टिनू मशहूर फिल्म राइटर इंदर राज आनंद के बेटे थे. इंदर साहब ने राज कपूर के लिए अनाड़ी और संगम समेत 4 फिल्में लिखीं. इसके अलावा वो छोटी-बड़ी पचासों फिल्मों के राइटर रह चुके थे. इंडस्ट्री में उनकी साख थी. बड़े लोगों के साथ उठना-बैठना था. मगर उन्हें ये भी पता था कि फिल्म इंडस्ट्री बड़ी रिस्की जगह है. यहां एक शुक्रवार सारे इक्वेशन बदल देता है. इसलिए वो नहीं चाहते थे कि उनके बेटे फिल्मों में आए.

फिल्म इंडस्ट्री से दूर रखने के लिए उन्होंने अपने बेटों टिनू और बिट्टू का एडमिशन अजमेर के मेयो कॉलेज में करवा दिया. ये सिर्फ लड़कों के लिए बना बोर्डिंग स्कूल था. जब स्कूल से लौटने के बाद टिनू ने अपने पिता को बताया कि वो फिल्ममेकर बनना चाहते हैं, तो इंदर साहब का पारा चढ़ गया. मगर थोड़े ही दिनों में उन्हें ये समझ आ गया कि ये लड़का फिल्मों के अलावा कुछ और नहीं करेगा. थक हारकर उन्हें टिनू की बात माननी पड़ी.
1. टिनू आनंद को तीन फिल्मी दिग्गजों के साथ करियर शुरू करने का मौका मिला था जब टिनू पूरी तरह से फिल्मों में जाने का मन बना चुके थे, तो पापा ने कुछ लोगों को फोन लगाए. उन्होंने फिल्ममेकिंग सीखने के लिए टिनू को तीन दिग्गजों के पास जाने को कहा. ये तीन लोग थे-
1) राज कपूर 2) सत्यजीत रे और 3) मशहूर इटैलियन फिल्ममेकर फेड्रिको फेलिनी.
राज कपूर के पास जाने का कोई फायदा नहीं था. क्योंकि आनंद और कपूर परिवार के काफी गाढ़े संबंध थे. ऐसे में फिल्म सेट पर जाकर काम सीखने की बजाय खिलवाड़ करना ठीक ऑप्शन नहीं था. टिनू ने फेड्रिको फेलिनी के यहां जाना चुना. वो खुश थे कि फिल्म ट्रेनिंग के साथ-साथ उन्हें इटली घूमने का भी मौका मिलेगा. मगर फेलिनी की ये शर्त थी कि अगर टिनू इटली आते हैं, तो उन्हें इटैलियन लैंग्वेज सीखकर आना होगा. इसमें 6 महीने का समय लगना था. इसलिए ये वाला ऑप्शन भी ड्रॉप हो गया. अब बचे सत्यजीत रे, जो कि इंदर राज आनंद के अच्छे दोस्त थे.

अपने करियर के शुरुआती दिनों में टिनू आनंद.
इंदर साहब ने सत्यजीत रे को एक चिट्ठी लिखी. इसमें उन्होंने रे से गुज़ारिश की कि उनके बेटे को अपनी छत्र-छाया में फिल्ममेकिंग की ट्रेनिंग दें. एक महीने बाद रे का जवाब आया. वो टिनू को अपने साथ रखकर फिल्ममेकिंग सीखाने के लिए तैयार थे.
2. वो एक्टर जिसने अमिताभ को अपना रोल देकर फिल्मों में लॉन्च किया जब तक सत्यजीत रे की चिट्ठी का जवाब आता, उतने समय में टिनू आनंद ने एक फिल्म साइन कर ली थी. फिल्ममेकर K.A. Abbas टिनू के पिता के दोस्त थे. टिनू स्कूल की छुट्टियों में जब भी अजमेर से बम्बई आते, अब्बास साहब के यहां पहुंच जाते फिल्म में रोल मांगने. टिनू उनकी फिल्मों में पासिंग शॉट्स में भी दिखने को तैयार थे. मगर इस बार K.A. Abbas ने टिनू को अपनी फिल्म में लीड रोल दे दिया था. ये फिल्म थी- सात हिंदुस्तानी. इसमें टिनू का रोल एक कवि का था.
टिनू की कास्टिंग के बाद अब्बास साहब फिल्म की हीरोइन ढूंढ रहे थे. उन दिनों टिनू की एक दोस्त दिल्ली से आई हुई थीं. नीना नाम था उनका. अब्बास ने उन्हें टिनू के घर पर देखा और पूछवा लिया कि वो एक्टिंग में दिलचस्पी रखती हैं. नीना फिल्म में काम करने को तैयार हो गईं. एक दिन नीना ने टिनू को अपने एक दोस्त की फोटो दी. नीना ने बताया कि ये लड़का कलकत्ता में रहता है और एक्टिंग करना चाहता है. अब्बास साहब से पूछकर देखो इसका कुछ हो सकता है क्या!

