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सुल्तान ने इन 10 वजहों से बनाए सुपरफास्ट 200 करोड़!

सलमान खान की ये फिल्म 2016 की सबसे बड़ी हिट हो गई है. बॉक्स ऑफिस पर नोटों की बारिश हो रही है, थियेटरों में समोसे-पॉपकॉर्न बिखर रहे हैं.

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सुल्तान के एक दृश्य में सलमान खान.
अली अब्बास जफर के निर्देशन वाली सलमान खान और अनुष्का शर्मा स्टारर सुल्तान ने रिलीज के पहले हफ्ते में भारत में 208.92 करोड़ रुपये की कमाई की है. विदेश में इस दौरान 100 करोड़ अलग से बनाए हैं. सैटेलाइट राइट्स, म्यूजिक राइट्स और अन्य अधिकारों से होने वाली तगड़ी कमाई तो इसमें जोड़ी ही नहीं है. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं और सलमान खान पिछले कुछ सालों से ऐसा कर रहे हैं. सुल्तान भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे तेजी से 200 करोड़ रुपए कमाने वाली हिंदी फिल्म बन गई है.
ऐसा करने में फिल्म ने सिर्फ सात दिन लिए. वहीं उन्हीं की बड़ी ब्लॉकबस्टर बजंरगी भाईजान और धूम-3 ने इस काम को करने में 9 दिन लिए थे. सलमान के जिगरी दोस्त आमिर खान की फिल्म पीके जो जबरदस्त हिट थी वो भी इस कीर्तिमान में पीछे रह गई है. सुल्तान का बजट करीब 70 करोड़ रहा है.
सलमान की अब दो फिल्में 300 करोड़ के क्लब (सुल्तान, बजरंगी भाईजान) में हैं. उनकी 10 फिल्में 100 करोड़ के क्लब में हैं. शाहरुख, अक्षय, अजय देवगन उनसे इसमें पीछे हैं. सुल्तान पहली और अकेली बॉलीवुड फिल्म बताई जाती है जिसने पहले चार दिनों में लगातार 30 करोड़ से ज्यादा कमाई की. जानते हैं सुल्तान ने कैसे कर दी बॉक्स ऑफिस पर ये धाकड़ चढ़ाई:

1. ईद के कारण मिले दो extra बड़े दिन

इसे ईद के दो बहुत बड़े हॉलिडे मिले थे. शुक्रवार के बजाय ये बुधवार को रिलीज हुई. बुधवार (ईद से पहले का दिन) को इसने 36.54 करोड़ और गुरुवार (ईद) को 37.32 करोड़ की कमाई की. आमतौर पर फिल्मों के पास कमाने के सिर्फ तीन दिन होते हैं. शुक्र-शनि-रवि. उसमें भी रविवार ही प्रमुख दिन होता है क्योंकि उस दिन परिवारों साथ आकर देख सकते हैं.
ये हैं तो वो है.
ये हैं तो वो है.

2. बहुत बड़ी रिलीज मिली

ये massive 4300 परदों पर रिलीज हुई. इतने ज्यादा प्रिंट के साथ तकरीबन कोई पिछली ब्लॉकबस्टर नहीं लगी है. जिन फिल्मों के ऑलटाइम रिकॉर्ड से सुल्तान की तुलना की जा रही है उनके पास सुल्तान से कम स्क्रीन रही हैं. जैसे आमिर की पीके 3600 और धूम-3 3650 परदों पर ही लगी थी. सलमान की ही किक 3800 और बजरंगी भाईजान 4100 परदों पर लगी थी. पिछले साल बाहुबली: द बिगिनिंग 4000 परदों पर लगी. सलमान की ही प्रेम रतन धन पायो 4200 स्क्रीन के साथ सबसे करीब आती है.

