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फिल्म रिव्यू- आदिपुरुष

‘आदिपुरुष’ में देखने लायक कुछ नहीं है. क्योंकि बहुत कुछ दिखाई ही नहीं देता. फिल्म अंधेरी लगती है. ऐसा लगता है कि 'आदिपुरुष' को DC ने बनाया है. या फिर फिल्म अपनी खामियों को छुपाने की कोशिश कर रही है.

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'आदिपुरुष' का पोस्टर.

Prabhas की Adipurush सिनेमाघरों में लग चुकी है. थिएटर्स में पब्लिक के साथ एक सीट हनुमान जी के लिए भी छोड़ी गई है. अगर हनुमान जी गलती से भी ये फिल्म देखने चले आए, तो ओम राउत और मनोज मुंतशिर को बहुत कोसेंगे. फिल्म की कहानी तो सबको पता है. मगर मेकर्स ने उसे थोड़ा नया बनाने के लिए रचनात्मक आज़ादी ली है. ये चीज़ भयानक तरीके से बैकफायर कर गई है. अगर आपको लग रहा है कि फिल्म को लेकर बेवजह नकारात्मकता फैलाई जा रही है, तो हम आपको फिल्म के कुछ डायलॉग्स सुनाते हैं. ताकि आप खुद फैसला ले सकें.

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भगवान हनुमान इस फिल्म के कॉमिक रिलीफ हैं. उनके आसपास कई हल्के सीन बुने गए हैं. मसलन, हनुमान जी लंका गए हैं जानकी से मिलने. उन्हें राम की अंगूठी और आश्वासन देने. रावण की सेना उन्हें पकड़ लेती है. इंद्रजीत उनकी पूंछ में आग लगाने के बाद पूछता है-

"जली!"

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इसके जवाब में हनुमान कहते हैं-

"तेल तेरे बाप का. कपड़ा तेरे बाप का. और जलेगी भी तेरे बाप की."

जब हनुमान लंका से लौटकर आते हैं, तो राघव यानी राम उनसे पूछते हैं, क्या हुआ? इसके जवाब में हनुमान कहते हैं-

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"बोल दिया, जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे, उनकी लंका लगा देंगे."

हमने जो भी रामायण देखी या पढ़ी है, उसमें राम-हनुमान समेत तमाम किरदार ज्ञानी-समझदार टाइप के लोग हैं. कम बोलते हैं. काम का बोलते हैं. सभ्य-साधारण भाषा में बात करते हैं. मगर यहां सबकुछ इन-फॉर्मल है. छिछलापन है. रामायण सैकड़ों बरस पहले घटी बताई जाती है. मगर 'आदिपुरुष' देखकर लगता है कि वो कहानी आज घट रही है. वो भी यूपी या दिल्ली के किसी इलाके में. मुझे उस भाषा से कोई समस्या नहीं है. और तमाम खामियों के बावजूद मुझे ओवरऑल फिल्म एंटरटेनिंग लगी. क्योंकि मैं थिएटर में पूजा-पाठ या धार्मिक भावना के साथ नहीं गया था. पिक्चर देखने गया था. मेरा पॉइंट बस ये है कि इन सब पचड़ों में भगवान को मत इन्वॉल्व करिए. आपने भगवान के नाम पर एक सीट रिज़र्व करवा दी. फूल-माला चढ़वा दिया. और पिक्चर ऐसी बना दी, जिसे देखने के बाद नास्तिक लोगों की भी धार्मिक भावनाएं आहत हो जाएं.

इसी सीन में फिल्म की तथ्यात्मक त्रुटी भी पकड़ी जाती है. जब हनुमान जानकी को राम की अंगूठी देते हैं, तो बदले में जानकी उन्हें अपना कंगन निकालकर दे देती हैं. जबकि असल में ऐसा हुआ था कि सीता ने हनुमान को अपना चूड़ामणि दिया था. चूड़ामणि एक जूलरी होती है, जो महिलाएं बालों में पहनती हैं. हेयर क्लिप/पिन जैसा कुछ. मगर मेकर्स को चूड़ा पढ़कर लगा कि ये कंगन जैसी कोई चीज़ होती होगी.  

'आदिपुरुष' पहली बार अपने टेक्निकल पक्ष की वजह से खबरों में आई थी. टीज़र के बाद लोगों ने शिकायत की कि ये क्या VFX है. मेकर्स ने समय लिया. बोले VFX को सुधारकर पिक्चर रिलीज़ करेंगे. पिक्चर देखने के बाद पता चला कि मेकर्स ने VFX में कुछ सुधार नहीं किया है. टीज़र में एक्टर्स की शक्लें भी काफी कंप्यूटर जनरेटेड लग रही थीं. इन्होंने बस उसे ठीक कर दिया. इस फिल्म में बंदर जैसे दिख रहे हैं, अगर उन्हें असल वाले बंदर देख लें, तो कांप जाएं. रावण की पूरी सेना 'गेम ऑफ थ्रोन्स' वाले नाइटवॉकर्स सी लगती है. उसमें कुछ थैनोस जैसे दिखने वाले लोग भी हैं. सुग्रीव और बाली ने अपने गले में एक माला पहनी हुई है. जो 'ब्लैक पैंथर' की नकल है.

