राजनीति में ऐसा कम ही होता है कि दो साल पहले एक इंसान ने पॉलिटिकल पार्टी बनाई और वो सत्ता के शिखर तक पहुंच गया. थलपति विजय ने यह कर दिखाया है. एक्टर से नेता बने जोसेफ विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनने वाले हैं. एक सफल एक्टर होते हुए उन्होंने 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) का गठन किया. 2026 विधानसभा चुनाव में विजय खुद तो जीते, साथ में पार्टी को भी भारी जीत दिलाई. विजय की फिल्मी और राजनीतिक लाइफ में उनके पिता एसए चंद्रशेखर एक अहम किरदार हैं. चंद्रशेखर ने ही विजय को एक्टर बनाया और ‘एक संयोग’ से राजनीति के रास्ते खोले.
जिस पिता ने हीरो बनाया, विजय ने उन्हें ही कोर्ट में घसीटा, अब उनका ही सपना किया साकार
Thalapathy Vijay ने ऐसा काम किया था, किसी तमिल स्टार ने पहले कभी नहीं किया था. विजय ने चेन्नई में अपने पिता SA Chandrasekhar के खिलाफ एक सिविल मुकदमा दायर किया था. ऐसा क्या हुआ, जो विजय को यह कदम उठाना पड़ा? पूरा मामला समझते हैं.


एसए चंद्रशेखर तमिल फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर हैं. उनका जन्म 2 जुलाई, 1945 को तमिलनाडु के रामेश्वरम के थंगाचिमदम में हुआ था. उन्होंने 1978 में 'अवल ओरु पचाई कुझंथाई' से डायरेक्शन में डेब्यू किया. यह एक सोशल ड्रामा था, जिसने उनके अंदर की आवाज को पर्दे पर दिखाया. इंडिया टुडे से जुड़ी जननी के अपनी रिपोर्ट में लिखती हैं कि चंद्रशेखर को आम लोगों के संघर्षों में दिलचस्पी थी, जिसे वे मेनस्ट्रीम तमिल फिल्मों के जरिए दिखाते थे.
चंद्रशेखर ने विजय का डेब्यू कराया1990 के दशक की शुरुआत में जोसेफ विजय एक्टिंग में उतरना चाहते थे. वे अपने पिता की कई फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर पहले ही नजर आ चुके थे, जिसमें 1984 की 'वेत्री' भी शामिल है. इसमें विजय 10 साल की उम्र से पहले ही स्क्रीन पर आ गए थे. जब विजय को हीरो के तौर पर लॉन्च करने का समय आया, तो एसए चंद्रशेखर ने वही किया जो उन्हें नैचुरली आता था. उन्होंने खुद फिल्म डायरेक्ट की.
एसए चंद्रशेखर ने 1992 में 'नालैया थीरपु' (कल का फैसला) फिल्म से जोसेफ विजय का डेब्यू कराया. तब विजय 18 साल के थे. फिल्म फ्लॉप हो गई. यह उस तरह का डेब्यू था जो करियर शुरू होने से पहले ही खत्म कर देता है. लेकिन, चंद्रशेखर ने हार नहीं मानी. उन्होंने विजय को बार-बार कास्ट किया. चंद्रशेखर ने समझ लिया था कि स्टार खोजे नहीं जाते, वे समय के साथ, बार-बार सामने आने से बनते हैं. 1990 के दशक के बीच तक विजय ने अपनी जगह बना ली थी.
विजय का पहला राजनीतिक कदमजोसेफ विजय राजनीति में आने से पहले समाजसेवा के कामों में जुड़े गए. उन्होंने जमीनी स्तर पर लोगों की मदद करना शुरू किया. इसमें विजय के चैरिटी और फैन क्लब का बड़ा रोल था. जुलाई 2009 में विजय अपने सभी चैरिटी और फैन क्लब को एक छत के नीचे ले आए- 'विजय मक्कल इयक्कम'.
'विजय मक्कल इयक्कम' के तहत जोसेफ विजय ने लोगों की भलाई के काम किए. ब्लड डोनेशन कैंप चलाए, बाढ़ पीड़ितों की मदद की और सामुदायिक कार्यक्रम जैसे अनेक आयोजन किए. विजय ने 2011 में पहली बार पब्लिकली राजनीतिक स्टेप लिया. उन्होंने 2011 के विधानसभा चुनाव में AIADMK को सपोर्ट करने का ऐलान किया. तब AIADMK ने 203 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए बंपर बहुमत के साथ सरकार बनाई थी.
