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रेडियो का वो बेताज़ बादशाह, जिसकी आवाज़ सुनते ही दिल के तार झनझना जाते थे

अमीन सयानी के दिलचस्प किस्से

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अमीन सयानी आज 88 बरस के हो गए हैं.

"बहनो और भाइयो, आपका प्यारा दोस्त अमीन सयानी …"

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यह आवाज तकरीबन 6 दशक तक हिंदी और उर्दू जुबान समझने वाले लगभग हर शख्स ने सुनी है. 36 साल (1952-88) तक रेडियो सीलोन पर और उसके बाद विविध भारती पर. उनका कार्यक्रम बिनाका गीतमाला और सितारों की जवानियां बेहद लोकप्रिय हुआ करते थे.

21 दिसंबर 2020 सोमवार को अमीन सयानी 88 बरस के हो गए. इस मौके पर हम आपको उनसे जुड़े 4 किस्से बताएंगे. लेकिन सबसे पहले उनके बैकग्राउंड से परिचय जरूरी है.
इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए रहीमतुल्ला सयानी का नाम कोई नया नही है. 1896 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता इन्होंने ही की थी. इसी अधिवेशन में रहीमतुल्ला सयानी ने बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध उपन्यास आनंद मठ के गीत 'वंदे मातरम' के साथ अधिवेशन शुरू करने की अनुमति दी थी. इसके बाद वंदे मातरम गीत देश के कोने-कोने तक पहुंच गया, और आजादी के बाद इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा हासिल हो गया.
अमीन सयानी की मां कुलसुम सयानी ने वयस्क शिक्षा पर काफी काम किया. कुलसुम सयानी को महात्मा गांधी अपनी बेटी कहा करते थे. महात्मा गांधी के कहने पर ही कुलसुम सयानी ने रहबर  के नाम से तीन भाषाओं हिंदी, उर्दू और गुजराती में अपना अखबार निकालना शुरू किया. और इसी रहबर अखबार में काम करते हुए अमीन सयानी ने अपनी हिंदी और उर्दू की उस मिश्रित जबान को डेवलप किया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गई.

किस्सा नंबर 1: जब अमीन सयानी की आवाज को ऑल इंडिया रेडियो ने रिजेक्ट किया

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यह 50 के दशक के एकदम शुरुआत की बात है. युवा अमीन सयानी ऑडिशन देने मुंबई के ऑल इंडिया रेडियो के दफ्तर पहुंचे. उन दिनों ऑल इंडिया रेडियो के मुंबई स्टूडियो से हिंदी प्रसारण सेवा की शुरूआत हो रही थी. इसी के लिए अमीन सयानी बतौर प्रस्तोता वहां ज्वाइन करना चाहते थे. लेकिन वह जमाना संस्कृतनिष्ठ और परिष्कृत हिंदी का था, इसलिए उनकी हिंदी-उर्दू की मिली-जुली बोली को किसी ने तवज्जो नही दी. लेकिन अमीन सयानी ने हार नही मानी. 1952 में रेडियो सीलोन (शॉर्ट वेव पर श्रीलंका से प्रसारित होने वाला हिंदी चैनल) ज्वाइन कर लिया. उसके बाद रेडियो सीलोन के फिल्मी प्रोग्राम और उन सबमें अमीन सयानी की आवाज ने ऐसा जादू किया कि 70 का दशक आते-आते ऑल इंडिया रेडियो को भी रेडियो सीलोन की तरह अपना एक मनोरंजन चैनल शुरू करना पड़ा. इसका नाम रखा गया विविध भारती. काफी बाद में 1989 में खुद अमीन सयानी ने भी विविध भारती ज्वाइन किया, और ये चैनल लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गया.

किस्सा नंबर 2: जब लेखक कमलेश्वर से भिड़े अमीन सयानी

60 के दशक में एक बार अमीन सयानी की मुलाकात हिंदी साहित्य की बड़ी हस्ती कमलेश्वर से हो गई. अब कमलेश्वर ठहरे साहित्यिक शुद्धता पर ध्यान देने वाले एक साहित्यकार, जबकि अमीन सयानी ठहरे एक प्रस्तोता. दोनों के नेचर ऑफ वर्क में जमीन आसमान का फर्क.