जो तस्वीर नीना ने टिनू को दी थी, उसमें अमिताभ विक्टोरिया मेमोरियल के सामने खड़े नज़र आ रहे थे. उस तस्वीर की डेस्क्रिप्शन के सबसे करीब हमें अमिताभ की यही फोटो लगी.
टिनू अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि उन्होंने जब वो फोटो देखी, उसमें उन्हें एक लंबा सा लड़का नज़र. जो विक्टोरिया मेमोरियल के बाहर खड़ा था. टिनू ने वो फोटो K.A. Abbas साहब को दिखाई. अब्बास साहब की एक शर्त थी. शर्त ये कि फोटो में दिख रहे इस लड़के को अगर एक्टिंग करनी है, तो ऑडिशन के लिए अपने खर्चे पर कलकत्ता से बम्बई आना होगा. अब्बास ने ये भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि ऑडिशन कब तक हो पाएगा. इसलिए जब तक ऑडिशन नहीं हो जाता, तब तक उस भावी एक्टर को अपने खर्चे पर बम्बई में ठहरकर इंतज़ार करना होगा. जिस लंबे लड़के की बात हो रही है,उसका नाम था अमिताभ बच्चन. अमिताभ को K.A. Abbas की ये सारी शर्तें मंज़ूर थीं. वो अगले कुछ दिनों में कलकत्ता से बम्बई आ गए. टिनू अमिताभ को अब्बास साहब से मिलाने उनके ऑफिस ले गए. मगर देरी होने की बजाय उसी दिन शाम को अमिताभ का काम बन गया.
K.A. Abbas ने टिनू आनंद को एक काम दिया. काम ये था कि उन्हें अमिताभ बच्चन को सिर्फ 5 हज़ार रुपए में फिल्म सात हिंदुस्तानी के लिए साइन करना था. फिल्म में अमिताभ को लीडिंग मैन यानी कवि के दोस्त का रोल दिया गया था. मगर उस दौर के लिहाज़ से भी सपोर्टिंग एक्टर को दी जाने वाली ये बेहद कम फीस थी. अमिताभ किसी भी हाल में एक्टिंग करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने ये ऑफर स्वीकार कर लिया. जब तक ये सब होता, तब तक इंदर साहब को सत्यजीत रे का जवाब आ गया. वो टिनू को फिल्ममेकिंग ट्रेनिंग देने के लिए तैयार थे. ऐसे में टिनू को फिल्म सात हिंदुस्तानी में लीड रोल छोड़कर कलकत्ता जाना पड़ा.