3. कबाली और रजनीकांत की मेहरबानी

भारत में दो ही धरतीपकड़ पॉपुलर स्टार हैं. रजनीकांत और सलमान खान. दोनों जितने बुनियादी फैंस किसी के पास नहीं है. इतने बड़े दानवों की टक्कर टली तो फायदा सुल्तान को हुआ. पहले रजनीकांत की नई फिल्म कबाली 7 जुलाई को रिलीज होनी थी. अगर ऐसा हो जाता तो सलमान की फिल्म की कमाई बिलकुल घट जाती. कबाली के न आने से सुल्तान ने खुलकर खेला, लोगों के पास भी सिनेमाघरों में कोई अन्य विकल्प नहीं था. ज्यादातर छोटे शहरों में, जहां ये बुनियादी दर्शक बसते हैं, वहां पूरे शहर के सिंगल स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स परदों की संख्या 14 से लेकर 26 के बीच होती है. तकरीबन सभी में सुल्तान ही लगी हुई थी. कबाली कितनी बड़ी फिल्म है इसका अंदाजा इसी से लगता है कि सुल्तान के पहले टीज़र को जितने दिनों में जितने लोगों ने देखा, वो आंकड़ा कबाली ने उससे आधे दिनों में पार कर लिया. सुल्तान का पहला टीज़र यशराज फिल्म्स ने 11 अप्रैल को रिलीज किया था. ठीक तीन महीने में इसे 1.99 करोड़ से ज्यादा व्यू मिले हैं, वहीं कबाली का पहला टीज़र बीस दिन लेट यानी 30 अप्रैल को रिलीज किया गया और अब तक 2.50 करोड़ व्यू पा चुका है. अब कबाली 22 जुलाई को लगनी प्रस्तावित है.
https://www.youtube.com/watch?v=9mdJV5-eias
https://www.youtube.com/watch?v=vU6A1jpe5k8

4. सुल्तान के नौ 'गुण' भा गए

1) वीर - लड़ने के बाद मूंछों को ताव देता है. 2) विनम्र - रेस्लिंग के बाद विरोधी रेस्लर को हाथ जोड़कर अभिवादन करता है. 3) स्वाभिमानी - कोई कुछ कह दे तो खुद को साबित करके दिखाता है. अंत में पसलियां टूट चुकी होती हैं, मरने का खतरा होता है लेकिन पत्नी और दोस्त उसके प्रस्तोता और प्रो-टेकडाउन रेस्लिंग लीग को बनाने वाले आकाश (अमित साध) से कह देते हैं कि सुल्तान रिंग में जाए बिना नहीं मानेगा. वो अपने मान के लिए जान दे सकता है. 4) वफादार - पति-पत्नी का झगड़ा इतने साल से चलता है लेकिन वो दूसरी शादी वगैरह नहीं करता. हॉलीवुड फिल्म होती तो अब तक दोनों पार्टनर शारीरिक जरूरतें कहीं और से पूरी कर चुके होते. 5) प्रगतिवादी - फिल्म में बीच में वो पत्नी के प्रेगनेंट होने पर ये नहीं कहता कि पहले करियर को तरजीह दो, बच्चे बाद में हो जाएंगे. लेकिन इस गलती को बाद में दुरुस्त करता है. उसकी पत्नी फिर से अपना करियर शुरू करती है. और उसकी बेटी भी रेस्लिंग सीखना शुरू करती है. 6) मर्यादित - गाली नहीं देता. 7) नशामुक्त - सिगरेट, शराब, जर्दा, ख़ैनी जैसा कोई नशा नहीं करता. 8) समाजवादी - पैसे से मोह नहीं. बच्चों के लिए ब्लड बैंक बनवाना है गांव में उसके लिए इतने वर्षों से चंदा जमा कर रहा है. स्कूटर चलाता है. गांव में रहता है. किसी का ट्रैक्टर मिट्‌टी में धंस जाता है तो तुरंत आता है और कंधे से उठाकर निकलवा देता है. हाथ से बुनी हुई स्वेटर पहनता है. कमर्शियल रेस्लिंग में भी उतरता है तो ब्लड बैंक का पैसा जुटाने के लिए. 9) वाकपटु - कोच फतेह सिंह (रणदीप हुड्‌डा) जब उसके मोटे पेट को देख कहता है, I don't train dead people तो वो उसके पहलवान को चित्त करता है और कहता है, मेन्ने पेहलवानी जरूर छोड़ी है, पर लड़ना नहीं भूला.
सुल्तान, कहानी के सेकेंड हाफ में.
सुल्तान, कहानी के सेकेंड हाफ में.