लेकिन फिर भी कमलेश्वर अमीन सयानी से पूछ बैठे,

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"अमीन भाई, तुम भाषा की हत्या क्यों करते हो?"
इस पर अमीन सयानी से रहा नही गया और वह कमलेश्वर से बोले,
"कमलेश्वर भाई, कम्युनिकेशन के दो पहिए होते हैं- एक वक्ता का और एक श्रोता का. आपकी शैली में तो हमारी बात बेहद कम लोगों तक ही पहुंच पाएगी, जो अभी आम आदमी तक आसानी से पहुंच जाती है."
यह सुनकर कमलेश्वर चुप हो गए.
साहित्यकार कमलेश्वर ने अमीन सयानी की हिंदी पर सवाल उठाया था.)
साहित्यकार कमलेश्वर ने अमीन सयानी की हिंदी पर सवाल उठाया था.

किस्सा नंबर 3: किशोर कुमार से झगड़ा और फिर सुलह

एक बार मशहूर गायक किशोर कुमार ने अमीन सयानी को एक इंटरव्यू के लिए बुलाया, और खुद गायब हो गए. उसके बाद दोनों में बातचीत बंद हो गई. दोनों की बातचीत तकरीबन 8 साल तक बंद रही. लेकिन बाद में सुलह-सफाई हो गई. इसके बाद एकबार अमीन सयानी ने किशोर दा को रेडियो सीलोन पर इंटरव्यू के लिए बुलाया. इस बार किशोर ने उन्हें छेड़ते हुए कहा,


"तुम अपनी आवाज से बहुत बोर करते हो, इसलिए जब मैं आऊंगा, तब तुम स्टूडियो के बाहर बैठोगे, और मैं खुद अकेले ही अपनी बात रिकार्ड करूंगा."

इस पर अमीन सयानी मान गए, और उन्हें उसी तरह रिकार्ड करने दिया.
अमीन सयानी का एक बार किशोर कुमार से भी मनमुटाव हो गया था
अमीन सयानी का एक बार किशोर कुमार से भी मनमुटाव हो गया था

किस्सा नंबर 4: जब अमिताभ बच्चन को वॉइस ऑडिशन के लिए समय नही दिया

यह 60 के दशक की बात है. मुंबई में ऑल इंडिया रेडियो के दफ्तर में अमीन सयानी बैठे हुए थे. उन दिनों अमीन सयानी रेडियो सीलोन के साथ-साथ ऑल इंडिया रेडियो पर भी 'सितारों की जवानियां' के नाम से एक प्रोग्राम करते थे. दो-दो जगह प्रोग्राम करने की वजह से उनकी व्यस्तता बहुत हुआ करती थी. इसी दरम्यान एक दिन अमिताभ बच्चन बिना अप्वाइंटमेंट के उनके पास पहुंच गए. वॉइस ऑडिशन देने के लिए. लेकिन अमीन सयानी की व्यस्तता की वजह से उनके ऑफ़िस स्टाफ ने अमिताभ को टरका दिया. कुछ दिनों के बाद अमिताभ ने अमीन सयानी को फिर से अप्रोच करना चाहा, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी. कुल तीन दफा अमिताभ ने उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन तीनों बार कामयाब नहीं हो सके. आखिर में अमिताभ बच्चन ने वॉइस ऑडिशन देने का इरादा छोड़ दिया, और फिल्मी दुनिया में ऐक्टिंग करने चले गए.

बहुत बाद में इस मुद्दे पर अमीन सयानी ने अपनी जुबान खोली और बताया,


"जो हुआ, वह अच्छा ही हुआ. उस दौर में यदि मेरी व्यस्तता नही बढ़ी होती तो शायद देश एक बड़े कलाकार से वंचित रह जाता."
कभी अमिताभ बच्चन भी अमीन सयानी के पास ऑडिशन देने पहुंचे थे.
कभी अमिताभ बच्चन भी अमीन सयानी के पास ऑडिशन देने पहुंचे थे.

लेकिन देश न अमिताभ बच्चन की कला से वंचित हुआ, और न ही अमीन सयानी की आवाज के जादू से. करीब छह दशकों तक पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को अपनी आवाज पर फिदा करने वाले अमीन सयानी को 2009 में भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा. फिलहाल वे उम्र के नवें दशक में रेडियो की दुनिया से दूर मुंबई में अपने परिवार के साथ रिटायर्ड लाइफ जी रहे हैं.

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