फिल्म सात हिंदुस्तानी के एक सीन फिल्म के सभी एक्टर्स. इसमें अमिताभ आपको सबसे दाहिनी तरफ नज़र आएंगे.
इसके बाद जो रोल टिनू आनंद करने वाले थे, अब वो कवि वाला लीड रोल अमिताभ बच्चन को मिल गया. ये लीड रोल में अमिताभ बच्चन के करियर की पहली फिल्म थी. 1969 में आई फिल्म सात हिंदुस्तानी में अमिताभ के साथ उत्पल दत्त, जलाल आग़ा और अनवर अली जैसे एक्टर्स ने काम किया था.
3. सत्यजीत रे की वजह से कोई टिनू को काम नहीं दे रहा था सत्यजीत रे के साथ पांच साल काम करने के बाद टिनू आनंद बम्बई लौटे. अब वो अपनी फिल्म डायरेक्ट करना चाहते थे. साथ ही वो इस गुमान में भी थे कि सत्यजीत रे जैसे लिविंग लेजेंड के साथ काम किए होने की वजह से उन्हें फटाक से फिल्म मिल जाएगी. मगर बम्बई में उनके साथ कुछ उल्टा ही होने लगा. वो जिसके पास भी काम मांगने जाते, वो शख्स सत्यजीत रे का नाम सुनकर सकुचा जाता. लोगों को लगता कि टिनू ने सत्यजीत रे जैसी सीरियस फिल्ममेकर के साथ काम करके आए हैं. इसलिए वो भी सिर्फ गंभीर सिनेमा ही बनाएंगे. इसी चक्कर में टिनू दो साल तक बेरोज़गार रहे.

कलकत्ता में सत्यजीत रे के फिल्म सेट पर टिनू आनंद. टिनू ने सत्यजीत रे से पांच साल तक फिल्ममेकिंग की ट्रेनिंग ली थी.
अपने एक इंटरव्यू में टिनू आनंद बताते हैं कि उन दो सालों तक बिना फिल्म मिले उनका काम इसलिए चलता रहा क्योंकि वो एक सफल बाप के बेटे थे. उन दो सालों में टिनू कोई फिल्म तो नहीं मिली, मगर इस दौरान उन्होंने 70 ऐड फिल्में डायरेक्ट कीं, जिससे उनके घर का चूल्हा जलता रहा.
4. टिनू को सत्यजीत रे ने नहीं, अजय देवगन के पिता ने सिखाई फिल्ममेकिंग टिनू आनंद अपने तमाम इंटरव्यूज़ में खुलकर बताते हैं कि उन्होंने बेशक सत्यजीत रे जैसे मास्टर आदमी के साथ काम किया हो. मगर उन्हें फिल्ममेकिंग के गुर एक्शन डायरेक्टर वीरु देवगन ने सिखाए. टिनू बताते हैं कि वीरु ने उन्हें वो सबकुछ अनलर्न करने के लिए कहा, जो वो सत्यजीत रे इंस्टिट्यूट से सीखकर आए थे. वीरु ने उन्हें गुरु ज्ञान देते हुए कहा कि अगर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करना है, तो बिना हीरो के काम करना सीख लो. इससे उनका मतलब ये था कि टिनू को वो ट्रिक्स सीखने चाहिए, जिससे वो सेट पर हीरो की एब्सेंस में भी शूटिंग जारी रख सकें.

फिल्म कालिया के फैनमेड पर पोस्टर अमिताभ बच्चन और अमजद खान. इस फिल्म को टिनू ने डायरेक्ट किया था.
टिनू ने वीरु की सिखाई बात सुनी और उसे अमल में लेकर आए. अब वो अपनी फिल्में हीरो के डुप्लीकेट लोगों के साथ शूट कर लेते थे. अब उन्हें सिर्फ उन्हीं सीन्स में हीरो की ज़रूरत पड़ती थी, जहां हीरो को स्क्रीन पर डायलॉग बोलना होता था. टिनू अपनी इस कला का एक नायाब नमूना पेश करते हुए एक किस्सा सुनाते हैं. बकौल टिनू एक बार अमिताभ डबिंग स्टुडियो में अपने सीन्स डब करने आए हुए थे. यहां उन्हें अमज़द खान के साथ उनका एक सीन दिखाया, जिसे देख अमिताभ हैरान-परेशान रह गए. अमिताभ बार-बार सिर्फ एक ही बात कहते-
''मैंने तो कभी अमज़द के साथ ये सीन शूट ही नहीं किया.''

























