. जो कि ओरिजिनली जावेद ने ही लिखे थे. फिर भी उन्होंने 'बॉर्डर 2' में ऐसा करने से मना कर दिया. क्योंकि वो पुराने और चर्चित गानों में नए लिरिक्स जोड़ने को एक तरह का रचनात्मक दिवालियापन मानते हैं.

जावेद अख्तर इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं,

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"उन्होंने (टी-सीरीज़) मुझसे बॉर्डर 2 के लिए गाना लिखने को कहा था. लेकिन मैंने मना कर दिया. मुझे लगता है कि ये एक तरह का रचनात्मक दिवालियापन है. आपके पास एक पुराना गाना है, जो पहले बहुत हिट हुआ था. अब आप उसमें थोड़ा-सा कुछ जोड़कर, उसे दोबारा निकालना चाहते हैं. या तो नए गाने बनाओ, या फिर मान लो कि अब तुम उस लेवल का काम नहीं कर पाते."

उन्होंने आगे कहा,

"जो बीत गया, उसे बीतने दो. उसे दोबारा बनाने की क्या ज़रूरत है? हमारे सामने भी एक पुरानी फिल्म हकीकत थी, जो साल 1964 में आई थी. उसके गाने कोई मामूली नहीं थे. जैसे कर चले हम फ़िदा या मैं ये सोचकर उसके दर से उठा. वाह! कितने शानदार गाने थे. लेकिन हमने उन गानों को इस्तेमाल ही नहीं किया. हमने बिल्कुल नए गाने लिखे. पूरी तरह अलग गाने बनाए और लोगों को वो भी बहुत पसंद आए. अब आप नई फिल्म बना रहे हो, तो नए गाने बनाओ ना. पुराने पर क्यों टिके बैठे हो! आपने खुद मान लिया कि हम वैसा नहीं कर पाएंगे, तो बस पुरानी शान के साथ जीते रहो."

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'हकीकत' फिल्म के गाने मदन मोहन ने बनाए थे. बाद में उनकी कुछ अधूरी धुनों का इस्तेमाल यश चोपड़ा की फिल्म 'वीर-ज़ारा' में किया गया था. जब आप इस फिल्म का 'मैं यहां हूं' गाना सुनेंगे, तो उसकी शुरुआत मदन मोहन के कम्पोजिशन से ही होती है.

'वीर-ज़ारा' में गानों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे थे. वहीं 'हकीकत' के गानों को मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी ने लिखा था. इत्तेफ़ाकन कैफ़ी आज़मी, शबाना आज़मी के पिता हैं. जो कि जावेद अख्तर की पत्नी भी हैं. जिन दो गानों, 'कर चले हम फ़िदा' और 'मैं ये सोचकर उसके दर से उठा', का ज़िक्र अख्तर ने किया था, उन दोनों को मोहम्मद रफ़ी ने गाया था.

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