5. तुलसीदास जी वाला रेफरेंस हमें कनेक्ट कर गया

सुल्तान डिश केबल इंस्टॉल करने वाला सीधा सा हरियाणवी नौजवान है. रेस्लिंग से कोई लेना देना नहीं. लेकिन ऐसी लड़की से टकरा जाता है जो महत्वाकांक्षी, करियर उन्मुख है. वो उसे प्रपोज करता है. वो दोस्ती करती है लेकिन सुल्तान के दोस्त उसे उसकी गर्लफ्रेंड और अपनी भाभी बोलते हैं तो वो बड़ी गुस्सा होती है. सुल्तान की औकात को लेकर वैसे ही लताड़ती है जैसे गोस्वामी तुलसीदास जी को उनकी पत्नी ने लताड़ा था जो पीहर गई हुई थी और वे जरा भी विरह बर्दाश्त नहीं कर पाए. उसके मोह में वे तूफानी रात में, नदी में बह रही लाश पर तैरकर, छत से लटके सांप से लटकर पत्नी के कमरे में पहुंचे तो पत्नी ने कहा कि इतना ध्यान भगवान में लगाओ तो वो मिल जाएं. कुछ ऐसा ही था न? जाहिर है हम लोगों की सहानुभूति यहां पत्नी के प्रति नहीं, तुलसीदास के साथ जाती है. क्योंकि हमारी संस्कृति के मुताबिक भगवान का नाम लेने, उसमें मन लगाने, धार्मिक होने वाले लोग अच्छे हैं और पत्नियों के पल्लू या घाघरे से बंधे रहने वाले लोग बुरे होते हैं (वैसे अपमान तो दोनों ही स्थितियों में मिलना है. वैवाहिक जीवन आगे बढ़ाने के लिए घाघरे से बंधें तो भी. नहीं बंधेंगे और बच्चे नहीं होंगे तो कहेंगे डॉक्टर को दिखाओ शादी को बहुत टाइम हो गया). तो सुल्तान को आरफा झाड़ लगाती है कि उसके दिल में ठेस लग जाती है. फिर वो खुद को सबसे बेस्ट बनाने में जुट जाता है. ये संदर्भ हमें हमारी मानस ग्रंथि में वहीं से जोड़ता है.

6. संस्कारों को yes और स्मूच को no

पूरी फिल्म में कोई किस नहीं है. गाल पर भी नहीं है. स्मूच तो दूर की बात है. हम संस्कारी भारतीय दर्शकों को ये बहुत ही सुहाता है. परिवार के परिवार ऐसी फिल्मों पर टूट पड़ते हैं. जैसे हम आपके हैं कौन के 1994 के दौर को याद कर लीजिए. एक-एक परिवार ने दो-दो तीन-तीन बार ये सलमान मूवी देखी. सुल्तान में सलमान और अनुष्का एक तो शादी करते हैं अफेयर नहीं. शादी हो जाती है उसके बाद भी जब उनका स्नेह दिखाना होता है तो दोनों एक-दूसरे के माथे से माथे टिकाकर अपलक देखते रहते हैं. फिल्म में ये कई बार आता है. हमारे लिए रोमांस यही रहता है.
हालांकि ये नहीं कह रहे कि ऐसा स्नेयमय प्यार कमतर है.
हालांकि ये नहीं कह रहे कि ऐसा स्नेयमय प्यार कमतर है.

7. सुल्तान की कहानी = मतलब सलमान की कहानी

पिछले कुछ वक्त से सलमान ने या उनकी टीम ने ये समझदारी सोची कि काले हिरण शिकार मामले और हिट एंड रन केस के बाद उनकी इमेज का मेकओवर किया जाए. इससे अदालत में एक लॉजिक पेश किए जाने की संभावना थी कि मीलॉर्ड, ये देखिए लोगों के लिए कितने बड़े आदर्श हैं. इनकी फिल्मों में कितने नैतिक और जीवन मूल्य होते हैं. बीइंग ह्यूमन की स्थापना के अलावा फिल्मों के विषयों में बदलाव एक बड़ा बदलाव था जो सलमान द्वारा लाया गया. अब जो भी फिल्में वे बना रहे हैं, उनकी कहानी को सलमान के जीवन की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. कि जी, फिल्म के हीरो और अभिनेता की कहानी एक ही है. जैसे बजरंगी भाईजान में वो ऐसे हीरो बने जो दिल का हीरा है. नैतिक मूल्यों वाला है. एक cute गूंगी बच्ची को पाकिस्तान पहुंचाने का बीड़ा उठाता है. उसे वेश्यालय से छुड़ाता है. इसे हनुमान के मिथकीय पात्र से जोड़ा गया. और एक मुस्लिम हीरो को हिंदी पौराणिक पात्र से जोड़ दो तो इससे मादक द्रव्य दूसरा हो नहीं सकता. उस फिल्म में था कि बंदा कितना मददगार है. पूरी जिंदगी उस बच्ची के लिए दांव पर लगा दी. कि मीलॉर्ड, असल जिंदगी में देखिए बीइंग ह्यूमन चला रहे हैं. कैंसर के पीड़ितों को और हजारों अन्य लोगों को मदद दे रहे हैं. इलाज करवा रहे हैं. देखिए, बीइंग ह्यूमन के जरिए हजारों को रोजगार प्रदान करवा रहे हैं. सारी कमाई चैरिटी को जाती है. इन्हें जेल हो गई तो ये सब बंद हो जाएगा. इधर सुल्तान की कहानी यूं रखी गई कि आप अपने जीवन के युद्धों से लड़ें. अंदर के आदमी से लड़ें, बाहर वाले से नहीं. इन्हें जब सलमान के जरिए हम देखते हैं तो हम आराम से रिलेट कर पाते हैं कि सलमान के अंदर भी अहंकार, व्यसन, गुस्सा, लड़ाइयां, प्रेमिका से मारपीट, शराबनोशी जैसे 'अवगुण' रहे हैं और अब वे एकदम बदल चुके हैं. वे इनसे लड़े हैं. निर्देशक अली अब्बास जफर ने भी हाल ही में इंटरव्यू दिया तो उसने कहा कि उन्होंने इस फिल्म में सलमान को लिया ही इसलिए क्योंकि ये कहानी उन्हीं के जीवन से मिलती जुलती है. कि जी, सलमान तो एक fighter आदमी हैं.