उस समय विजय सीधे तौर पर किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े थे. न कोई ऐसा कैंपेन चला रहे थे. 2020 आता है. एसए चंद्रशेखर अपने बेटे विजय को बिना बताए उनके गैर-राजनीतिक संगठन 'विजय मक्कल इयक्कम' को एक पॉलिटिकल पार्टी में कन्वर्ट कर देते हैं. नाम रखा जाता है- 'ऑल इंडिया थलपति विजय मक्कल इयक्कम'. चंद्रशेखर खुद इस पार्टी के महासचिव बनते हैं, अपनी पत्नी शोभा को कोषाध्यक्ष और एक रिश्तेदार पद्मनाभन को पार्टी का अध्यक्ष बनाते हैं.
विजय को यह बात नागवार गुजरी. उन्होंने कहा,
"मेरे पिता ने जो राजनीतिक बयान दिए हैं, उनसे मेरा सीधे या इनडायरेक्टली कोई कनेक्शन नहीं है. मैं अपने पिता की राजनीतिक इच्छाओं को मानने के लिए मजबूर नहीं हूं."
जोसेफ विजय की मां शोभा ने कहा कि उनके पति ने उन्हें अंधेरे में रखा. फिर विजय ने वो काम किया, जो किसी तमिल स्टार ने पहले कभी नहीं किया था. विजय ने चेन्नई में अपने माता-पिता के खिलाफ एक सिविल मुकदमा दायर किया. उन्होंने मांग की थी कि किसी भी राजनीतिक मकसद के लिए उनके नाम का इस्तेमाल करने से रोका जाए.
यह भी पढ़ें: कांग्रेस ने विजय की TVK को समर्थन दिया, तमिलनाडु में इन शर्तों पर बनेगी नई सरकार
अब विजय और एसए चंद्रशेखर के रिश्तों में खटास आ चुकी थी. न्यूज 18 तमिल को दिए एक इंटरव्यू में चंद्रशेखर ने इस अनबन को माना था. उन्होंने कहा था,
"कुछ लोग विजय और मुझे अलग करने की कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने इस अनबन की वजह बाहरी असर को बताया था. उन्होंने जोर देकर कहा था कि सबके सामने अनबन के बावजूद उनका रिश्ता मजबूत बना हुआ है.
2023 की शुरुआत में एसए चंद्रशेखर अपने बेटे के बारे में अलग तरह से बात कर रहे थे. एक इंटरव्यू में उन्होंने माना कि उनका रिश्ता ‘पिछले डेढ़ साल से’ खराब था. लेकिन, उन्होंने जोर दिया कि रिश्ते टूटने की बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है. उन्होंने कहा था,
चंद्रशेखर ने बेटे विजय की तारीफ की"हर किसी की जिंदगी की तरह, हमारे पिता-बेटे के रिश्ते में भी कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन इसके बावजूद, हम दोनों में सुलह है."
2026 की बंपर जीत के बाद एसए चंद्रशेखर ने अपने बेटे विजय की सक्सेस की तारीफ की. उन्होंने पत्रकारों के सामने अपने शब्द को आजादी दी और इसे 'ऐतिहासिक जीत' करार दिया. चंद्रशेखर ने अपने बेटे के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले की भी तारीफ की थी. उन्होंने तो कांग्रेस तक को विजय का साथ देने तक के लिए कह दिया.
जब बेटा वो काम करके दिखाता है, जिसे करवाने में उसके पिता कभी नाकाम हो गए थे, तो उस फीलिंग को एसए चंद्रशेखर ही समझ सकते हैं. चंद्रशेखर जो चाहते थे, हुआ तो वही, लेकिन फर्क बस इतना है कि विजय ने अब राजनीति में जो मुकाम बनाया, वो अपने नाम और मेहनत की बदौलत बनाया. 1992 में एसए चंद्रशेखर ने अपने बेटे को 'नालैया थीरपु' नाम की फिल्म से बतौर हीरो लॉन्च किया था, जिसका हिंदी में अर्थ 'कल का फैसला' है. वह 'कल' आ गया है और 'फैसला' भी आ गया है.
वीडियो: तमिलनाडु चुनाव जीतने के बाद थलपति विजय पर कैसे मीम्स बन रहे?





















