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दुनियाभर के आर्मी ऑपरेशन पर बनी ये 8 बुलंद फिल्में देखकर युद्ध का सारा गणित समझ जाएंगे!

इस लिस्ट में इज़रायल के ऑपरेशन पर बनी ऐसी फिल्म भी है जहां उन्होंने अपनी धरती से 4500 किलोमीटर दूर जाकर आतंकवादियों को मारा था.

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इन आठ फिल्मों में से एक नाम ऐसा भी है जिसके ज़रिए तगड़े डायरेक्टर ने अपना 20 साल का ब्रेक तोड़ा था.

22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ. भारत ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया. ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक की गई. देशवासी भारतीय सेना की तारीफ कर रहे हैं. उनके जज़्बे को सलाम कर रहे हैं. सेना ने बताया कि उनका ऑपरेशन सफल हुआ. सेना के ऑपरेशन के बाद दूसरी ओर ये खबरें भी चलने लगीं कि अब इस पर जल्द ही कोई हिन्दी फिल्म बन जाएगी. खैर वो हिन्दी फिल्म काब बनेगी, और घटनाक्रम का कैसा चित्रण होगा, ये भविष्य की बहस है. आपको उन कमाल की फिल्मों के बारे में बताएंगे जो सेना के असली ऑपरेशन पर आधारित हैं. इस लिस्ट में अमेरिका, भारत और इज़रायल की फिल्में शामिल हैं:

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#1. द सीज ऑफ जेडटविल (The Siege of Jadotville)
डायरेक्टर: रिची स्मिथ 
कास्ट: जेमी डॉरनन, मार्क स्ट्रॉन्ग

साल 1961. कॉन्गो को बेल्जियम से आज़ाद हुए एक साल ही हुआ था. देश में तनाव का माहौल था. गृहयुद्ध के आसार बन रहे थे. ऐसे में यूनाइटेड नेशन्स ने अपने पीसकीपर ग्रुप को यहां भेजा. आयरिश बटेलियन के जवान इस ग्रुप का हिस्सा थे. सितंबर में अचानक से उन पर हमला हो जाता है. ये 157 जवान किस बहादुरी से 3000 हमलावरों से लड़ते हैं, ये फिल्म उसी घटना को दर्शाती है. पीसकीपर्स ने सिर्फ दुश्मन का सामना ही नहीं किया, बल्कि इस समझदारी से लड़े कि उनके एक भी जवान की जान नहीं गई. ‘द सीज ऑफ जेडटविल’ को आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.

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#2. ब्लैक हॉक डाउन 
डायरेक्टर: रिडली स्कॉट 
कास्ट: जोश हार्टनेट, एरिक बाना, टॉम हार्डी

हॉलीवुड में वॉर पर बनी सबसे बुलंद फिल्मों में से एक. ये ऐसा ऑपरेशन था जहां अमेरिकी सेना जीतकर वापस नहीं लौटती. बल्कि अपनी जान बचाकर भागती है. फिल्म एक असली घटना पर आधारित थी, हालांकि मेकर्स ने उसे अपने ढंग से ड्रामेटाइज़ किया. अमेरिकी सेना को सोमालिया की राजधानी मोगादिशू में वॉरलॉर्ड मोहम्मद फराह अदीद को पकड़ने के लिए भेजा जाता है. लेकिन एक हादसे की वजह से उनका पूरा ऑपरेशन बिगड़ जाता है. आगे की कहानी में दिखाया जाता है कि ये लोग किस हालात में अपने आप को बचाते हैं और वहां से बाहर निकलते हैं.

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‘ब्लैक हॉक डाउन’ का एक सीन. 

‘ब्लैक हॉक डाउन’ ने बॉक्स ऑफिस पर सही कमाई की. साथ ही बेस्ट एडिटिंग और बेस्ट साउंड की कैटेगरी में अकैडमी अवॉर्ड भी जीते. रिडली स्कॉट के निर्देशन में बनी इस फिल्म को आप जियो हॉटस्टार पर देख सकते हैं.

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#3. ऑपरेशन थंडरबोल्ट 
डायरेक्टर: मेनाहेम गोलन
कास्ट: क्लॉस किन्सकी, सीबिल डैनिंग

ऑस्कर्स की बेस्ट फॉरेन फिल्म की कैटेगरी में नॉमिनेशन पाने वाली फिल्म. 27 जून 1976 के दिन एक प्लेन इज़रायल से पेरिस के लिए उड़ान भरता है. लेकिन अपनी मंज़िल तक नहीं पहुंच पाता. बीच में फ्यूल भरने के लिए वो प्लेन ग्रीस की राजधानी एथेंस में रुका. वहां उसे हाइजैक कर लिया गया. प्लेन के दो मुख्य हाइजैकर जर्मनी के एक आतंकवादी संगठन- रिवॉल्यूशनरी सेल्स (RZ) के मेम्बर थे. RZ ने पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलिस्तीन नाम के एक संगठन के साथ मिलकर इस प्लेन हाइजैक की प्लानिंग की थी. ये लोग प्लेन को युगांडा ले गए.

उस प्लेन में 259 लोग सवार थे. उनमें से 90 इज़रायल के नागरिक थे. हाइजैकर्स ने इज़रायली सरकार के सामने शर्त रखी, कि जेल में बंदी हमारे 40 साथियों को रिहा किया. इज़रायल की इंटेलीजेंस एजेंसी मोसाद ने आगे जो किया वो किसी असंभव से कम नहीं था. वो 4500 किलोमीटर दूर युगांडा गए. आतंकियों को मार गिराया और यात्रियों को वापस ले आए. इस घटना पर इज़रायल में कई फिल्में बनीं. लेकिन साल 1977 में आई ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ सबसे यादगार काम बनकर उभरा.