https://twitter.com/yrf/status/753265371226996736

8. English नहीं आती पर वो हीरो है

हालांकि बीते एक दशक में अंग्रेजी बोलना जानने वाले भारतीयों की तादाद बहुत बढ़ी है लेकिन आज भी कोई ऐसा हीरो मिलता है जो दिल का अच्छा है, भोला है लेकिन शरीर का चपल, बलशाली है, दिखने में हैंडसम है और दिमाग का होशियार .. और उसे जब इंग्लिश नहीं आती तो अंग्रेजी बोलने वाले people को शर्म आ रही होती है और हम अंग्रेजी में तंग हाथ वालों को मजा आ रहा होता है. तो हम उसका साथ देते हैं. यहां भी सुल्तान को अंग्रेजी नहीं आती और वही बात उसके फेवर में हो जाती है. जैसे जब दिल्ली में 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में जीतने के बाद सुल्तान अली खान और आरफा हुसैन युनाइटेड वर्ल्ड रेस्लिंग में हिस्सा लेने विदेश (लंदन?) जाते हैं और वहां एंकर अंग्रेजी में पूछता है, "वहां (दिल्ली में) मेडल जीतकर कैसा लगा?" तो सुल्तान समझता नहीं है और अंग्रेजी में कहने लगता है, "मैं अपने पिता और दादी का धन्यवाद करता हूं." तो आरफा उसे बताती है कि उनका सवाल है कि जीतकर कैसा लगा? तो उसे जवाब नहीं सूझता है क्योंकि इंगलिस में दो-चार लाइन ही आती है.. और बोल पड़ता है, "भारत माता की जय".

9. रिलीज से पहले रौला पड़ गया था

वैसे तो सलमान के फैंस और अन्य दर्शक खबर रखते हैं कि कब उनकी नई फिल्म आने वाली है लेकिन सुल्तान के प्रदर्शन से ठीक पहले विवाद हुआ जो कुछ हफ्ते बना रहा और इससे फिल्म को जबरदस्त फायदा हुआ. संभवत: ये उनके प्रचारतंत्र का ही एक हिस्सा था. जब सलमान ने एक इंटरव्यू के दौरान वो टिप्पणी कर दी थी कि रेस्लिंग का अभ्यास करने के बाद उनकी हालत रेप की हुई औरत जैसी हो जाती थी. सलमान ने इसे लेकर माफी अब तक नहीं मांगी है लेकिन फिल्म को फोकट का तगड़ा फायदा लगा.

10. काफी दिन बाद अच्छे गाने आए

लगे 440 वोल्ट छूने से तेरे, जग घूमेया तेरे जैसा न कोई और मैं भी नाचूं रिझाऊं सोणे यार को चलूं मैं तेरी राह बुलैया.. जैसे गीत बहुत ही बेसिक हैं और बार-बार सुनते रहने की इच्छा होती है. इरशाद कामिल ने गीत लिखे हैं और विशाल शेखर ने म्यूजिक दिया है. इन दिनों ऐसी फिल्में बहुत ही कम होती हैं पूरे साल में, जिनका म्यूजिक जरा भी सुनने लायक होता है. ये वो फिल्म है. इसमें आवाज भी उन सब गायकों की है जो अभी चलते हैं. राहत फतेह अली खान, मीका, सुखविंदर, पैपों, नूरां सिस्टर्स, विशाल ददलानी, शेखर रवजियानी. इस फिल्म का संगीत काफी अच्छा है. ऑरमैक्स मीडिया के मुताबिक 300 हफ्तों में ये पहली बार हुआ है कि किसी फिल्म के चार गानों ने टॉप-4 स्थान एक हफ्ते तक हासिल करके रखे हों.
https://youtu.be/suTFBDyIjKg?t=8
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