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अनुभव सिन्हा की 'भीड़' का सेंसर सर्टिफिकेट वायरल, CBFC ने काटे फिल्म से ये 13 सीन/डायलॉग

'ये तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है' वाली लाइन 'भीड़' के कॉन्टेक्स्ट में एकदम फिट हो जाती है. क्योंकि जिस फिल्म के ट्रेलर में इतनी काट-छांट हुई, वो पिक्चर कैसे ही बची रह जाती.

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फिल्म 'भीड़' का एक सीन.

Anubhav Sinha की फिल्म Bheed को लेकर खूब हंगामा हुआ. ट्रेलर आने के बाद उसे यूट्यूब से डिलीट किया गया. पीएम मोदी की स्पीच हटाई गई. कोविड लॉकडाउन की तुलना पार्टीशन से करने वाली लाइन काटी गई. प्रोडक्शन कंपनी टी-सीरीज़ ने इस ट्रेलर से अपना ज़िक्र हटवा लिया. लोगो से लेकर क्रेडिट प्लेट पर आने वाले नाम तक. इन सब चेंजेज़ के साथ दो दिनों के बाद ट्रेलर को दोबारा यूट्यूब पर डाला गया. जब इस बारे में अनुभव सिन्हा से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ये फिल्ममेकर्स की लड़ाई है. उन्हें लड़ने दें. जनता को इन बातों पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है.

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मगर 'ये तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है' वाली लाइन 'भीड़' के कॉन्टेक्स्ट में एकदम फिट हो जाती है. क्योंकि जिस फिल्म के ट्रेलर में इतनी काट-छांट हुई, वो पिक्चर कैसे ही बची रह जाती. इन दिनों सोशल मीडिया पर 'भीड़' का सेंसर सर्फिकेट वायरल हो रहा है. इसमें उन सभी बदलावों के बारे में बताया गया है, जो सेंसर बोर्ड (CBFC) ने 'भीड़' के मेकर्स से करने को कहा था. सर्टिफिकेशन के लिए 115.30 मिनट यानी 1 घंटे 55 मिनट और 30 सेकंड की फिल्म सौंपी गई थी. सेंसर बोर्ड ने जो कट्स बताए, वो लगाने के लिए बाद फिल्म का रनिंग टाइम रह गया 112.56 मिनट यानी 1 घंटे 52 मिनट और 56 सेकंड.

CBFC ने 'भीड़' में से क्या-क्या हटाने को कहा, उसकी लंबी-चौड़ी लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं. लिखा था,

1)  हिंदी में दी गई मां-बहन की गालियां हटाकर उसे अंग्रेज़ी गालियों से रिप्लेस करें. ऐसा सबटाइटल में भी करें. 
2) अंतरंग दृश्य हटाएं. खासकर आंशिक न्यूडिटी के सीन हटाएं. 
3)  'हिंदुओं की कब्रें', 'रेड इंडियंस', 'पुराण-महापुराण' जैसे शब्द/संवाद हटाएं. उनकी जगह 'हिंदु दफन है वहां', 'नेटिव इंडियंस', पुराण, महाग्रंथ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें. 
4) डायरेक्ट या इन-डायरेक्ट रूप से जहां भी पीएम की स्पीच है, उसे हटाएं. प्रधानमंत्री शब्द की जगह मंत्री शब्द लाएं. दिल्ली के मुख्यमंत्री का वॉयस ओवर हटाएं. 
5) सबटाइटल में जहां भी जाति संबंधित रेफरेंस है, उसे हटाया जाए. 
6) 'तबलीगी जमात' का ज़िक्र कम करें. 

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‘भीड़’ के सेंसर सर्टिफिकेट की कॉपी.

7) जहां भी आंकड़ों की बात हुई है, उसमें बदलाव करें. 
8) 'इंडिया का पार्टिशन लग रहा है' वाला डायलॉग हटाएं. उसकी जगह 'This is such an unprecedented mass migration' यूज़ करें. क्योंकि यहां पर लॉकडाउन जैसी परिस्थिती की तुलना भारत के विभाजन से की गई है. 
9) 'इंडियन सोसाइटी इज़ लाइक धृतराष्ट्र. धृतराष्ट्र को बताना पड़ेगा कि तुम्हारे अपने ही लोग मर रहे हैं' वाले सीक्वेंस से ये विज़ुअल और डायलॉग दोनों हटाएं. 
10) एक डायलॉग में ये कहा गया- 'अरे कोई मीटिंग नहीं है. सब लॉलीपॉप हैं हॉस्पिटल में'. इसमें से 'लॉलीपॉप' की जगह 'अफवाह' शब्द का इस्तेमाल करें. 
11) 'कोरोना जिहाद फैला रहे हैं' वाले डायलॉग में 'जिहाद' शब्द को म्यूट करें. 
12) फिल्म की शुरुआत में आने वाले डिस्क्लेमर में बदलाव करें. 
13) पुलिस ब्रुटैलिटी वाले विज़ुअल्स हटाएं. उन सीन्स में से जिनमें पुलिस माइग्रेंट वर्कर लोगों को पीट रही है. खासकर वो विज़ुअल हटाएं, जिनमें डायरेक्ट मारपीट नज़र आ रही है.

'भीड़' कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान माइग्रेंट वर्करों की मुसीबत पर बात करने वाली फिल्म है. इसमें बताया गया कि उन लोगों को किन मुश्किलों से गुज़रना पड़ा. और कैसे कोई भी सरकारी तंत्र उनकी मदद को आगे नहीं आया. इस फिल्म में राजकुमार राव, भूमि पेडणेकर, पंकज कपूर, दिया मिर्ज़ा, आशुतोष राणा और कृतिका कामरा जैसे एक्टर्स ने काम किया है. डायरेक्ट किया है अनुभव सिन्हा ने. पिक्चर 24 मार्च, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है.  

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