#4. म्यूनिक 
डायरेक्टर: स्टीवन स्पीलबर्ग 
कास्ट: एरिक बाना, डेनियल क्रेग

06 सितंबर 1972 की तारीख. जर्मनी के म्यूनिक में ओलिम्पिक गेम चल रहे थे. पूरा इज़रायल उस दिन अपने टीवी के सामने था. लेकिन वो लोग गेम नहीं देख रहे थे. साल 1972 के ओलिम्पिक गेम चल रहे थे. फिलिस्तीन के ‘ब्लैक सेप्टेम्बर’ नाम के एक चरमपंथी संगठन के कुछ सदस्यों ने इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया था. उन्हें बचाने की कोशिश भी हुई लेकिन चरमपंथियों ने नौ के नौ इज़रायली खिलाड़ियों को मार डाला.

आगे मोसाद ने म्यूनिक हमले के लिए ज़िम्मेदार हर शख्स को चुन-चुन कर मारा. स्टीवन स्पीलबर्ग की अकलेम्ड फिल्म ‘म्यूनिक’ मोसाद के इसी ऑपरेशन पर आधारित है.

#5. ग्राउंड ज़ीरो 
डायरेक्टर: तेजस प्रभा विजय देऊसकर 
कास्ट: इमरान हाशमी, सई ताम्हणकर, ज़ोया हुसैन

गाज़ी बाबा, साल 2001 के संसद हमले, अक्षरधाम हमले और कंधार हाइजैक का मास्टरमाइंड था. BSF ऑफिसर नरेंद्र नाथ धर दुबे ने एक ऑपरेशन को हेड किया जिसके अंतर्गत गाज़ी बाबा को मार गिराया गया. ‘ग्राउंड ज़ीरो’ फिल्म उसी ऑपरेशन की कहानी थी. इमरान हाशमी ने BSF ऑफिसर नरेंद्र नाथ धर दुबे का रोल किया. ये फिल्म थ्रिलर के लिए पर्याप्त स्कोप छोड़ती है. लेकिन ये सिर्फ एक थ्रिलर फिल्म नहीं है, ड्रामा वाला पक्ष भी मज़बूत है.

#6. 13 आर्स: द सीक्रेट सोल्जर्स ऑफ बेनगाज़ी    
डायरेक्टर: माइकल बे 
कास्ट: जॉन क्रेसींस्की, जेम्स बैज डेल

एक प्योर एंटरटेनिंग फिल्म. लेकिन आपको एंड तक बांधकर रखती है. ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ वाले माइकल बे फिल्म के डायरेक्टर हैं. लीबिया में स्थित अमेरिकी कॉन्सलेट पर कुछ आतंकी हमला कर देते हैं. अब उस परिसर और वहां मौजूद अधिकारियों की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी छह फौजियों पर आ जाती है. वो विदेशी धरती पर खुद को कैसे डिफेंड करते हैं, यही इस थ्रिलर फिल्म की कहानी है. बता दें कि साल 2012 के असली आतंकी हमले पर आधारित है.

#7. ज़ीरो डार्क थर्टी 
डायरेक्टर: कैथरिन बिगलो   
कास्ट: जेसिका चेसटेन, जेसन क्लार्क

केथरिन बिगलो की फिल्म ‘द हर्ट लॉकर’ ने बेस्ट पिक्चर का ऑस्कर अवॉर्ड जीता था. उसके बाद उनकी अगली फिल्म ‘ज़ीरो डार्क थर्टी’ थी. सितंबर 2001 हमले के बाद अमेरिका किसी भी कीमत पर ओसामा बिन लादेन को पकड़ना चाहता था. अगले एक दशक तक उसे पकड़ने की पुरजोर कोशिश की गई. उसके बाद साल 2011 में लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया गया. कैथरिन की ये फिल्म अमेरिकी सेना की उसी खोज और ऑपरेशन को ड्रामेटाइज़ कर के दिखाती है. एक मज़बूत फिल्म जिसे देखा जाना चाहिए.

#8. द थिन रेड लाइन 
डायरेक्टर: टेरेंस मेलिक
कास्ट: निक नोल्ट, शॉन पेन

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टेरेंस मेलिक की फिल्म में सिनेमैटोग्राफी पर बहुत ध्यान दिया जाता है.  

साल 1978 में टेरेंस मेलिक की फिल्म ‘डेज़ ऑफ हेवन’ आई थी. ये एक क्रिटिकली अकलेमम्ड फिल्म बनी. लेकिन इस फिल्म के बाद टेरेंस को अपने अंदर कुछ बदलाव महसूस हुआ. वो फिल्मों से उकता गए थे. ब्रेक लेने का फैसला किया. ये ब्रेक 20 साल तक खिंच गया. ‘डेज़ पफ हेवन’ के 20 साल बाद आई फिल्म ‘द थिन रेड लाइन’ से टेरेंस ने अपना ये ब्रेक खत्म किया. ये फिल्म साल 1942 की ‘बैटल ऑफ माउंट ऑस्टन’ पर आधारित थी. इस ऑपरेशन में अमेरिकी सैनिकों की जंग जापानी सैनिकों के साथ हुई थी. टेरेंस मेलिक की ये फिल्म सात ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट हुई थी. साथ ही इसने बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का सर्वोच्च पुरस्कार गोल्डन बीयर भी जीता था.
    
 

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