'आदिपुरुष' में एक सीन है, जहां राम और रावण की सेनाएं युद्धभूमि में आमने-सामने हैं. थोड़ी छिटपुट लड़ाई चल रही है. यहां पर राम, लक्ष्मण, सुग्रीव, जामवंत और हनुमान गोल घेरा बनाकर खड़े हैं. कैमरा एक गोल चक्कर मारता है और सबकी झलक कैद करता है. ये सीन 2012 में आई पहली 'द एवेंजर्स' से उठाया गया है. नीचे लगे वीडियो में 2.24 मिनट पर वो सीन आप देख सकते हैं.

इस फिल्म में दो ऐसी चीज़ है, जो इस फिल्म को थोड़ी-बहुत देखने लायक बनाती है. या एकदम ही रसातल में जाने से बचाने की कोशिश करती हैं. अव्वल तो, अजय-अतुल का बनाया 'जय श्री राम' गाना और बैकग्राउंड म्यूज़िक. फिल्म में अपने कई कमज़ोर सीन्स में बैकग्राउंड स्कोर की मदद लेती है. और दूसरी चीज़ हैं सैफ अली खान. सैफ, रावण को भरपूर खतरनाक और डरावना बनाने की कोशिश करते हैं. काफी हद तक इसमें सफल भी हो जाते हैं. मगर फिल्म उन्हें लेट डाउन करती है. एक तो रावण के किरदार की हाइट फिल्म में दिखने वाले अन्य सभी किरदारों से ज़्यादा है. जब वो चलते हैं, तो ऐसा लगता है कि रावण किसी वीडियो गेम का हिस्सा है. उनके हिस्से घिसे हुए डायलॉग्स आए हैं. प्लस वो कई मौकों पर अजीबोगरीब आवाज़ें निकालते भी सुनाई देते हैं.

कृति सैनन के पास करने को ज़्यादा कुछ है नहीं. क्योंकि फिल्म शुरू होने के आधे घंटे के भीतर रावण जानकी को किडनैप कर लेता है. उसके बाद वो अशोक वाटिका में राघव का इंतज़ार कर रही होती हैं. दो-तीन गानों में दिखती हैं. अगर उन्हें मौके मिलते, तो वो फिल्म को बेहतर बनाने में ज़रूर मददगार साबित होतीं. राम के किरदार में प्रभास एकदम नहीं जंचे हैं. फिल्म में बमुश्किल ही उनके चेहरे पर कोई भाव नज़र आता है. इतनी आक्रामकता राम के किरदार पर सूट नहीं करती, जितनी इस फिल्म ने लाद दी है. प्रभास को देखकर ऐसा लगता है कि वो 'बाहुबली' के हैंगओवर से निकल ही नहीं पा रहे.

लक्ष्मण के किरदार में सनी शर्मा ऐसे लगते हैं, मानों वो मन में स्वीकार कर चुके हों कि ये उनकी फिल्म नहीं है. वो प्रभास की फिल्म में सपोर्टिंग रोल कर रहे हैं. देवदत्त नागे ने हनुमान का किरदार निभाया है. वो शारीरिक रूप से इस किरदार पर पूरी तरह सूट करते हैं. फिल्म में उनके हिस्से जो कॉमेडी वाले सीन्स रखे गए हैं, भले वो फिल्म पर सूट नहीं करें, मगर नागे उसमें अच्छे लगते हैं.  

'आदिपुरुष' को नए जमाने की रामायण के तौर पर पेश करने की कोशिश की गई थी. मगर वो चीज़ बिल्कुल ही उस दिशा में नहीं जा पाई. कुल जमा बात ये है कि ‘आदिपुरुष’ में देखने लायक कुछ नहीं है. क्योंकि बहुत कुछ दिखाई ही नहीं देता. फिल्म अंधेरी लगती है. ऐसा लगता है कि 'आदिपुरुष' को DC ने बनाया है. या फिर फिल्म अपनी खामियों को छुपाने की कोशिश कर रही है. 'आदिपुरुष' एक औसत से नीचे की फिल्म है, जिसे आप नहीं देखें, तब भी ज़्यादा कुछ मिस करने का मलाल नहीं रहेगा. 

वीडियो: 'आदिपुरुष' के ट्रेलर के VFX, प्रभास और सैफ अली खान के लुक पर लल्लनटॉप वालों ने नई बहस छेड़ दी!

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